जयपुर

Rajya Sabha Election : राजस्थान BJP से सतीश पूनिया और अलका गुर्जर का नामांकन, CM भजनलाल और वसुंधरा राजे रहे मौजूद

राजस्थान की 3 राज्यसभा सीटों के लिए नामांकन प्रक्रिया पूरी। भाजपा के डॉ. सतीश पूनिया और डॉ. अलका गुर्जर ने दाखिल किया पर्चा। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और वसुंधरा राजे रहीं मौजूद।

3 min read
Jun 08, 2026
Rajasthan Rajya Sabha Election 2026 Satish Poonia Alka Gurjar Filing Nominations
Rajasthan Rajya Sabha Election 2026

देश की संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा के लिए राजस्थान की 3 खाली हो रही सीटों पर होने वाले द्विवार्षिक चुनाव को लेकर सोमवार को नामांकन के अंतिम दिन जयपुर में राजनीतिक हलचल देखने को मिली। भारतीय जनता पार्टी के आलाकमान द्वारा घोषित किए गए दोनों अधिकृत प्रत्याशियों- डॉ. सतीश पूनिया और डॉ. अलका गुर्जर ने विधानसभा सचिवालय पहुंचकर चुनाव अधिकारी के समक्ष अपने-अपने नामांकन के सैट दाखिल किए। विधानसभा में संख्या बल के वर्तमान समीकरणों को देखते हुए इन दोनों ही नेताओं का निर्विरोध दिल्ली (राज्यसभा) जाना पूरी तरह तय माना जा रहा है।

इस नामांकन प्रक्रिया के दौरान सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाला पहलू भाजपा के भीतर का शक्ति संतुलन और नेताओं की सामूहिक मौजूदगी रही। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा दोनों ही उम्मीदवारों के नामांकन के समय विधानसभा में उपस्थित रहे और उन्हें अग्रिम बधाई दी। इस दौरान भाजपा संगठन और सरकार के तमाम शीर्ष मंत्रियों और विधायकों का जमावड़ा विधानसभा के विशेष कक्ष में नजर आया, जिससे यह साफ संदेश देने का प्रयास किया गया कि पार्टी के भीतर टिकट वितरण और संगठनात्मक निर्णयों को लेकर पूरी तरह से एकराय है।

डॉ. सतीश पूनिया का नामांकन

भाजपा के कद्दावर जाट नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया जब अपना नामांकन पत्र दाखिल करने के लिए आगे बढ़े, तो उनके साथ राजस्थान सरकार का पूरा शीर्ष नेतृत्व ढाल बनकर खड़ा नजर आया। डॉ. पूनिया के नामांकन के समय मुख्य रूप से भाजपा के वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़, उप-मुख्यमंत्री दीया कुमारी और दूसरे उप-मुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा मौजूद रहे।

पूनिया की उम्मीदवारी को राजस्थान की राजनीति में जाट वोट बैंक को साधने और संगठन के प्रति उनकी दीर्घकालिक निष्ठा के इनाम के रूप में देखा जा रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव में आमेर सीट से बेहद मामूली अंतर से चुनाव हारने के बाद भी पार्टी ने उन्हें लगातार हरियाणा का चुनाव प्रभारी बनाकर बड़ी जिम्मेदारी दी थी और अब उन्हें सीधे देश की सबसे बड़ी पंचायत में भेजने का निर्णय लिया है। नामांकन के बाद डॉ. सतीश पूनिया ने केंद्रीय नेतृत्व का आभार जताते हुए कहा कि वे हमेशा खुद को एक साधारण कार्यकर्ता मानते हैं और उच्च सदन में राजस्थान के हितों और किसानों की आवाज को पूरी मजबूती से उठाएंगे।

डॉ. अलका गुर्जर का नामांकन

सोमवार को हुए इस नामांकन का दूसरा सबसे दिलचस्प और नया एंगल डॉ. अलका गुर्जर के नामांकन के दौरान देखने को मिला। भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव और दिल्ली की सह-प्रभारी डॉ. अलका गुर्जर जब अपना पर्चा दाखिल करने कक्ष में पहुंचीं, तो उनके साथ राजस्थान भाजपा की सबसे कद्दावर नेता और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे विशेष रूप से मौजूद रहीं। वसुंधरा राजे की इस उपस्थिति ने राजनीतिक पंडितों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि पार्टी के भीतर अंदरूनी समीकरणों को बेहद सलीके से साधा जा रहा है।

अलका गुर्जर के नामांकन के दौरान उनके पति और राजस्थान सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. नाथू सिंह गुर्जर भी उनके साथ खड़े नजर आए। अलका गुर्जर की उम्मीदवारी के जरिए भाजपा ने पूर्वी राजस्थान के गुर्जर समुदाय के साथ-साथ महिला प्रतिनिधित्व को भी एक बड़ा और मजबूत कूटनीतिक संदेश दिया है। वर्ष 2013 में बांदीकुई से विधायक रह चुकीं डॉ. अलका गुर्जर लंबे समय से दिल्ली के केंद्रीय संगठन में बेहद सक्रिय भूमिका निभा रही हैं और उनकी इस एंट्री से राजस्थान से राज्यसभा में महिला सांसदों की भागीदारी और सुदृढ़ होगी।

कांग्रेस के नीरज डांगी चुके हैं पर्चा दाखिल

इस त्रिस्तरीय राज्यसभा चुनाव के तीसरे कोण की बात करें तो मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस की ओर से उनके निवर्तमान राज्यसभा सांसद नीरज डांगी पहले ही अपना नामांकन पत्र चुनाव अधिकारी के समक्ष दाखिल कर चुके हैं। नीरज डांगी के नामांकन के समय कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सहित कई वरिष्ठ कांग्रेस विधायक प्रस्तावक के रूप में विधानसभा पहुंचे थे।

3 सीटों पर 3 ही उम्मीदवार, चुनाव की नौबत नहीं

राजस्थान से इस बार कुल 3 राज्यसभा सीटें खाली हो रही थीं और विधानसभा में विधायकों की संख्या के अनुपात के आधार पर भाजपा के खाते में 2 और कांग्रेस के खाते में 1 सीट जाना गणितीय रूप से पूरी तरह साफ था। दोनों ही दलों ने जमीनी हकीकत और संख्या बल को समझते हुए अतिरिक्त या निर्दलीय उम्मीदवार खड़े करके किसी भी प्रकार की क्रॉस वोटिंग या हॉर्स ट्रेडिंग (विधायकों की खरीद-फरोख्त) के जोखिम से दूरी बनाए रखी। इसका सीधा मतलब यह है कि नामांकन पत्रों की जांच और नाम वापसी की समय-सीमा समाप्त होने के बाद इन तीनों ही उम्मीदवारों- डॉ. सतीश पूनिया, डॉ. अलका गुर्जर और नीरज डांगी के निर्विरोध निर्वाचन की आधिकारिक घोषणा कर दी जाएगी और चुनाव के लिए वोटिंग कराने की नौबत नहीं आएगी।

Published on:
08 Jun 2026 01:43 pm