जयपुर

LPG Crisis: अमेरिका-ईरान युद्ध से राजस्थान में फैक्ट्रियों की हालत खराब, 60 हजार मजदूरों का काम छूटा, तेजी से बढ़ रहा पलायन

LPG Crisis: राजस्थान में एलपीजी संकट की वजह से उद्योगों पर ब्रेक के हालात हैं। औद्योगिक इकाइयों का उत्पादन 40-50 प्रतिशत तक घट गया है। कई इकाइयां बंद होने की कगार पर हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में मजदूर पलायन करने पर मजबूर हैं।
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Apr 15, 2026
Rajasthan industry crisis
औद्योगिक इकाई फोटो-पत्रिका

जयपुर। एलपीजी संकट के कारण राजस्थान के औद्योगिक क्षेत्रों में उत्पादन 40-50 प्रतिशत तक घट गया है और कई इकाइयां बंद होने की कगार पर पहुंच गई हैं। कंपनियों के साथ ही मजदूरों को खाना बनाने के लिए गैस नहीं मिल पा रही है। मिडिल ईस्ट संघर्ष (अमरीका-इजराइल और ईरान युद्ध) का असर अब प्रदेश के उद्योगों पर साफ दिखाई देने लगा है। भिवाड़ी, नीमराणा, बहरोड़, सोतानाला, शाहपुर, घीलोठ, कोटा, सीकर, जयपुर और जोधपुर जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में हालात चिंताजनक हैं।

इन क्षेत्रों में करीब 50 से 60 हजार मजदूरों का रोजगार प्रभावित हुआ है और बड़ी संख्या में श्रमिक पलायन कर रहे हैं। प्रदेश में 5 हजार से अधिक स्टील, इलेक्ट्रॉनिक्स और पावर ग्रिड उत्पाद बनाने वाली इकाइयां संचालित हैं, जिन पर गैस आपूर्ति संकट का सीधा असर पड़ा है। फॉर्जिंग, सरिया मिल, फूड, रबर और हीट ट्रीटमेंट जैसे उद्योगों में एलपीजी का व्यापक उपयोग होता है, जिससे उत्पादन प्रभावित हुआ है।

हर महीने 50 करोड़ का कारोबार प्रभावित

सीकर के नीमकाथाना क्षेत्र में मिनरल्स उद्योगों की 200 में से 150 से अधिक इकाइयां बंद हैं। हर माह करीब 50 करोड़ रुपए का कारोबार प्रभावित हो रहा है। वहीं, भीलवाड़ा में असर सीमित है, जहां कुछ उद्योगों को गैस सप्लाई मिल रही है, लेकिन दरें दोगुनी होने से लागत बढ़ गई है।

भिवाड़ी : 1500 करोड़ का नुकसान

भिवाड़ी में स्थिति सबसे गंभीर है। भिवाड़ी इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रवीण लांबा के अनुसार, कॉमर्शियल एलपीजी सप्लाई पहले बाधित हुई और बाद में सिर्फ 20 प्रतिशत तक शुरू हो पाई। इससे 1200 उद्योग प्रभावित हुए। अब सप्लाई 70 प्रतिशत तक पहुंचने के बावजूद उत्पादन औसतन 50 प्रतिशत ही है। यहां उद्योगों को करीब 1500 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है और लगभग 40 हजार मजदूर बेरोजगार हो गए हैं।

जयपुर : 20-30 प्रतिशत श्रमिकों का पलायन

यूनाइटेड कॉन्फेडरेशन ऑफ राजस्थान इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष निलेश अग्रवाल ने बताया कि बाहर से आए कामगारों को खाना बनाने के लिए गैस नहीं मिल रही। महंगे दाम पर भी गैस उपलब्ध नहीं होने से 20-30 प्रतिशत श्रमिक वापस लौट चुके हैं।

कोटा : यूरिया उत्पादन घटा

एलएनजी आधारित 14 उद्योगों को मांग के मुकाबले केवल 50 प्रतिशत गैस मिल रही है। इससे गड़ेपान यूरिया प्लांट की दो यूनिट और शहर के एक अन्य प्लांट में शटडाउन करना पड़ा। पहले जहां 15 हजार मीट्रिक टन प्रतिदिन उत्पादन होता था, वह घटकर 5 हजार मीट्रिक टन रह गया है। करीब 1100 श्रमिक यहां से पलायन कर चुके हैं और सरकार ने यूरिया वितरण पर रोक लगा दी है।

जोधपुर : 100 इकाइयां बंद

जोधपुर में हैंडीक्राफ्ट उद्योग पर भी संकट गहराया है। 100 से अधिक इकाइयां बंद हो चुकी हैं और अन्य में उत्पादन 50-60 प्रतिशत रह गया है। गैस की कमी से 10 से 15 हजार श्रमिक पलायन कर गए हैं। शहर का मासिक 300 करोड़ रुपए से अधिक का निर्यात घटकर लगभग आधा रह गया है।

केंद्र ने रिपोर्ट मांगी

स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने राज्यों से रिपोर्ट मांगी है और जल्द समाधान का भरोसा दिया है। उद्योग विभाग भी प्रदेशभर से उत्पादन और श्रमिकों की स्थिति की जानकारी जुटा रहा है। वहीं, उद्योग संगठनों का कहना है कि एलपीजी की नियमित आपूर्ति नहीं होने से उत्पादन ठप हो रहा है और मजदूरों का पलायन लगातार बढ़ रहा है।

कागजों में भी शुरू आपूर्ति

अभी कागजों में ही व्यावसायिक एलपीजी की आपूर्ति शुरू हुई है। नियमित रूप से एलपीजी नहीं मिल रही। फूड इंडस्ट्री में सिर्फ एलपीजी का ही उपयोग होता है, किसी अन्य ईंधन का उपयोग करने से स्वाद बदल जाता है। मजदूरों को रोकने के लिए सिर्फ 20 प्रतिशत ही उत्पादन कर रहे हैं। -विरल गर्ग, उपाध्यक्ष, लघु उद्योग भारती, भिवाड़ी

मजदूर पलायन को मजबूर

मजदूरों को खाना बनाने के लिए एलपीजी नहीं मिल रही, वहीं उद्योगों को उत्पादन के लिए कच्चे माल की आपूर्ति भी बाधित है। इसके चलते औद्योगिक इकाइयों का उत्पादन ठप हो रहा है और मजदूर पलायन को मजबूर हैं। सरकार को जानकारी दे रहे हैं। -एन. के. जैन, अध्यक्ष, एम्प्लॉयर्स एसोसिएशन ऑफ राजस्थान

Updated on:
15 Apr 2026 06:20 pm
Published on:
15 Apr 2026 06:05 am