Ramjal Setu Link Project: रामजल सेतु लिंक परियोजना को केंद्र से वित्तीय स्वीकृति दिलाने की दिशा में प्रक्रिया तेज हो गई है। परियोजना की अनुमानित लागत करीब 89 हजार करोड़ रुपए है। राज्य सरकार इस परियोजना के लिए केंद्र से 90 प्रतिशत फंडिंग की मांग कर रही है।
जयपुर। राजस्थान की महत्वाकांक्षी रामजल सेतु लिंक परियोजना को केंद्र से वित्तीय स्वीकृति दिलाने की दिशा में प्रक्रिया तेज हो गई है। केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय ने परियोजना को लेकर पीआईबी (पब्लिक इन्वेस्टमेंट बोर्ड) नोट तैयार कर लिया है। सूत्रों के अनुसार यह पीआइबी नोट संभवतया केंद्र सरकार की अगली कैबिनेट बैठक में रखा जा सकता है। परियोजना की अनुमानित लागत करीब 89 हजार करोड़ रुपए है। भजनलाल सरकार इस परियोजना के लिए केंद्र से 90 प्रतिशत फंडिंग की मांग कर रही है।
राजस्थान की राम जल सेतु लिंक परियोजना (संशोधित पीकेसी ईआरसीपी) को मध्यप्रदेश-यूपी की केन बेतवा लिंक परियोजना की तर्ज पर फंडिंग मिलेगी। इसी आधार पर 90 प्रतिशत राशि केन्द्र सरकार स्तर पर वहन करने की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा। बता दें कि इस परियोजना से राजस्थान के 17 जिलों में पेयजल, सिंचाई व उद्योगों के लिए पानी मिलेगा।
राजस्थान की राम जल सेतु लिंक परियोजना (संशोधित पीकेसी ईआरसीपी) को मध्यप्रदेश-यूपी की केन बेतवा लिंक परियोजना की तर्ज पर फंडिंग मिलेगी। इसी आधार पर 90 प्रतिशत राशि केन्द्र सरकार स्तर पर वहन करने की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा।
नदी जोड़ो अभियान (इंटरलिकिंग) से जोड़ा गया है। केन-बेतवा में दो राज्य मध्यप्रदेश व उत्तरप्रदेश जुड़े हैं। इसी तरह राम जल सेतु लिंक परियोजना में राजस्थान और मध्यप्रदेश शामिल हैं। पानी का ट्रांसफर सिस्टम लगभग एक समान है। इसमें पेयजल, सिंचाई और औद्योगिक इकाईयों को सप्लाई किया जाएगा।
राम जल सेतु लिंक परियोजना का काम तीन चरणों में पूरा होगा। प्रोजेक्ट के पहले चरण में 17 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। नवनेरा बैराज व ईसरदा बांध का निर्माण पूरा हो गया है। चंबल नदी पर चंबल एक्वाडक्ट का निर्माण करवाया जा रहा है। पहले फेज में 10 हजार करोड़ के वर्क ऑर्डर पूर्व सरकार के समय दिए गए थे। दूसरे फेज में 16 हजार करोड़ का बजट रखा गया है। केंद्र से फंडिंग मिलने के बाद जल सेतु लिंक परियोजना का काम तेजी से रफ्तार पकड़ेगा।
रामजल सेतु लिंक परियोजना से राजस्थान के 17 जिलों में सिंचाई और पेयजल के लिए भरपूर पानी मिलेगा। इनमें जयपुर, कोटा, बूंदी, झालावाड़, बारां, सवाई माधोपुर, दौसा, करौली, धौलपुर, भरतपुर, डीग, अलवर, खेरथल-तिजारा, कोटपूतली-बहरोड़, अजमेर, भीलवाड़ा और टोंक जिले शामिल है।