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जयपुर में आतंकी उमर हारिस: सड़वा की खामोशी में छिपे ‘खरगोश’ के राज, पड़ोसी को पड़ोसियों की खबर नहीं

जयसिंहपुरा खोर के सड़वा इलाके में एक युवक करीब एक साल तक गुमनाम रहा। बाद में उसकी पहचान लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी उमर हारिस उर्फ ‘खरगोश’ के रूप में हुई। बिना पुलिस वेरिफिकेशन रहकर उसने फर्जी किरायानामा बनवाया और पासपोर्ट हासिल कर फरार हो गया।

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जयपुर

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Arvind Rao

Apr 24, 2026

Jaipur Secrets of Terror Suspect Umar Haris Hidden in Sadwa Where Neighbors Know Nothing About Each Other

लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी उमर हारिस उर्फ ‘खरगोश’ (पत्रिका फोटो)

जयसिंहपुरा खोर (जयपुर): राजधानी के उत्तरपूर्व में बसे जयसिंहपुरा खोर का सड़वा इलाका इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। लेकिन हजारों की आबादी वाला यह घना क्षेत्र अजीब सी खामोशी ओढ़े रहता है, जिसमें अजनबीयत का बोलबाला है।

बता दें कि यहां लोग एक-दूसरे से लगभग कटे हुए से, अजनबी से रहते हैं। पड़ोसी को पड़ोसी की कोई जानकारी नहीं होती। सड़वा की इसी अजनबीयत ने एक संदिग्ध युवक को पूरे एक साल तक गुमनाम रहकर रहने का मौका दे दिया।

स्थानीय लोगों के अनुसार, सड़वा इलाके में बड़ी संख्या में किराएदार रहते हैं। रोजाना लोगों का आना-जाना लगा रहता है, जिससे किसी नए चेहरे पर ज्यादा ध्यान नहीं जाता।

इसी भीड़ में एक युवक, जिसे बाद में पाकिस्तान के प्रतिबंधित संगठन लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी उमर हारिस उर्फ ‘खरगोश’ के नाम से पहचाना गया, वह करीब एक साल तक चुपचाप रहा।

उसने न तो किसी से ज्यादा बातचीत की और न ही इलाके में अपनी पहचान बनने दी। स्थानीय लोगों का कहना है कि वह अक्सर देर तक लैपटॉप पर काम करता रहता था। लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि उसकी गतिविधियां इतनी गंभीर हो सकती हैं।

अधिकतर मजदूर बरेली के रहने वाले

सड़वा और आसपास के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश के बरेली जिले से बड़ी संख्या में मजदूर मिल जाते हैं, जो चुनाई और बेलदारी का काम करते हैं। बरेली से आए मजदूर एक कमरे को तीन-तीन लोग मिलकर किराए पर लेते हैं।

इससे उन पर किराए का बोझ कम रहता है। वहीं, मकान मालिक को एक ही कमरे से ज्यादा पैसे मिल जाते हैं, जिससे वह भी खुश रहता है।

खुद के ही मकान का प्लॉट नंबर पता नहीं

पत्रिका संवाददाता ने वहां कई लोगों से बात की। हैरानी की बात यह थी कि लोगों को अपने पड़ोसी के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। कई लोग ऐसे भी मिले जिन्हें खुद का प्लॉट नंबर तक ध्यान नहीं था।

घरों के बाहर नंबर न होने से किसी नए व्यक्ति को प्लॉट तलाशने में मुश्किल होती है। स्थानीय लोगों की मानें तो प्लॉट भी बेसिर-पैर के कटे हुए हैं।

स्थानीय स्तर पर सतर्कता की कमी

सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस घटना ने इलाके की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इतनी बड़ी आबादी के बीच अगर कोई व्यक्ति एक साल तक बिना पहचान के रह सकता है, तो यह स्थानीय स्तर पर सतर्कता की कमी को दर्शाता है।

पुलिस और खुफिया एजेंसियां अब इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही हैं और यह जानने की कोशिश कर रही हैं कि आखिर युवक का असली मकसद क्या था और उसने यहां रहकर क्या-क्या गतिविधियां कीं।

पुलिस वेरिफिकेशन तक नहीं

सड़वा स्थित राशिद विहार कॉलोनी में बड़ी संख्या में बाहरी लोग बिना पुलिस सत्यापन के रह रहे हैं। यह इलाका जयसिंहपुरा खोर थाना क्षेत्र में आता है, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि न तो किरायेदारों का वेरिफिकेशन किया गया है और न ही संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी है।

एक-एक कमरे में तीन से चार लोग रह रहे हैं, जिससे सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं। उल्लेखनीय है कि आतंकी उमर हारिस उर्फ ‘खरगोश’ इसी कॉलोनी में एक साल तक रहा और फर्जी किरायानामा बनाकर पासपोर्ट हासिल कर फरार हो गया।