जयपुर

Rajasthan Mining Department : राजस्थान खनन विभाग ने उठाया बड़ा कदम, 4 जिलों में रेत खनन के 12 भूखंडों की नीलामी की

Rajasthan Mining Department : राजस्थान खनन विभाग ने बड़ा कदम उठाया। राजस्थान हाइकोर्ट के रोक के बावजूद खनन विभाग ने सूबे के 4 जिलों में रेत खनन के 12 भूखंडों की नीलामी की।

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फोटो -AI

Rajasthan Mining Department : राजस्थान खनन विभाग से बड़ी खबर। खनन विभाग ने प्रदेश के चार जिलों जोधपुर, कोटा, पाली और नागौर में 12 नए रेत खनन भूखंडों की नीलामी की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह नीलामी प्रक्रिया खनन विभाग ने तब की है जबकि राजस्थान हाईकोर्ट ने हाल ही में राज्य के चार जिलों में वर्ष 2024 में बजरी खनन के 93 पट्टों की नीलामी को रद्द कर दिया था।

हाईकोर्ट की खंडपीठ ने राज्य सरकार को यह भी निर्देश दिया कि वह एक रिपोर्ट प्रस्तुत करे जिसमें यह बताया जाए कि खनन के बाद बजरी का प्राकृतिक पुनर्भरण कैसे होगा। हाईकोर्ट ने खनन सामग्री के प्राकृतिक पुनर्भरण के वैज्ञानिक मूल्यांकन के अभाव पर चिंता व्यक्त की।

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विशेषज्ञों और उद्योग से जुड़े लोगों का आरोप है कि नई नीलामी प्रक्रिया इन नियमों का उल्लंघन करती है। खनन विशेषज्ञ प्रदीप सिंह ने कहा, "लागू नियमों के मुताबिक पट्टा खत्म होने के बाद पांच साल तक उसी जगह खनन नहीं हो सकता। प्रभावित क्षेत्रों में रेत के पुनर्भरण पर व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन जरूरी है, लेकिन ऐसा कोई अध्ययन नहीं हुआ।"

पूरे राज्य पर लागू होते हैं केंद्रीय दिशानिर्देश

एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि हाईकोर्ट का आदेश केवल उन चार जिलों तक सीमित था, जहां याचिका दायर हुई थी। लेकिन केंद्रीय दिशानिर्देश पूरे राज्य पर लागू होते हैं। फिर भी विभाग ने आगे बढ़कर नीलामी शुरू कर दी।

अब तक रेत खनन के लिए 256 आशय पत्र हो चुके हैं जारी

ऑल-राजस्थान बजरी ट्रक ऑपरेटर्स वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष नवीन शर्मा ने कहा कि अब तक रेत खनन के लिए 256 आशय पत्र (LOI) जारी हो चुके हैं। हाईकोर्ट की टिप्पणियों के बावजूद इनमें केंद्रीय दिशानिर्देशों का पालन नहीं हुआ। याचिका के समय केवल 93 LOI थे, लेकिन बाद में संख्या बढ़ गई।

सुप्रीम कोर्ट की मंजूर सिफारिशों को किया नजरअंदाज

सूत्रों का दावा है कि राज्य सरकार ने 2021 में सुप्रीम कोर्ट की मंजूर सिफारिशों को नजरअंदाज किया। इनमें पट्टा समाप्ति के बाद पांच साल खनन प्रतिबंध अनिवार्य था। आरोप है कि सरकार ने पुराने खनन क्षेत्रों को 12 से 100 हेक्टेयर के छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर दोबारा नीलाम करने की कोशिश की। इससे पर्यावरण को खतरा बढ़ सकता है, नदियों का तल गहरा सकता है और भूजल स्तर गिर सकता है।

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Updated on:
27 Feb 2026 02:01 pm
Published on:
27 Feb 2026 01:55 pm
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