New initiative in Rajasthan : पिंकी माहेश्वरी की पहल पर्यावरण संरक्षण में बड़ी मददगार साबित हो रही है। पर्यावरण संरक्षण के साथ ही साथ वो ग्रामीण महिलाओं को रोजगार भी उपलब्ध करा रहीं हैं। अपने आफिस की हर ईंट के बीच लिखा राम नाम लिखा, जानें ऐसा क्यों किया।
Rajasthan News : जब हम कुछ अच्छा काम करते हैं तो उसकी खुशबू अपने आप फैल जाती है। खासकर जब कोई महिला कुछ करने का संकल्प लेती है तो वह पूरी तरह उसमें जुट जाती है। यह कहना है सस्टेनेबिलिटी को बढ़ावा देने वाली राजस्थान में जयपुर की पिंकी माहेश्वरी का। पिंकी माहेश्वरी पर्यावरण संरक्षण के साथ ही महिलाओं को सशक्त बनाने का काम कर रही है। उन्होंने अब तक कई महिलाओं को वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाया है। अपने अनोखे अंदाज में काम करने को लेकर उन्हें हाल ही राष्ट्रपति भवन में आमंत्रित किया गया।
पिंकी माहेश्वरी ने उत्पादों के साथ एक नवाचार किया है। वह अपने उत्पादों को रिसाइकिल पेपर और कपड़े से बना रही है। उत्पादों में वो कई किस्म के पौधों के बीज डाल रही है, जिसे फेंकने पर कचरा नहीं बल्कि हरियाली होगी। ऐसे में माहेश्वरी पेन, डायरी, बैग, स्पेशल बॉक्स और गिफ्ट हेम्पर तैयार कर रही है।
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राजस्थान में जयपुर की पिंकी माहेश्वरी ने बताया कि मुझे एक ऐसा ऑफिस बनाना था। जिससे पर्यावरण को हानि न पहुंचे और वो पूरी तरह सस्टेनबल हो। दो वर्ष पहले बने इस ऑफिस को बनाने में 11 महीने लगे। जब इसका निर्माण हो रहा था तो इसकी हर एक ईंट के बीच राम का नाम लिखा गया था। ताकि राम की वाइब ऑफिस और काम में बनी रहें।
पिंकी माहेश्वरी ने आगे बताया कि इसमें हर एक चीज इस तरह से बनाई हुई है जो आपको अपनी रूट्स से जोड़ती है। इसके इंटीरियर के लिए फैन्सी डिजाइन की जगह कबाड़ को चुना। घर पर रखी खराब साइकिल पर पेंट कर उस पर एक लकड़ी का बोर्ड रखा तो आकर्षक टेबल का रूप दिखने लगा। उसके बाद मैं कबाड़ी वालों के पास गई और वहां से पुरानी खराब कार, ऑटो, साइकिल, स्कूटर, जहाज का हेंडल, ट्रेन की लाइट सहित कई सामान लेकर आई और उनसे टेबल, कुर्सी व अन्य चीज बनाईं। ऑफिस का उद्घाटन जयपुर शहर के सबसे बुजुर्ग कबाड़ी और उसके परिवार से करवाया।
पिंकी माहेश्वरी ने अपने काम की शुरुआत वर्ष 2015 से की। इससे पहले उन्होंने 10 वर्ष तक कॉर्पोरेट क्षेत्र में नौकरी की थी। इस दौरान बेटे को समय नहीं दे पा रही थी तो जॉब छोड़ दी। उन्होंने बताया कि एक दिन उनका बेटा पेपर पर काम करने के बाद उसे फेंक रहा था। बेटे को समझा रही थी कि ऐसे पेपर बर्बाद मत करो इनको बनाने में न जाने कितने पेड़ों को अपना
बलिदान देना पड़ता है। तब मेरे पापा ने कहा कि ऐसा करो घर में से कोई पुराना कपड़ा ले लो उसकी लुगदी बनाकर पेपर शीट बना लो। यहीं से बिजनेस का आइडिया विकसित हुआ। कागज के बैग बनाने से शुरुआत कर पिंकी माहेश्वरी और उनकी मां ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं के साथ 1500 से अधिक उत्पाद बना रही हैं। जहां यह पर्यावरण के लिहाजा से भी फायदेमंद हैं वहीं ग्रामीण महिलाओं को रोजगार भी उपलब्ध करा रही हैं।
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