Rajasthan Top 5 Women Sarpanch Success Story: ये कहानियां बताती हैं कि जब आधी आबादी नेतृत्व संभालती है, तो बदलाव कितना गहरा होता है।
National Panchayati Raj Day: राजस्थान की धरा पर आज पंचायतों की कमान सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं है। यहां की महिला सरपंचों ने घूंघट की मर्यादा और घर की चौखट को पार कर ग्रामीण विकास के नए मानक स्थापित किए हैं। आज राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस पर बात राजस्थान की उन पांच महिला सरपंच की जिन्होंने खेल के मैदान से लेकर डिजिटल साक्षरता और 102 वर्ष की उम्र में भी जनसेवा का ऐसा जज्बा दिखाया कि राष्ट्रीय स्तर पर पहचान हासिल की। ये कहानियां बताती हैं कि जब आधी आबादी नेतृत्व संभालती है, तो बदलाव कितना गहरा होता है।
झुंझुनू जिले की लांबी अहीर पंचायत की सरपंच नीरू यादव आज देशभर में 'हॉकी वाली सरपंच' के नाम से मशहूर हैं। हरियाणा से एमएससी (गणित) करने के बाद बहू बनकर राजस्थान आईं नीरू ने खेल को सशक्तिकरण का जरिया बनाया। उन्होंने अपनी सैलरी से गांव की बेटियों के लिए हॉकी किट खरीदी और कोच का इंतजाम किया। आज उनके गांव की बेटियां न केवल मैदान में अपने खेल का लोहा मनवा रही हैं, बल्कि कौशल विकास के जरिए मल्टीनेशनल कंपनियों में नौकरी भी पा रही हैं।
राजस्थान की पहली एमबीए सरपंच छवि राजावत महिला नेतृत्व का सबसे आधुनिक चेहरा हैं। टोंक जिले के सोडा गांव की इस बेटी ने एयरटेल और टाइम्स ऑफ इंडिया जैसी बड़ी कंपनियों का शानदार करियर छोड़कर सरपंच की कुर्सी संभाली। छवि ने बिना किसी राजनीतिक दल से जुड़े गांव में रेन वाटर हार्वेस्टिंग और घर-घर शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं पर काम किया। वे मानती हैं कि उनकी प्रोफेशनल डिग्री गांव की समस्याओं को बेहतर ढंग से सुलझाने में मददगार साबित हुई।
उम्र सिर्फ एक संख्या है, इसे साबित किया है नीमकाथाना जिले की पुरानाबास पंचायत की सरपंच विद्या देवी ने। 102 साल की उम्र में भी विद्या देवी रोज पंचायत के कामों की मॉनिटरिंग के लिए फील्ड में निकलती हैं। कोरोनाकाल में अपने खर्च पर घर-घर राशन बांटने वाली विद्या देवी आज भी गांव की सड़कों और बिजली-पानी की व्यवस्था के लिए खुद मौके पर जाकर निरीक्षण करती हैं। उनका जज्बा युवाओं के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं है।
चूरू जिले की गोपालपुरा ग्राम पंचायत की सरपंच सविता राठी ने पंचायत राज को एक 'मास्टर प्लान' के जरिए चलाया है। उन्हें दिल्ली के विज्ञान भवन में 'सशक्त पंचायत-नेत्री' के रूप में सम्मानित किया गया। उनकी पंचायत के विकास कार्यों पर बनी एक लघु फिल्म 1500 जनप्रतिनिधियों को दिखाई गई। उन्होंने सामुदायिक सहभागिता के जरिए गांव की तस्वीर बदली और नवाचारों को धरातल पर उतारा।
बारां जिले की बमोरीघाटा पंचायत की सरपंच प्रियंका नागर ने शिक्षा को नई दिशा दी है। उन्होंने सरकारी स्कूलों के बच्चों को न केवल किताबों तक सीमित रखा, बल्कि उन्हें शैक्षणिक भ्रमण के जरिए दिल्ली में संसद भवन और राष्ट्रपति भवन की सैर कराई। वे स्थानीय युवाओं की समस्याओं के लिए मंत्रियों से सीधे संवाद करती हैं और ग्रामीण शिक्षा में तकनीक के समावेश पर जोर दे रही हैं।