जयपुर

Mid-Day Meal Scam : राजस्थान में तत्कालीन मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली बैठकों के फैसले अब गंभीर सवालों के घेरे में, जानें

Mid-Day Meal Scam : राजस्थान में कोविड काल के दौरान मिड डे मील योजना के तहत बच्चों को मिलने वाली कुकिंग कन्वर्जन कॉस्ट को लेकर तत्कालीन मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठकों के फैसले अब गंभीर सवालों के घेरे में हैं।

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फाइल फोटो पत्रिका

Mid-Day Meal Scam : राजस्थान में कोविड काल के दौरान मिड डे मील योजना के तहत बच्चों को मिलने वाली कुकिंग कन्वर्जन कॉस्ट को लेकर तत्कालीन मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठकों के फैसले अब गंभीर सवालों के घेरे में हैं। एक ओर विद्यार्थियों को डीबीटी के जरिए भुगतान का निर्णय लिया गया, वहीं दूसरी ओर भारत सरकार के निर्देशों की आड़ में दाल-तेल-मसाले के कॉम्बो पैक की ऐसी व्यवस्था खड़ी कर दी गई, जिसमें पारदर्शिता के बजाय चुनिंदा एजेंसियों को लाभ पहुंचाने के आरोप सामने आए हैं।

तत्कालीन मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 9 जून 2020 को हुई बैठक में कुकिंग कन्वर्जन कॉस्ट से दाल का क्रय नेफेड से करने का निर्णय लिया गया। इसके लिए वित्त विभाग से बिना निविदा सीधे खरीद की अनुमति मांगी गई, लेकिन वित्त विभाग ने 2 जुलाई 2020 को स्पष्ट कर दिया कि राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता अधिनियम-2012 के तहत उपयुक्त प्रक्रिया अपनाना संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है और इसके लिए वित्त विभाग की स्वीकृति आवश्यक नहीं है।

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इसके बाद 7 अगस्त 2020 को फिर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बैठक हुई, जिसमें विद्यार्थियों को कुकिंग कन्वर्जन कॉस्ट राशि डीबीटी के माध्यम से भुगतान करने का फैसला लिया गया। इसके बाद भारत सरकार के अगस्त-सितंबर 2020 के पत्रों में दाल, तेल आदि सामग्री वितरण के निर्देश आए और डीबीटी व्यवस्था से हटकर सामग्री वितरण की प्रणाली लागू कर दी गई।

कॉनफैड ने ली जिम्मेदारी

सरकारी एजेंसियों तिलम संघ, राजफैड और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम ने एक साथ दाल-तेल-मसाले का कॉम्बो पैक स्कूलों तक पहुंचाने में असमर्थता जताई, जबकि राजस्थान राज्य सहकारी उपभोक्ता संघ लिमिटेड कॉनफेड ने यह जिम्मेदारी लेने पर सहमति दे दी।

बड़ा सवाल, खातों में भुगतान के बजाय सामग्री क्यों

नियमों के अनुसार ग्रोसरी आइटम की खुदरा दरों पर खरीद का प्रावधान बताते हुए वित्त विभाग से दोबारा अनुमोदन मांगा गया, लेकिन पत्रावली आपत्तियों के साथ लौटाई गई। इसके बावजूद प्रमुख शासन सचिव, स्कूल शिक्षा के निर्देशों पर प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। गुणवत्ता जांच, भौतिक सत्यापन और एसएमएस सूचना जैसे कागजी प्रावधान जोड़े गए, लेकिन मूल सवाल यही है कि छात्रों के बैंक खातों में सीधे भुगतान करने के बजाय सामग्री वितरण की जरूरत क्यों पड़ी।

मामले की जांच संदीप सारस्वत को

एसीबी ने मिड डे मील योजना के तहत हुए 2023 करोड़ रुपए के घोटाले के संबंध में एफआइआर दर्ज की है। एसीबी डीजी गोविंद गुप्ता ने शुक्रवार को इस मामले की जांच अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संदीप सारस्वत को सौंपी है। अब एसीबी टीम घोटाले से जुड़े दस्तावेज की जांच करेगी। मामले में अभी एक दर्जन अधिकारियों के खिलाफ जांच की अनुमति मिलना शेष है।

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Published on:
10 Jan 2026 02:35 pm
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