
राजस्थान की भजनलाल सरकार के सामने इस वक्त सबसे बड़ी प्रशासनिक चुनौती खड़ी हो गई है। राज्य के ग्रामीण इलाकों की रीढ़ माने जाने वाले ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग के मंत्रालयिक कर्मचारियों ने अपनी पुरानी लंबित मांगों को लेकर आंदोलन को और व्यापक बनाने का फैसला किया है। पिछले करीब 20 दिनों से 'स्वाभिमान बचाओ आंदोलन' के बैनर तले ब्लॉक और जिला स्तर पर पेन डाउन हड़ताल कर रहे इन कर्मचारियों ने अब राजधानी जयपुर कूच की रूपरेखा तैयार कर ली है। इस आंदोलन के चलते ग्रामीण क्षेत्रों में आम जनता के रोजमर्रा के प्रशासनिक कार्य, प्रमाण पत्र बनाने के काम और पंचायती राज से जुड़े विकास कार्य पूरी तरह से ठप हो गए हैं। कर्मचारियों ने साफ कर दिया है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर कोई लिखित और ठोस फैसला नहीं लेती, तब तक उनका यह विरोध प्रदर्शन थमने वाला नहीं है।
पंचायतीराज मंत्रालयिक कर्मचारी संगठन (राजस्थान) के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन का सबसे बड़ा असर ग्रामीण विकास योजनाओं पर पड़ा है। सरकार द्वारा ग्रामीण जनता की समस्याओं के समाधान के लिए आयोजित किए जा रहे 'ग्रामीण सेवा शिविर-2026' को कर्मचारियों ने ठप कर दिया है।
आंदोलन के जमीनी हालात कुछ इस प्रकार हैं:
संगठन ने सरकार पर रणनीतिक और प्रशासनिक दबाव बनाने के लिए चरणबद्ध तरीके से जयपुर कूच की योजना बनाई है। आगामी 3 दिनों के भीतर पूरे राजस्थान से पंचायती राज के सरकारी बाबुओं का काफिला जयपुर में डेरा डालेगा।
संगठन द्वारा जारी आधिकारिक कार्यक्रम इस प्रकार है:
23 जून 2026 (मंगलवार शाम): इस दिन राजस्थान के सभी जिलों के जिलाध्यक्ष, जिला महामंत्री और जिला कोषाध्यक्ष अपनी जिला स्तरीय टीमों के साथ जयपुर के लिए रवाना होंगे।
24 जून 2026 (बुधवार): जयपुर पहुंचने के बाद समस्त प्रदेश कमेटी के सदस्य, जिलाध्यक्ष और महामंत्री राज्य सरकार के उच्च प्रशासनिक अधिकारियों और मंत्रियों के समक्ष अपना आधिकारिक मांग पत्र प्रस्तुत करेंगे। इसी दिन शाम को सभी ब्लॉक अध्यक्ष और ब्लॉक मंत्री अपनी कार्यकारिणियों के साथ जयपुर के लिए कूच करेंगे।
25 जून 2026 (गुरुवार): जयपुर पहुंचे सभी ब्लॉक अध्यक्ष, ब्लॉक महामंत्री और ब्लॉक कार्यकारिणी के सदस्य सचिवालय और विभिन्न विभागीय स्तरों पर अपनी मांगों के समर्थन में व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से मांग पत्र सौंपकर दबाव बनाएंगे।
मंत्रालयिक कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से केवल आश्वासनों के भरोसे काम कर रहे हैं, जबकि अन्य राज्यों में उनके कैडर को काफी मजबूत किया जा चुका है। कर्मचारी संगठन मुख्य रूप से निम्नलिखित तकनीकी और प्रशासनिक मांगों को लेकर अड़े हुए हैं:
यदि 23 जून से शुरू हो रहे जयपुर कूच और मांग पत्र सौंपने के दौर के बाद भी भजनलाल सरकार और प्रशासनिक अमले की तरफ से कोई सकारात्मक वार्ता या ठोस आदेश जारी नहीं होते हैं, तो संगठन ने आंदोलन को एक बेहद उग्र और ऐतिहासिक मोड़ देने का निर्णय लिया है।
संगठन के प्रांतीय पदाधिकारियों के अनुसार आगामी बड़े कार्यक्रम इस प्रकार प्रस्तावित हैं:
6 जुलाई 2026: राजस्थान भर से आए हजारों पंचायतीराज मंत्रालयिक कर्मचारी जयपुर की सड़कों पर उतरेंगे और सामूहिक रूप से मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने के लिए आगे बढ़ेंगे।
7 जुलाई 2026: इस आंदोलन का सबसे चौंकाने वाला और संवेदनशील चरण 7 जुलाई को देखने को मिलेगा। कर्मचारियों ने घोषणा की है कि वे अपनी मांगों की अनदेखी के विरोध में जयपुर के ऐतिहासिक 'जल महल' के सामने एकत्रित होंगे और वहां 'जल समाधि' कार्यक्रम का आयोजन करेंगे।