
जयपुर। राजस्थान में नगर निकायों और पंचायती राज संस्थाओं के सभापतियों की आरक्षण लॉटरी के बाद ओबीसी आरक्षण को लेकर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस ने सरकार पर ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग की हिस्सेदारी कम करने का आरोप लगाकर राजनीतिक हमला तेज कर दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि सरकार ने आरक्षण के लिए जो आंकड़े पेश किए हैं, उनमें विसंगतियां हैं और ओबीसी को उसकी आबादी के अनुपात में प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया है। वहीं, मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने आंकड़ों में त्रुटि की संभावना से इनकार नहीं किया है।
डोटासरा ने कहा कि 41 जिला परिषदों के 1403 निर्वाचन क्षेत्रों में ओबीसी के लिए केवल 192 वार्ड आरक्षित किए गए, जो 13.68 प्रतिशत है। उनके अनुसार 50 प्रतिशत की सीमा के भीतर ओबीसी को 21 प्रतिशत आरक्षण दिया जाता तो 294 वार्ड आरक्षित हो सकते थे। इसी तरह 457 पंचायत समितियों के 8245 निर्वाचन क्षेत्रों में ओबीसी के लिए 1101 वार्ड यानी करीब 13.35 प्रतिशत आरक्षण की अनुशंसा हुई, जबकि 21 प्रतिशत आरक्षण पर 1731 वार्ड आरक्षित होते। यानी 630 वार्ड कम आरक्षित हुए। डोटासरा ने कहा कि सरकार जातिगत जनगणना से बच रही है और अब राजस्थान में आरक्षण के आंकड़ों में कथित विसंगतियां सामने आ रही है।
पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि भाजपा सरकार ने नगर निकायों और पंचायती राज संस्थाओं के सभापतियों की लॉटरी में ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग के साथ अन्याय किया है, बेईमानी की है। ये सिर्फ आरक्षण के आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि संविधान की उस भावना को कुचलने की कोशिश है, जो हर वंचित और पिछड़े वर्ग को उसकी आबादी के अनुपात में न्यायपूर्ण भागीदारी का अधिकार देती है।
डोटासरा ने पूछा कि भाजपा सरकार ओबीसी, एससी और एसटी को उनके अधिकारों के लिए एकजुट होते देखकर जातियों को आपस में लड़ाना चाहती है? OBC रिपोर्ट को लेकर जिस तरह के अधूरे और विवादित आंकड़े सामने आ रहे हैं, उससे समाज में भ्रम पैदा हो रहा है। सरकार को पारदर्शिता के साथ बताना चाहिए कि ये आंकड़े किस सर्वे, किस वैज्ञानिक पद्धति और किस मानक के आधार पर तैयार किए गए हैं। सरकार को जवाब देना चाहिए कि आखिर ओबीसी, एससी-एसटी की हिस्सेदारी घटाने का आधार क्या है और संविधान की भावना के साथ ये खिलवाड़ क्यों? सामाजिक न्याय की आवाज दबेगी नहीं। कांग्रेस पार्टी पूरी मजबूती के साथ हर समाज के हक की लड़ाई लड़ेगी। पंचायत और निकाय चुनाव में भाजपा को इस बेईमानी का खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
वहीं, स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने निकायों की लॉटरी निकलने के बाद कहा कि ओबीसी राजनीतिक प्रतिनिधित्व आयोग को काम करने के लिए पर्याप्त समय और मैन पावर नहीं मिल पाया। आयोग ने जब काम शुरू किया, तभी उसका करीब आधा स्टाफ एसआइआर के काम में लग गया। इसके बाद आयोग ने दोबारा काम शुरू किया तो स्टाफ का एक हिस्सा जनगणना के कार्य में लगा दिया गया। समय और मैन पावर की कमी के कारण आंकड़ों में कुछ त्रुटि की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। यह कहते हुए ही आयोग ने रिपोर्ट सौंपी है।