Tika Ram Jully: नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सोनम वांगचुक और आप नेता राघव चड्ढा का उदाहरण देते हुए कहा कि कई बार अपनी बात रखने पर लोगों को चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
जयपुर। राजीव गांधी स्टडी सर्कल, भारत सेवा संस्थान और बियानी लॉ कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को विद्याधर नगर स्थित बियानी लॉ कॉलेज के उत्सव सभागार में भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर जयंती के उपलक्ष्य में सेमिनार हुई। ‘संविधान व संवैधानिक संस्थाओं के समक्ष चुनौतियां एवं संभावनाएं’ विषय पर इस कार्यक्रम में शिक्षाविदों और राजनीति से जुड़े विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों के साथ विचार साझा किए। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई।
कार्यक्रम में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि संविधान आंबेडकर के दूरदर्शी दृष्टिकोण और समानता के सिद्धांतों पर आधारित है। उन्होंने कहा कि संविधान में सभी प्रावधान तय हैं, लेकिन वर्तमान समय में उसके सामने कई गंभीर चुनौतियां खड़ी हैं और देश में तानाशाही जैसी स्थिति बनती दिखाई दे रही है। उन्होंने सोनम वांगचुक और आप नेता राघव चड्ढा का उदाहरण देते हुए कहा कि कई बार अपनी बात रखने पर लोगों को चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी स्थिति बन रही है, जहां वर्तमान सरकार राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव कराने पर भी विचार नहीं कर रही है।
टीकाराम जूली ने युवाओं का आह्वान किया कि वे कथनी और करनी के अंतर को समझें। उन्होंने कहा कि आज जाति और धर्म की राजनीति के हावी होने के बावजूद यदि हमारा देश एकजुट है तो हमारे संविधान के कारण। उन्होंने कहा कि इसलिए वर्तमान समय में संविधान की रक्षा करना और उसके सिद्धांतों का पालन करना हम सभी की जिम्मेदारी है।
दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दू कॉलेज के प्रोफेसर रतनलाल ने कहा कि संविधान के प्रभावी संचालन के लिए उसके सिद्धांतों को ईमानदारी से लागू करना आवश्यक है। विशिष्ट अतिथि जी.एस. बाफना ने कहा कि आज अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीमाएं देखने को मिल रही हैं।
कार्यक्रम में हिन्दू कॉलेज के प्रोफेसर रतनलाल, राजस्थान लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष बी.एम. शर्मा, राजीव गांधी स्टडी सर्कल के डॉ. ध्यान सिंह गोठवाल, बियानी कॉलेज के चेयरमैन डॉ. राजीव बियानी तथा निदेशक डॉ. संजय बियानी ने डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों को जीवन में अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।