जयपुर

राजस्थान के छोटे जिलों ने किया बड़ा कमाल, जयपुर-जोधपुर क्यों पिछड़े?

एक ताज़ा रिपोर्ट के आंकड़े सभी को हैरान कर रहे हैं। इसमें छोटे ज़िलों ने जयपुर, जोधपुर और कोटा जैसे बड़े ज़िलों को भी पीछे छोड़ दिया है। 'टाइट सुपरविजन' और 'क्विक डिसीजन' की वजह से इन छोटे जिलों में बेहतर परिणाम देखने को मिले हैं।
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Feb 09, 2026
Rajasthan CM Bhajanlal Sharma
रिपोर्ट में राजस्थान के छोटे जिलों का प्रदर्शन बड़े शहरों से बेहतर रहा

राजस्थान जिला रिपोर्ट ने विकास की नई तस्वीर दिखाई

राजस्थान में सुशासन के दावों के बीच राजस्थान संपर्क पोर्टल के आंकड़ों ने एक नई बहस छेड़ दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, सीमित संसाधनों के बावजूद प्रदेश के छोटे जिले शिकायतों के निस्तारण में अधिक तत्पर और प्रभावी साबित हुए हैं।

सवाई माधोपुर ने इस सूची में शीर्ष स्थान हासिल किया है, जबकि राजधानी जयपुर सबसे अधिक लंबित शिकायतों के साथ दक्षता की दौड़ में पिछड़ गई है।

किन छोटे जिलों ने जयपुर-जोधपुर को पीछे छोड़ा?

23 मार्च से 31 दिसंबर 2025 के बीच दर्ज शिकायतों के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि सवाई माधोपुर प्रशासन ने 95.21% शिकायतों का समाधान किया है। जिले में कुल 88,605 शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें से 84,363 का सफलता पूर्वक निस्तारण कर दिया गया।

  • भरतपुर: 95.16% निस्तारण दर के साथ दूसरे स्थान पर रहा।
  • अलवर: 94.87% के साथ शानदार प्रदर्शन किया।
  • टोंक और भीलवाड़ा: इन जिलों ने भी 94.9% से अधिक की दर के साथ मजबूत मॉनिटरिंग और त्वरित सत्यापन (Faster Verification) का परिचय दिया।

'महानगर' क्यों रह गए पीछे? जयपुर-जोधपुर की चुनौती

आंकड़े बताते हैं कि भारी कार्यभार और अधिक जनसंख्या वाले बड़े जिलों में निस्तारण की दर कम रही है।

  • जयपुर: प्रदेश में सबसे अधिक शिकायतों के निस्तारण के बावजूद, प्रतिशत के मामले में जयपुर 93.56% पर ही सिमट गया। फिलहाल जयपुर में 18,536 शिकायतें लंबित हैं, जो राज्य में सर्वाधिक है।
  • जोधपुर: राजस्थान के दूसरे सबसे बड़े शहर जोधपुर की निस्तारण दर 93.91% रही।
  • कोटा और सीकर: ये जिले भी 94% के आसपास रहे, जो राज्य के शीर्ष प्रदर्शन करने वाले जिलों की तुलना में कम है।

मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास का विजन: किन पैमानों पर की गई जिलों की रैंकिंग?

राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने राजस्थान संपर्क पोर्टल को देश के लिए एक उदाहरण बताया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री स्वयं इस प्रणाली की निगरानी करते हैं। श्रीनिवास के अनुसार:

  • औसत निपटान समय: शिकायतों के निपटारे का औसत समय महज 14 दिन है।
  • संतुष्टि का स्तर: नागरिकों की संतुष्टि का स्तर 63% दर्ज किया गया है।
  • कार्यक्षमता: हर महीने औसतन 2.5 से 3 लाख शिकायतों का निस्तारण किया जा रहा है, जिसमें दैनिक निस्तारण दर 10,000 से अधिक है।

भविष्य की रणनीति: अब शहरों पर रहेगा 'फोकस'

मुख्य सचिव ने बताया कि प्रशासनिक सुधार विभाग (DAR) अब उन बड़े शहरी जिलों में विशेष हस्तक्षेप करेगा जहाँ शिकायतों की संख्या अधिक है। आगामी सुधारों में शामिल हैं:

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI): शिकायतों की बेहतर श्रेणीबद्धता (Categorization) के लिए तकनीक का उपयोग।
  • अधिकारी प्रशिक्षण: शिकायत निवारण अधिकारियों के लिए विशेष ट्रेनिंग प्रोग्राम।
  • इंटेलिजेंट डैशबोर्ड: शिकायतों के मूल कारणों (Root Causes) की पहचान करने के लिए उन्नत निगरानी प्रणाली।

विशेषज्ञ की राय: केवल संख्या नहीं, प्रतिशत है असली पैमाना

सरकारी विशेषज्ञों का मानना है कि केवल 'कुल संख्या' के आधार पर किसी जिले की कार्यक्षमता नहीं आंकी जा सकती। प्रतिशत आधारित निस्तारण दर यह बताती है कि कोई जिला नई शिकायतों के साथ कदम से कदम मिलाकर कितनी प्रभावी ढंग से काम कर रहा है। छोटे जिलों में 'टाइट सुपरविजन' और 'क्विक डिसीजन' की वजह से बेहतर परिणाम देखने को मिल रहे हैं।

Updated on:
09 Feb 2026 02:50 pm
Published on:
09 Feb 2026 01:24 pm