
जयपुर। विधानसभा और लोकसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने पर बगावत कर निर्दलीय या दूसरी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले नेताओं की कांग्रेस में वापसी का सिलसिला तेज हो गया है। कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए नेताओं ने भी अब घर वापसी शुरू कर दी है। पिछले डेढ़ साल में 9 से अधिक प्रमुख नेता कांग्रेस में लौट चुके हैं। एक दिन पहले ही पूर्व सांसद खिलाड़ी लाल बैरवा और विराटनगर के पूर्व विधायक रामचंद्र सराधना की कांग्रेस में वापसी हुई। वहीं, कई अन्य वरिष्ठ नेता भी वापसी की तैयारी में हैं।
पूर्व मंत्री और बागीदौरा से विधायक रहे महेंद्रजीत सिंह मालवीय लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस छोड़कर भाजपा में चले गए थे। भाजपा के टिकट पर डूंगरपुर-बांसवाड़ा से लोकसभा चुनाव लड़ने के बाद जनवरी में उनकी कांग्रेस में वापसी हुई। विधानसभा चुनाव में बसेड़ी से टिकट नहीं मिलने पर खिलाड़ी लाल बैरवा ने निर्दलीय चुनाव लड़ा था और बाद में भाजपा में शामिल हो गए थे। इसी तरह रामचंद्र सराधना ने विराटनगर से टिकट नहीं मिलने पर क्षेत्रीय दल के टिकट पर चुनाव लड़ा था। इसके बाद दोनों को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था।
पिछले साल पूर्व मंत्री अमीन खान और बाड़मेर से लगातार तीन बार विधायक रहे मेवाराम जैन कांग्रेस में लौटे। पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में अमीन खान को लोकसभा चुनाव के दौरान निष्कासित किया गया था, जबकि मेवाराम जैन को अश्लील वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पार्टी से बाहर किया गया था। इनके अलावा पूर्व मंत्री वीरेंद्र बेनीवाल, फतेह खान, ओम बिश्नोई, सुनील परिहार और मुख्तार खान की भी घर वापसी हो चुकी है।
कांग्रेस में वापसी के इच्छुक नेताओं में अभी गोपाल गुर्जर, कैलाश मीणा, सुभाष तंबोली और कांता भील सहित कई नाम शामिल बताए जा रहे हैं। इनके मामलों पर कांग्रेस की अनुशासन समिति में विचार चल रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में पार्टी में घर वापसी का सिलसिला और आगे बढ़ सकता है। यह प्रक्रिया उन नेताओं को फिर संगठन से जोड़ने की कवायद के रूप में भी देखी जा रही है, जो चुनाव के दौरान टिकट वितरण या अन्य कारणों से पार्टी से बाहर कर दिया गया था।