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राजस्थान के इस जिले में बढ़ता भूजल बना संकट, मंडरा रहा ‘सेम’ का खतरा, सरकार हुई अलर्ट

Groundwater Rise: लगातार बढ़ रहे भूजल स्तर से सेम की समस्या का खतरा मंडराने लगा है। इसको लेकर सरकार अलर्ट हो गई है। जमीन में अब 1000 मीटर गहरी खुदाई करके भूजल स्तर बढ़ने की गहन जांच होगी।

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राजस्थान के शुष्क क्षेत्रों में हाई रिजॉल्यूशन जलभृत मानचित्रण के लिए तकनीकी टीम काम करते हुए। (फोटो-पत्रिका)

श्रीगंगानगर। जिले में लगातार बढ़ते भूजल स्तर को लेकर प्रशासन सतर्क हो गया है। भविष्य में संभावित 'सेम' (जलभराव) की समस्या को देखते हुए अब इसकी गहराई से जांच के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करवाई जाएगी। राज्य सरकार ने इस कार्य के लिए 1 करोड़ रुपये का बजट भी स्वीकृत किया है।

जानकारी के अनुसार, भूजल स्तर में लगातार वृद्धि से खेतों में जलभराव की आशंका बढ़ रही है, जिससे कृषि और जमीन की गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसी खतरे को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने विशेषज्ञों की मदद से समस्या के कारणों का वैज्ञानिक तरीके से अध्ययन कराने का निर्णय लिया है।

पहले होगा विस्तृत सर्वे

हाल ही में जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में भूजल डेटा, हेलीबोर्न भू-भौतिकीय सर्वेक्षण और भविष्य में संभावित सेम की स्थिति पर विचार किया गया। इसके बाद निर्णय लिया गया कि पहले विस्तृत सर्वे कराया जाएगा और उसके आधार पर डीपीआर तैयार की जाएगी।

भूजल सर्वेक्षण विभाग तैयार करेगा डीपीआर

डीपीआर तैयार करने की जिम्मेदारी भूजल सर्वेक्षण विभाग और जल संसाधन विभाग को सौंपी गई है, जबकि भूजल सर्वे का कार्य भू सर्वेक्षण विभाग द्वारा किया जाएगा। सर्वे के दौरान जमीन के नीचे लगभग 1000 मीटर तक की गहराई में भूजल की स्थिति का आकलन किया जाएगा, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि जलस्तर बढ़ने के पीछे मुख्य कारण क्या हैं।

हाइड्रोलॉजिकल सर्वे कराने की सिफारिश

भूजल सर्वेक्षण विभाग पहले ही अपने सुझाव जल संसाधन विभाग को सौंप चुका है। विभाग के वैज्ञानिकों ने रिपोर्ट में भू-भौतिकीय और हाइड्रोलॉजिकल सर्वे कराने की सिफारिश की है, जिसे डीपीआर में शामिल किया जाएगा। इससे समस्या की जड़ तक पहुंचकर प्रभावी समाधान तलाशने में मदद मिलेगी।

सर्वे से पता चलेगी असली वजह

जल संसाधन विभाग के अनुसार, दोनों विभागों के सुझावों को मिलाकर एक संयुक्त रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसके बाद किसी विशेषज्ञ एजेंसी को आमंत्रित कर डीपीआर तैयार करवाई जाएगी। यह रिपोर्ट यह तय करेगी कि क्षेत्र में किस प्रकार के कार्य करने होंगे और उनकी लागत कितनी आएगी।

समय रहते समाधान तलाशने का प्रयास

अंतिम रूप से डीपीआर को राज्य सरकार की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। इसके बाद ही जमीनी स्तर पर कार्य शुरू हो पाएगा। प्रशासन को उम्मीद है कि इस पहल से समय रहते सेम की संभावित समस्या का समाधान निकाल लिया जाएगा और किसानों को भविष्य में होने वाले नुकसान से बचाया जा सकेगा।