
Rajasthan New CM: राजस्थान को नया मुख्यमंत्री मिलने का इंतजार लंबा होता जा रहा है। पिछले पांच विधानसभा चुनाव पर नजर डाले तो सामने आया कि उस समय परिणाम आने से शपथ लेने के बीच 3 से 6 दिन का समय लगता रहा है। मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल में शामिल कई विधायकों ने इसी दौरान शपथ ली, लेकिन इस बार सात दिन बीत चुके हैं। प्रदेश में तीन दिसंबर को विधानसभा चुनाव का परिणाम आ गया था। मुख्यमंत्री फेस पर पेंच फंसा होने के कारण यह स्थिति बनी है, हालांकि संभव है कि सोमवार या मंगलवार को विधायक दल की बैठक हो जाए। बैठक में सीएम का नाम तय होने की पूरी संभावना है। भाजपा ने रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के अलावा विनोद तावड़े और सरोज पांडेय को पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार राजस्थान में सीएम के लिए पांच-छह दावेदार हैं। ऐसे में भाजपा आलाकमान कोई रिस्क नहीं लेना चाहता और हर स्तर पर होमवर्क कर रहा है। अगले साल लोकसभा चुनाव को देखते हुए भी कवायद की जा रही है।
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पिछले चुनावों में परिणाम और शपथ ग्रहण
वर्ष 1998- 28 नंबवर को चुनाव परिणाम आया और 1 दिसंबर को सीएम ने शपथ ली।
वर्ष 2003- 4 दिसंबर को परिणाम आने के बाद 8 दिसंबर को शपथ ग्रहण हुआ।
वर्ष 2008- 8 दिसंबर को परिणाम आया, 13 दिसंबर को शपथ ली गई।
वर्ष 2013- 8 दिसंबर को चुनाव परिणाम आया और 13 दिसंबर को सीएम ने शपथ ली।
वर्ष 2018- 11 दिसंबर को परिणाम आने के बाद 17 दिसंबर को शपथ ग्रहण हुआ।
इस बार बिना सीएम उम्मीदवार चुनाव लड़ा, इसलिए भी देरी
भाजपा ने राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ तीनों ही राज्यों में चुनाव से पहले सीएम उम्मीदवार तय नहीं किया था। छत्तीसगढ़ में तो मुख्यमंत्री का नाम तय हो गया और मध्यप्रदेश में संभवतया सोमवार को सीएम चुन लिए जाएंगे। पिछले कई चुनावों में राजस्थान में सीएम उम्मीदवार के साथ भाजपा चुनाव लड़ती रही है। यह भी कारण है कि उस दौरान चुनाव परिणाम आने के बाद शपथ ग्रहण में ज्यादा समय नहीं लगता था।