जयपुर

Rajasthan: शहरी सेवा शिविर के तहत सरकारी जमीन पर पट्टा लेने वालों के लिए बड़ी खबर, सरकार की जल्दबाजी से बढ़ेगा विवाद?

Shahri Seva Shivir: राजस्थान में शहरी सेवा शिविरों के तहत पट्टे वितरण की तैयारी को लेकर सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि खाली सरकारी जमीनों को अतिक्रमण और कब्जों से सुरक्षित किए बिना शिविर शुरू करना जल्दबाजी साबित हो सकता है।
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Updated: 15 Jun 2026, 8:05 AM IST
Rajasthan Shahri Seva Shivir
जयपुर में जयपुर में पृथ्वीराज नगर का एरिया (पत्रिका फोटो)

Rajasthan Shahri Seva Shivir: जयपुर: कॉलोनियों में खाली पड़े सरकारी भूखंडों और जमीनों को कब्जे में लेने की पुख्ता व्यवस्था से पहले ही शहरी सेवा शिविरों में राजस्थान सरकार सरकारी जमीनों पर बसी कॉलोनियों को रियायत के साथ पट्टे देने में जुट गई है। विकास प्राधिकरणों और निकायों के पास ऐसा कोई प्रभावी तंत्र नहीं है, जिससे शिविरों के दौरान ही खाली पड़ी सरकारी जमीनों को कब्जे में लिया जा सके। कब्जा लेने का प्रावधान सार्वजनिक होने से भूमाफियाओं के सक्रिय होने की आशंका बढ़ गई है।

क्या कहना है विशेषज्ञों का

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पहले सरकारी जमीनों को सुरक्षित कर कब्जे में लेने के बाद नियमन की प्रक्रिया शुरू होती तो सार्वजनिक सुविधाओं के लिए भूमि बचाई जा सकती थी। राजधानी जयपुर में पृथ्वीराज नगर इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। जहां ऐसे ही दावे किए गए, लेकिन एक इंच अतिरिक्त जमीन भी कब्जे में नहीं ली जा सकी। नतीजा ये हुआ कि आज कई जगह सार्वजनिक सुविधाओं के लिए जमीन तक उपलब्ध नहीं है।

ये सवाल जो मांगते जवाब

  • जब सरकारी जमीनों से कब्जे हटाने की ठोस योजना ही नहीं है, तो खाली भूखंड वापस कैसे लिए जाएंगे?
  • स्थानीय निकायों और विकास प्राधिकरणों के पास पर्याप्त तंत्र नहीं है, फिर आदेशों की पालना कौन और कैसे करेगा?
  • पहले सरकारी जमीनों की पहचान और कब्जामुक्ति क्यों नहीं की गई?
  • बिना जमीन का वास्तविक सत्यापन किए पट्टे देने से नए विवाद खड़े नहीं होंगे?
  • यदि किसी भूखंड पर कब्जा या विवाद है तो उसकी जिम्मेदारी कौन तय करेगा?
  • क्या बिना मजबूत अमल योजना के यह घोषणा केवल कागजों तक सीमित रह जाएगी?

सरकारी जमीनों के मामले में जानें यह आदेश

सरकारी भूमि पर 1 जनवरी, 2013 तक बसी कॉलोनियों का नियमन किया जाएगा। इन कॉलोनियों में मौजूद खाली भूखंड संबंधित नगरीय निकाय अपने कब्जे में लेकर उनकी नीलामी कर सकेंगे। नियमन शुल्क आवासीय आरक्षित दर या आवासीय डीएलसी दर, जो भी अधिक होगी, उसके 25 प्रतिशत के आधार पर वसूला जाएगा।

एक ही छत के नीचे मिल रहीं 10 विभागों की सेवाएं

  • शिविरों में पट्टे जारी करने
  • भवन निर्माण स्वीकृति
  • नामांतरण
  • जन्म-मृत्यु एवं विवाह पंजीयन
  • फायर एनओसी
  • ट्रेड लाइसेंस
  • सीवर कनेक्शन
  • ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र
  • मुख्यमंत्री निशुल्क बिजली योजना
  • पीएम कुसुम योजना (किसानों को सिंचाई पंप लगाने पर 60 से 90% तक की भारी सब्सिडी दी जाती है)
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15 Jun 2026, 8:05 AM IST
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