Rajasthan Road : ईरान इजराइल युद्ध की वजह से राजस्थान में सड़क निर्माण कार्य में ब्रेक लगा। डामर, लिक्विड डीजल ऑयल और इमर्शन ऑयल की कीमतें आसमान छू रहीं हैं। बढ़ी कीमतें अदा करने के बावजूद माल नहीं मिल रहा है। ठेकेदार, इंजीनियर और NHAI अफसर सभी परेशान हैं।
Rajasthan Road : ईरान इजराइल युद्ध की वजह से राजस्थान में सड़क निर्माण कार्य धीमा पड़ गया है। इसकी मुख्य वजह के पीछे पेट्रोलियम से बनी सामग्री की भारी कमी है। ईरान युद्ध के कारण दुनियाभर में पेट्रोकेमिकल सप्लाई प्रभावित हुई है। जिसमें पेट्रोलियम-आधारित सामग्री बिटुमेन, एस्फाल्ट जैसी जरूरी चीजें नहीं मिल पर रही हैं। कोटा डिवीजन में करीब 600 करोड़ रुपए के सड़क प्रोजेक्ट बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। एनएच-27 और एनएच-148डी पर काम रुकने लगा है। डामर बिछाने का काम कई परियोजनाओं पर बंद कर दिया गया है। नाम न छापने की शर्त पर एक ठेकेदार ने बताया, कोटा डिवीजन में सड़क निर्माण परियोजनाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।
ठेकेदारों के अनुसार, एनएच-27 पर 20,000 टन डामर की जरूरत है, लेकिन सिर्फ 7,000 टन ही मिल पाया है। पहले डामर की कीमत 40,000 रुपए प्रति टन थी। अब यह कीमत 50,000 रुपए से ऊपर चली गई है। उस पर हालात ऐसे हैं कि इस कीमत पर भी माल मिलना मुश्किल हो गया है।
इसी तरह, परियोजना स्थल पर भारी मशीनें चलाने के लिए इस्तेमाल होने वाले लिक्विड डीजल ऑयल (LDO) की भी कमी है। जरूरत 27 लाख लीटर थी, पर सिर्फ 10 लाख लीटर ही पहुंचा। इमर्शन ऑयल की भी कमी है। ठेकेदारों ने बताया कि LDO की कीमतें लगभग 45,000 रुपए प्रति टन से बढ़कर लगभग 60,000 रुपए प्रति टन हो गई हैं, बावजूद इसके आपूर्ति अनियमित बनी हुई है।
सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाला एक अन्य पेट्रोलियम उत्पाद, इमर्शन ऑयल, भी कम मात्रा में उपलब्ध है। लगभग 9,000 टन की आवश्यकता के मुकाबले, साइटों को अब तक 3,500 टन ही प्राप्त हुआ है। इस सामग्री की कीमतें लगभग 38,000 रुपए प्रति टन से बढ़कर लगभग 50,000 रुपए प्रति टन हो गई हैं। इसमें जीएसटी शामिल नहीं है।
ठेकेदार कहते हैं कि उन्होंने पैसे समय पर दिए और कॉन्ट्रैक्ट भी सही थे, लेकिन सप्लाई करने वाले कंपनियां सामग्री नहीं दे पा रही हैं। क्योंकि परिष्कृत पेट्रोकेमिकल उत्पाद घरेलू बाजारों में पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंच रहे हैं।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अधिकारियों का भी मानना है कि सामग्री की कमी से काम प्रभावित हुआ है। उन्होंने ठेकेदारों को सलाह दी है कि जहां डामर का काम रुका है, वहां दूसरे काम जारी रखें ताकि प्रोजेक्ट पूरी तरह ठप न हो।
सबसे ज्यादा प्रभावित प्रोजेक्ट्स में बूंदी जिले से गुजरने वाले 199 करोड़ रुपए की गुलाबपुरा-उनियारा (240 किमी) वाली NH-148D सड़क और लगभग 171 करोड़ रुपए की कोटा-भंवरगढ़-केलवाड़ा वाली NH-27 की 104 किमी लम्बी सड़क शामिल हैं। दोनों पर डामर बिछाने का काम रोक दिया गया है। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्सों में भी देरी हो रही है। हालांकि गुरुग्राम-जयपुर और जयपुर-देवली वाले हिस्से अभी ज्यादा प्रभावित नहीं हैं।
एनएचएआई के परियोजना निदेशक अजय आर्य ने कहा कि अधिकारी स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं और आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। आर्य ने कहा, "हालांकि इन क्षेत्रों में तत्काल कोई संकट नहीं है, लेकिन आपूर्ति में व्यवधान जारी रहने पर कमी की समस्या और बढ़ सकती है। हम आवश्यक व्यवस्था कर रहे हैं और जहां से भी संभव हो, सामग्री प्राप्त कर रहे हैं ताकि काम बाधित न हो।"
1- पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष ने कच्चे तेल के आयात को बाधित कर दिया है, जिससे सड़क निर्माण कार्यों में उपयोग होने वाले बिटुमेन और पेट्रोकेमिकल्स की कमी हो गई है।
2- एस्फाल्ट की कीमतें 40,000 रुपए प्रति टन से बढ़कर 52,000 रुपए हो गई हैं।
3- लिक्विड डीजल ऑयल (एलडीओ) की कीमतें 46,000 रुपए प्रति टन से बढ़कर 66,000 रुपए प्रति टन हो गई हैं, जबकि इमर्शन ऑयल की कीमत 40,000 रुपए प्रति टन से बढ़कर 56,000 रुपए प्रति टन हो गई हैं।
5- वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान के कारण ठेकेदारों को प्रमुख कच्चे माल की खरीद में कठिनाई हो रही है।
3- बिटुमेन की कमी, बढ़ती लागत और मानसून के आने से निर्माण कार्य की समयसीमा खतरे में पड़ सकती है और इससे रोजगार में कटौती भी हो सकती है।