उन्होंने आगे कहा, "इस बार मैं अपने सभी कर्मचारियों को 200, 100, 50, 20 और 10 रुपये के नोटों के बंडल देने जा रहा हूँ। दोस्तों, मैं यह सब किसी दिखावे के लिए नहीं कर रहा हूँ। मुझे पता है कि नौकरी करना क्या होता है। यहाँ जो पैसे का भंडार रखा है, इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि मेरे घर में पैसों के पोटले भरे हुए हैं और मैं उन्हें निकाल-निकाल कर दे रहा हूँ। मेरा मानवता और इंसानियत में यह भरोसा है कि सिर्फ मेरे अकेले के लिए धन की बरसात न हो, सिर्फ मेरे अकेले के घर में खुशी न आए। मेरे जितने भी कर्मचारी हैं, उन सब के घरों में भी धन की बरसात हो और खुशियां आएं। खुद के लिए तो हर कोई कर लेता है, लेकिन सबके लिए करना ही इंसानियत और मानवता की असली पहचान होती है। मैं अपनी इस मजबूत टीम के लिए हमेशा ऐसा करता रहूँगा।"