
जयपुर . शहरों के भीतर से गुजरने वाले ऐसे राष्ट्रीय और राज्य राजमार्ग, जो अब शहरी सड़कों का हिस्सा बन चुके हैं, उनके पुराने मार्गाधिकार (राइट ऑफ वे) को अब नए सिरे से तय किया जाएगा। सरकार के इस फैसले का सीधा फायदा उन कॉलोनियों और विकास योजनाओं के भूखंडधारियों को होगा, जिनके भूखंड पुराने राष्ट्रीय या राज्य राजमार्ग की सीमा में आने के कारण नियमन या पट्टे की प्रक्रिया में अटके हुए हैं। नए मार्गाधिकार के हिसाब से ऐसे भूखंडों के पट्टे जारी किए जा सकेंगे। नगरीय निकाय चुनावी सरगर्मियों के बीच नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन विभाग ने इस संबंध में सोमवार को आदेश जारी कर दिए। जिसमें स्थानीय एम्पॉवर्ड कमेटी के माध्यम से मार्गाधिकार तय करने के निर्देश दिए हैं।
आदेश के मुताबिक कई शहरों में राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के बायपास बन जाने के बाद पुराने मार्ग शहर की सामान्य सड़कों में शामिल हो गए हैं। इसके बावजूद इन सड़कों के लिए पहले तय मार्गाधिकार के आधार पर मास्टर प्लान में सड़क की चौड़ाई रखी हुई है। इससे सड़क के दोनों तरफ विकसित भूखंडों के नियमन में दिक्कत आ रही हैं।
जिन जगहों पर पुराने हाईवे का मार्गाधिकार किसी व्यक्ति या नगरीय निकाय की जमीन में दर्ज है और वहां किसी योजना को मंजूरी नहीं मिली है, ऐसे मामलों में भी नया मार्गाधिकार तय कर पट्टे जारी किए जा सकेंगे। स्थानीय एम्पॉवर्ड कमेटी सड़क का नया मार्गाधिकार तय करेगी। यदि किसी राष्ट्रीय या राज्य राजमार्ग का डी-नोटिफिकेशन हो चुका है, तो मार्गाधिकार बदलने के लिए मास्टर प्लान में संशोधन की जरूरत नहीं होगी।
जिन कॉलोनियों में पुराने हाईवे की सीमा के कारण कुछ भूखंडों का नियमन नहीं हो पाया या आंशिक रूप से हुआ, वहां अब नए मार्गाधिकार के अनुसार पट्टे जारी किए जा सकेंगे।
सुओ मोटो 90ए के तहत पहले मंजूर ले-आउट वाली और अब पूरी तरह विकसित कॉलोनियों में नए सड़क मार्गाधिकार के हिसाब से ले-आउट में बदलाव किया जा सकेगा। इसके बाद अधिकतम 70 फीसदी विक्रय योग्य क्षेत्र में पट्टे जारी किए जा सकेंगे।