जयपुर

राजस्थान: OBC आयोग की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, 90 में से 25 जातियां अब भी राजनीतिक हाशिए पर, ऐसी है ट्रांसजेंडर्स की स्थिति

राजस्थान ओबीसी आयोग की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि प्रदेश की 90 ओबीसी जातियों में से 25 जातियां अब भी राजनीतिक रूप से हाशिए पर हैं। रिपोर्ट में ट्रांसजेंडर्स की भागीदारी भी बेहद कम बताई गई है। आयोग ने इन वर्गों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने के लिए सरकार को अहम सिफारिशें भेजी हैं।
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Aug 07, 2026
CM Bhajanlal Sharma
CM Bhajanlal Sharma (Patrika File Photo)

Rajasthan OBC Commission Report: जयपुर: राजस्थान में अन्य पिछड़ा वर्ग की 90 में से 25 जातियों को राजनीति में नाम मात्र का प्रतिनिधित्व मिल पाया है। इसी वर्ग में शामिल अनाथ श्रेणी का अब तक खाता ही नहीं खुला है और लगभग इसी तरह का हाल ट्रांसजेंडर श्रेणी का है। ओबीसी (राजनीतिक) आयोग के अध्ययन से इस स्थिति का खुलासा हुआ है।

बता दें कि आयोग ने बुधवार को ही ओबीसी आरक्षण के संबंध में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को रिपोर्ट सौंपी, जिसमें ओबीसी में शामिल 90 जातियों तथा अनाथ और ट्रांसजेंडर श्रेणी की स्थिति के अध्ययन के आधार पर अपनी सिफारिश दी गई है।

कुछ जातियों का दबदबा

भंवरू खान, पूर्व अध्यक्ष, राज्य ओबीसी आयोग का कहना है कि ओबीसी में कुछ जातियों का नौकरी, व्यवसाय और राजनीति सभी जगह दबदबा है। वहीं, कुछ जातियां बहुत ही पिछड़ी हुई हैं। इन पिछड़ी जातियों के पास न शिक्षा है और न आय के स्रोत हैं।

इन पिछड़ी जातियों को आरक्षण के भीतर विशेष कोटा मिलना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट निर्देश दे चुका है कि ओबीसी की जातियों का हर 10 वर्ष में सर्वे होना चाहिए और जिन जातियों को पर्याप्त लाभ मिल चुका है, उन्हें ओबीसी से बाहर किया जाना चाहिए। ओबीसी आयोग भी मजबूर है, वह सरकार की सिफारिश बिना कोई कार्य अपने हाथ में ले नहीं सकता।

50 से भी कम प्रतिनिधित्व

जातियां: तमोली, ठठेरा, भड़भूजा, कुंजड़ा, चोबदार, बागरिया, मुल्तानीज, सिकलीगर, कोतवाल, पटवा, खेरवा, शोरगर, मोगिया, कागजी और फारूकी।

10 से भी कम प्रतिनिधित्व

जातियांः मदारी-बाजीगर, चूनगर, मोची, नट, भोपा, जागरी, हेला, न्यारिया, सिरकीवाल और सपेरा ट्रांसजेंडर प्रतिनिधित्वः 3।

नौकरियों में भी नाममात्र का प्रतिनिधित्व

अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने करीब 14 वर्ष पहले ओबीसी की जातियों के सार्वजनिक सेवाओं में प्रतिनिधित्व का भी अध्ययन किया था, जिसमें भी सामने आया था कि राज्य में इस वर्ग की 25 जातियों का सार्वजनिक सेवाओं में भी नाममात्र का प्रतिनिधित्व रहा है।

Updated on:
07 Aug 2026 08:34 am
Published on:
07 Aug 2026 08:34 am