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बड़ी खबर: जयपुर सीमा विस्तार पर हाईकोर्ट का दखल, 539 गांवों में निर्माण पर तुरंत रोक, JDA-कलेक्टर समेत इन विभागों से मांगा जवाब

Jaipur Region Expansion: जयपुर रीजन के सीमा विस्तार मामले में हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए नगरीय विकास विभाग, जयपुर विकास प्राधिकरण, जिला कलक्टर और प्रदूषण नियंत्रण मंडल से जवाब-तलब किया है। कोर्ट ने बिना मास्टर प्लान के हो रहे निर्माण पर रोक लगा दी।

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जयपुर

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Arvind Rao

Mar 19, 2026

Rajasthan High Court halts construction in 539 Jaipur villages seeks reply from JDA Collector and departments

जयपुर सीमा विस्तार पर हाईकोर्ट का दखल (पत्रिका फाइल फोटो)

Jaipur region expansion case: मास्टर प्लान की परवाह किए बिना जयपुर रीजन में पिछले साल शामिल किए गए 679 गांवों के मामले में हाईकोर्ट ने दखल किया है। कोर्ट ने जयपुर रीजन में जुड़े 539 गांवों में निर्माण गतिविधियों और विकास कार्यों पर रोक लगा दी।

वहीं, नगरीय विकास विभाग व स्वायत्त शासन विभाग के प्रमुख सचिव, राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के सदस्य सचिव, जयपुर कलक्टर और जयपुर विकास प्राधिकरण आयुक्त को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया है। अब सुनवाई 21 अप्रैल को होगी।

न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायाधीश बलजिंदर सिंह संधू की खंडपीठ ने अधिवक्ता संजय जोशी की जनहित याचिका पर बुधवार को यह अंतरिम आदेश दिया। वरिष्ठ अधिवक्ता माधव मित्रा और अधिवक्ता जया मित्रा ने कोर्ट को बताया कि अक्टूबर 2025 में अधिसूचना जारी कर जेडीए रीजन में 679 ग्रामीण और कृषि प्रधान गांवों को शामिल किया।

दोगुना हो गया जयपुर का क्षेत्रफल

याचिका में बताया कि इस विस्तार से जयपुर का क्षेत्रफल 3000 वर्ग किमी से बढ़कर करीब 6000 वर्ग किमी हो गया है। जबकि पहले शामिल किए गए क्षेत्र आज भी सड़क, पानी और सीवरेज जैसी सुविधाओं से वंचित हैं। इससे जयपुर विकास प्राधिकरण की क्षमता पर सवाल खड़े होते हैं।

रियल एस्टेट को बढ़ावा देना विकास नहीं

याचिका में 2017 में हाईकोर्ट की ओर से पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी की पत्र याचिका पर दिए गए महत्वपूर्ण निर्णय सहित सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि मास्टर प्लान में बदलाव या विस्तार से पहले पर्यावरणीय आकलन और जनसुनवाई जरूरी है। इनकी अनदेखी की गई है।

इस विस्तार से कृषि भूमि का नुकसान, भूजल स्तर में गिरावट, जंगलों और पर्यावरणीय क्षेत्रों पर दबाव तथा अनियंत्रित रियल एस्टेट गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा ग्राम पंचायतों की शक्तियां खत्म हो जाएंगी। इससे सबसे बड़ा नुकसान गोचर भूमि, चारागाह और सामुदायिक संसाधनों के खात्मे का होगा।

प्रावधान के बिना हो गया विस्तार

यह विस्तार बिना किसी वैध मास्टर प्लान, जोनल डेवलपमेंट प्लान या पर्यावरणीय प्रभाव आकलन के किया गया। मास्टर प्लान 2025 में इन गांवों को लेकर प्रावधान नहीं था और 2047 का मास्टर प्लान अभी तक तैयार नहीं है।

इन गांवों को जेडीए रीजन में शामिल करना मनमाना है और जेडीए एक्ट के प्रावधानों के विपरीत भी है। इस प्रक्रिया में न ग्राम पंचायतों से सलाह ली गई और न किसी स्वतंत्र विशेषज्ञ या पर्यावरणीय अध्ययन को आधार बनाया गया।

याचिका में मांग

अधिसूचना को रद्द कर 679 गांवों को पूर्व स्थिति में बहाल किया जाए। भविष्य में किसी विस्तार को कानूनी प्रक्रिया, पर्यावरणीय मानकों और जनभागीदारी के आधार पर ही लागू किया जाए।