राजस्थान विधानसभा में बजट सत्र के दौरान उस वक्त भारी गहमागहमी देखने को मिली, जब प्रदेश की 'लाइफलाइन' कही जाने वाली राजस्थान रोडवेज (RSRTC) की बदहाली को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई।
राजस्थान विधानसभा में रोडवेज बसों का मुद्दा गरमा गया। कांग्रेस विधायक घनश्याम मेहर द्वारा रोडवेज की कार्यप्रणाली पर उठाए गए सवालों ने सदन का तापमान बढ़ा दिया। जवाब में परिवहन मंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने आंकड़ों के साथ पिछली कांग्रेस सरकार को कटघरे में खड़ा किया और दावा किया कि पहली बार रोडवेज अब मुनाफे की ओर बढ़ रही है।
विधायक घनश्याम मेहर ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों और महत्वपूर्ण रूट्स पर बसें चलाने में नाकाम रही है। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा:
परिवहन मंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने कांग्रेस विधायक के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि रोडवेज की जर्जर हालत के लिए कांग्रेस की पिछली सरकार जिम्मेदार है।
सदन में जब विधायक ने रोडवेज कर्मियों और प्राइवेट बस मालिकों की मिलीभगत की शिकायत की, तो मंत्री ने इसे गंभीरता से लिया। बैरवा ने आश्वासन दिया कि अगर कंडक्टर प्राइवेट बसों को फायदा पहुँचाने के लिए टिकट कम काट रहे हैं या जानबूझकर रोडवेज को देरी से चला रहे हैं, तो इसकी उच्च स्तरीय जांच कराई जाएगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।
परिवहन मंत्री ने स्पष्ट किया कि कुछ रूट्स पर बसें इसलिए बंद नहीं की गईं कि सरकार नहीं चाहती, बल्कि वहां यात्री भार की कमी थी। उन्होंने विधायक को भरोसा दिलाया कि नांदोती-गंगापुर मार्ग पर यात्रियों के दबाव को देखते हुए नई बसें लगाने पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।
विधानसभा में हुई इस बहस ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकार रोडवेज को 'पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप' (PPP) और नए टेंडर्स के माध्यम से पुनर्जीवित करने की कोशिश कर रही है। नई बसों की आवक और रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल से सरकार का लक्ष्य रोडवेज को घाटे से उबारकर आम आदमी के लिए सबसे सुरक्षित और सुलभ साधन बनाना है।