
Rajasthan Shahri Seva Shivir: जयपुर: कॉलोनियों में खाली पड़े सरकारी भूखंडों और जमीनों को कब्जे में लेने की पुख्ता व्यवस्था से पहले ही शहरी सेवा शिविरों में राजस्थान सरकार सरकारी जमीनों पर बसी कॉलोनियों को रियायत के साथ पट्टे देने में जुट गई है। विकास प्राधिकरणों और निकायों के पास ऐसा कोई प्रभावी तंत्र नहीं है, जिससे शिविरों के दौरान ही खाली पड़ी सरकारी जमीनों को कब्जे में लिया जा सके। कब्जा लेने का प्रावधान सार्वजनिक होने से भूमाफियाओं के सक्रिय होने की आशंका बढ़ गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पहले सरकारी जमीनों को सुरक्षित कर कब्जे में लेने के बाद नियमन की प्रक्रिया शुरू होती तो सार्वजनिक सुविधाओं के लिए भूमि बचाई जा सकती थी। राजधानी जयपुर में पृथ्वीराज नगर इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। जहां ऐसे ही दावे किए गए, लेकिन एक इंच अतिरिक्त जमीन भी कब्जे में नहीं ली जा सकी। नतीजा य हुआ कि आज कई जगह सार्वजनिक सुविधाओं के लिए जमीन तक उपलब्ध नहीं है।
सरकारी भूमि पर 1 जनवरी, 2013 तक बसी कॉलोनियों का नियमन किया जाएगा। इन कॉलोनियों में मौजूद खाली भूखंड संबंधित नगरीय निकाय अपने कब्जे में लेकर उनकी नीलामी कर सकेंगे। नियमन शुल्क आवासीय आरक्षित दर या आवासीय डीएलसी दर, जो भी अधिक होगी, उसके 25 प्रतिशत के आधार पर वसूला जाएगा।