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राजस्थान के 101 शहरों की सत्ता महिलाओं के नाम, आरक्षण लॉटरी के साथ ही चुनावी दावेदारों का बदल गया सियासी गणित

Rajasthan Nikay Chunav 2026: राजस्थान के 309 नगरीय निकायों में प्रमुखों (महापौर, सभापति, अध्यक्ष) के पदों की आरक्षण लॉटरी के साथ ही चुनावी दावेदारों का गणित बदल गया है।
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jhabar singh kharra

आरक्षण लॉटरी के दौरान मौजूद मंत्री झाबर सिंह खर्रा। फोटो: पत्रिका

जयपुर। राजस्थान के 309 नगरीय निकायों में प्रमुखों (महापौर, सभापति, अध्यक्ष) के पदों की आरक्षण लॉटरी के साथ ही चुनावी दावेदारों का गणित बदल गया है। लॉटरी में 50 सीटें अनुसूचित जाति, 11 अनुसूचित जनजाति, 60 ओबीसी के लिए आरक्षित और 188 सीटें अनारक्षित (ओपन टू ऑल) की गई है। इनमें एससी की 16, एसटी की 3, ओबीसी की 20 और अनारक्षित वर्ग की 62 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की गई है। यानि, 101 शहर सरकारों की कमान महिलाओं के हाथ में रहेगी।

सबसे बड़ा असर राजस्थान के 10 नगर निगमों में दिखा है। इन निगमों में महापौर पद को लेकर राजनीतिक दावेदारियों का गणित भी बदल गया है। दस में 6 निगमों में महिला महापौर के हाथ शहरी सरकार की कमान होगी। यहां पुरुष दावेदारों की राजनीतिक उम्मीदों पर विराम लगा है। कोटा में ओबीसी महिला के लिए सीट आरक्षित होने से यहां ओबीसी महिला दावेदारों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।

जयपुर, जोधपुर, उदयपुर और बीकानेर में महापौर पद अनारक्षित होने से किसी भी वर्ग के दावेदार चुनावी मैदान में उतर सकेंगे। मंत्री झाबर सिंह खर्रा और प्रमुख सचिव रवि जैन की मौजूदगी में गुरुवार को स्वायत्त शासन विभाग के सभागार में लॉटरी निकाली गई। नन्हे बच्चे शिवांश और आराध्य से पर्ची निकलवाई गई। इस दौरान राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। इसकी अधिसूचना भी जारी कर दी।

4 बड़े निगमों में खुली दावेदारी

जयपुर, जोधपुर, उदयपुर और बीकानेर में अनारक्षित सीट होने का सबसे बड़ा असर यह होगा कि यहां आरक्षण के कारण किसी खास सामाजिक वर्ग के दावेदारों की संख्या सीमित नहीं होगी। पार्टियों को टिकट चयन में कई पहलुओं को देखने की चुनौती होगी।

यहां भी महिलाएं दावेदार

अलवर, अजमेर, भीलवाड़ा, पाली और भरतपुर में अनारक्षित महिला तथा कोटा में ओबीसी महिला के लिए महापौर पद आरक्षित हुआ है। इससे इन निगमों में महिला नेताओं और महिला पार्षदों की दावेदारी प्रमुख होगी।

नए सिरे से हुआ आरक्षण निर्धारण

खास यह है कि इस बार आरक्षण की पूरी प्रक्रिया नए सिरे से की गई है। पिछले चुनाव में जो पद आरक्षित थे, उन्हें इस बार आरक्षण प्रक्रिया से बाहर रखते हुए सभी निकायों में नए सिरे से आरक्षण तय किया गया है।

संभागवार निकायों में आरक्षण की स्थिति

संभागनिकायSCSC महिलाSTST महिलाOBCOBC महिलाअनारक्षित महिलाअनारक्षित
अजमेर520803000010033411
भरतपुर320903010006021605
बीकानेर370502000007022508
कोटा280401000005021906
जोधपुर411003000008032308
जयपुर911304060219065318
उदयपुर280100040105021806

यह भी जानें

-उदयपुर संभाग में एससी की केवल एक सीट थी, इसलिए एससी महिला आरक्षण नहीं।
-भरतपुर संभाग में भी एसटी की एक ही सीट होने के कारण एसटी महिला आरक्षण नहीं।
-अजमेर, जोधपुर, कोटा, बीकानेर संभाग में एसटी पद नहीं।

दल बदलेंगे दावेदारों की रणनीति

आरक्षण की लॉटरी के साथ ही भाजपा और कांग्रेस सहित अन्य दलों में स्थानीय स्तर पर दावेदारों की रणनीति बदलना तय है। जिन निकायों में सामान्य वर्ग के दावेदार प्रमुख पद की तैयारी कर रहे थे, वहां आरक्षण बदलने पर उन्हें अब नए विकल्प तलाशने होंगे। वहीं एससी और ओबीसी आरक्षित निकायों में संबंधित वर्ग के नेताओं के बीच टिकट की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। खास यह है कि आरक्षण केवल चुनावी टिकट का सवाल नहीं है। महापौर, सभापति और अध्यक्ष पद के आरक्षण के साथ स्थानीय निकायों में पार्टी के भीतर शक्ति संतुलन भी प्रभावित होगा। ऐसे में पार्टियों को नए सामाजिक समीकरण के हिसाब से चेहरे तय करने होंगे।

मंत्री चूके, अफसरों ने टोका तो सुधारी बात

मंत्री झाबर सिंह खर्रा से महापौर पदों के आरक्षण को लेकर चूक हो गई। मीडिया से बातचीत में मंत्री ने पहले कहा कि जयपुर को छोड़कर प्रदेश के सभी नगर निगमों में महापौर पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। अधिकारियों ने उन्हें टोका और सही स्थिति बताई तो मंत्री ने झिझकते हुए अपनी बात सुधारी। मंत्री ने बाद में स्पष्ट किया कि प्रदेश के 10 नगर निगमों में 60 प्रतिशत पर कमान महिलाओं की होगी।

यहां देखें पूरी लिस्ट