जयपुर

पुराने हाईवे की वजह से अटके प्लॉटों को मिलेगा पट्टा, राजस्थान सरकार ने बदला नियम; नए सिरे से तय होगी सड़क की चौड़ाई

Rajasthan Urban Development: शहरों के पुराने हाईवे पर फंसे पट्टों को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब सड़क की चौड़ाई नए सिरे से तय कर अटके भूखंडों का नियमन किया जाएगा और पट्टे जारी होंगे।
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Aug 11, 2026
old highway land regularization
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जयपुर . शहरों के भीतर से गुजरने वाले ऐसे राष्ट्रीय और राज्य राजमार्ग, जो अब शहरी सड़कों का हिस्सा बन चुके हैं, उनके पुराने मार्गाधिकार (राइट ऑफ वे) को अब नए सिरे से तय किया जाएगा। सरकार के इस फैसले का सीधा फायदा उन कॉलोनियों और विकास योजनाओं के भूखंडधारियों को होगा, जिनके भूखंड पुराने राष्ट्रीय या राज्य राजमार्ग की सीमा में आने के कारण नियमन या पट्टे की प्रक्रिया में अटके हुए हैं। नए मार्गाधिकार के हिसाब से ऐसे भूखंडों के पट्टे जारी किए जा सकेंगे। नगरीय निकाय चुनावी सरगर्मियों के बीच नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन विभाग ने इस संबंध में सोमवार को आदेश जारी कर दिए। जिसमें स्थानीय एम्पॉवर्ड कमेटी के माध्यम से मार्गाधिकार तय करने के निर्देश दिए हैं।

आदेश के मुताबिक कई शहरों में राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के बायपास बन जाने के बाद पुराने मार्ग शहर की सामान्य सड़कों में शामिल हो गए हैं। इसके बावजूद इन सड़कों के लिए पहले तय मार्गाधिकार के आधार पर मास्टर प्लान में सड़क की चौड़ाई रखी हुई है। इससे सड़क के दोनों तरफ विकसित भूखंडों के नियमन में दिक्कत आ रही हैं।

निजी या निकाय की जमीन होने पर भी पट्टे

जिन जगहों पर पुराने हाईवे का मार्गाधिकार किसी व्यक्ति या नगरीय निकाय की जमीन में दर्ज है और वहां किसी योजना को मंजूरी नहीं मिली है, ऐसे मामलों में भी नया मार्गाधिकार तय कर पट्टे जारी किए जा सकेंगे। स्थानीय एम्पॉवर्ड कमेटी सड़क का नया मार्गाधिकार तय करेगी। यदि किसी राष्ट्रीय या राज्य राजमार्ग का डी-नोटिफिकेशन हो चुका है, तो मार्गाधिकार बदलने के लिए मास्टर प्लान में संशोधन की जरूरत नहीं होगी।

पुराने ले-आउट भी नए मार्गाधिकार के अनुसार बदलेंगे

जिन कॉलोनियों में पुराने हाईवे की सीमा के कारण कुछ भूखंडों का नियमन नहीं हो पाया या आंशिक रूप से हुआ, वहां अब नए मार्गाधिकार के अनुसार पट्टे जारी किए जा सकेंगे।

पुरानी कॉलोनियों में 70 फीसदी तक पट्टे का रास्ता

सुओ मोटो 90ए के तहत पहले मंजूर ले-आउट वाली और अब पूरी तरह विकसित कॉलोनियों में नए सड़क मार्गाधिकार के हिसाब से ले-आउट में बदलाव किया जा सकेगा। इसके बाद अधिकतम 70 फीसदी विक्रय योग्य क्षेत्र में पट्टे जारी किए जा सकेंगे।

Updated on:
11 Aug 2026 01:02 pm
Published on:
11 Aug 2026 01:01 pm