
भीलवाड़ा/जयपुर। राजस्थान और मध्यप्रदेश अब केवल पड़ोसी राज्य नहीं, बल्कि प्रगति के 'प्राकृतिक सहयोगी' बनकर उभर रहे हैं। गुरुवार को भीलवाड़ा में आयोजित “मध्यप्रदेश में निवेश के अवसर” इंटरैक्टिव सेशन के दौरान एमपी के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक ऐतिहासिक और भावनात्मक बयान दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि नदियों का मायका होने के नाते मध्यप्रदेश, राजस्थान की प्यास बुझाने के लिए अपने हिस्से का पानी देने को भी सहर्ष तैयार है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पार्वती-कालीसिंध-चंबल (PKC) परियोजना का उल्लेख करते हुए एक बेहद सकारात्मक रुख अपनाया। उन्होंने कहा:
भीलवाड़ा, जो भारत का 'मैन्चेस्टर' कहलाता है, वहां के 250 से अधिक औद्योगिक समूहों और निवेशकों ने इस सत्र में भाग लिया।
RTMA के चेयरमैन डॉ. एस.एन. मोदानी ने मध्यप्रदेश की पारदर्शी और त्वरित कार्यशैली की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि एमपी का मॉडल उद्योगों को एक प्रतिस्पर्धी वातावरण प्रदान करता है। कार्यक्रम के दौरान प्रमुख सचिव राघवेंद्र कुमार सिंह ने एक्सपोर्ट फ्रेट सब्सिडी और तकनीकी सपोर्ट जैसी नीतियों पर विस्तार से जानकारी दी।
इस कार्यक्रम में भीलवाड़ा सांसद दामोदर अग्रवाल, संगम ग्रुप के आर.पी. सोनी और नितिन स्पिनर्स के दिनेश नोलखा सहित कई दिग्गज शामिल हुए। उद्योगपतियों के साथ हुई 'वन-टू-वन' बैठकों में टेक्सटाइल, ऊर्जा और उर्वरक क्षेत्र के कई संभावित निवेश प्रस्तावों पर चर्चा हुई। यह संवाद सत्र दोनों राज्यों के बीच एक मजबूत आर्थिक सेतु का काम करेगा।
दशकों तक चंबल के पानी को लेकर दोनों राज्यों के बीच कानूनी और राजनीतिक खींचतान चलती रही है। लेकिन डॉ. मोहन यादव के इस बयान ने यह साफ कर दिया है कि वर्तमान में दोनों राज्यों की भाजपा सरकारें जनसेवा और विकास के लिए आपसी संवाद और सकारात्मकता को प्राथमिकता दे रही हैं।
Updated on:
27 Feb 2026 10:56 am
Published on:
27 Feb 2026 10:56 am
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