
जयपुर में झालाना के जंगलों से निकलकर इंसानी बस्तियों की तरफ रुख करने वाले लेपर्ड की हलचल ने एक बार फिर वन विभाग की चिंताएं बढ़ा दी हैं। अरण्य भवन के ठीक पास स्थित पॉश 'फॉरेस्ट कॉलोनी' में पिछले तीन सप्ताह से लगातार घूम रही एक मादा लेपर्ड को आखिरकार वन विभाग की रेस्क्यू टीम ने सफलता पूर्वक पिंजरे में कैद कर लिया है। वन अधिकारियों के बंगलों और वीआईपी रिहायशी इलाके के आसपास लेपर्ड का मूवमेंट बने होने से विभाग में हड़कंप मचा हुआ था। HoFF अरिजीत बनर्जी के निर्देशों के बाद एसीएफ जितेंद्र सिंह शेखावत और उनकी विशेषज्ञ रेस्क्यू टीम ने इलाके में ट्रैप केज (पिंजरा) लगाया था, जिसमें देर रात यह मादा पैंथर कैद हो गई। सुबह लेपर्ड को सुरक्षित तरीके से आमागढ़ ले जाकर उसके प्राकृतिक आवास में रिलीज किया गया, जिससे इलाके के निवासियों और वन अधिकारियों ने राहत की सांस ली है।
झालाना लेपर्ड रिजर्व की सीमा से सटी हुई जयपुर की फॉरेस्ट कॉलोनी में पिछले 21 दिनों से मादा लेपर्ड का मूवमेंट लगातार देखा जा रहा था। अरण्य भवन के आसपास देर रात लेपर्ड को टहलते हुए देखे जाने के बाद कर्मचारियों और अधिकारियों के परिवारों में दहशत का माहौल बना हुआ था। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इलाके में गश्त बढ़ाई गई थी।
लगातार बढ़ रही गतिविधियों को देखते हुए हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स (HoFF) अरिजीत बनर्जी ने मामले को गंभीरता से लिया और तुरंत पिंजरा लगाने के निर्देश जारी किए। एसीएफ (ACF) जितेंद्र सिंह शेखावत की निगरानी में वन विभाग की टीम ने अरण्य भवन के पास रणनीतिक स्थान पर पिंजरा लगाया। शिकार का लालच देकर देर रात मादा लेपर्ड को पिंजरे में ट्रैप कर लिया गया।
सुबह होते ही रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची और मादा लेपर्ड के स्वास्थ्य का प्राथमिक परीक्षण किया। पैंथर के पूरी तरह स्वस्थ पाए जाने के बाद उसे विशेष रेस्क्यू वाहन के जरिए आमागढ़ के जंगलों में ले जाया गया। वहां एसीएफ और वाइल्डलाइफ टीम की मौजूदगी में उसे खुले जंगल में सुरक्षित रिलीज कर दिया गया।
इस सफल रेस्क्यू के बावजूद झालाना के करीब 20 से 25 लेपर्ड्स के प्रबंधन, मॉनिटरिंग और ट्रैकिंग सिस्टम पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। इससे पहले भी झालाना के चर्चित मेल लेपर्ड 'संग्राम' को इसी तरह रेस्क्यू करके आमागढ़ में छोड़ा गया था, लेकिन बाद में उसकी मौत हो गई थी। वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट्स का मानना है कि झालाना में पैंथरों की संख्या क्षमता से अधिक होने के कारण वे लगातार रिहायशी इलाकों का रुख कर रहे हैं।
यह पहला मौका नहीं है जब झालाना से सती फॉरेस्ट कॉलोनी में कोई लेपर्ड दाखिल हुआ हो। जंगल और इंसानी आबादी के बीच प्रॉपर बाउंड्री वॉल और जीपीएस ट्रैकिंग मजबूत न होने की वजह से आए दिन वन्यजीव बाहर निकल आते हैं। वन विभाग अब झालाना की बाहरी परिधि पर सुरक्षा घेरा और कैमरा ट्रैप्स मजबूत करने की योजना बना रहा है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।