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जयपुर में इलेक्ट्रिशियन बनकर रहता था आतंकी, फर्जी पासपोर्ट से इंडोनेशिया-सऊदी तक पहुंचा ‘खरगोश’, हुए चौंकाने वाले खुलासे

Lashkar-e-Taiba Terrorist 'Khargosh': जयपुर में एक साल तक गुमनाम रहकर आतंकी उमर हारिस उर्फ ‘खरगोश’ ने फर्जी पहचान के सहारे बड़ा नेटवर्क खड़ा कर लिया। इलेक्ट्रिशियन बनकर रह रहे इस शख्स ने फर्जी किराएनामे से पासपोर्ट बनवाया और इंडोनेशिया व सऊदी अरब तक पहुंच गया।

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जयपुर

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Akshita Deora

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ललित तिवारी

Apr 23, 2026

Lashkar-e-Taiba Kharghosh

सड़वा मोड़ स्थित वह मकान जिसके आतंकी ने बनाया छिपने का ठिकाना और लश्कर आतंकी उमर हारिस उर्फ खरगोश की फोटो: पत्रिका

Rajasthan Patrika Investigation: लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा आतंकी उमर हारिस उर्फ ‘खरगोश’ ने जयसिंहपुरा खोर थाना इलाके के सड़वा मोड़ स्थित राशिद विहार कॉलोनी के एक छोटे कमरे में को अपना ठिकाना बनाया था। वह यहां 1500 रुपए महीने किराए के कमरे में रहा। पड़ताल में सामने आया कि यहां एक साल रहकर उसने 8 साल के फर्जी किरायेनामे से वह पासपोर्ट बनाने में कामयाब हो गया और फिर इंडोनेशिया, सऊदी अरब तक पहुंच गया।

राजस्थान पत्रिका टीम ने बुधवार को इलाके का दौरा किया। पुलिस कार्रवाई के बाद कॉलोनी में सन्नाटे और दहशत का माहौल है। उमर के संबंध में स्थानीय लोगों ने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। जब ज्यादा कुरेदा तो नाम न छापने की शर्त पर कुछ लोगों ने बताया कि उमर बेहद कम बाहर निकलता था और किसी से ज्यादा बातचीत नहीं करता था। कई लोगों को उसने अपना नाम ‘अमजद’ बताया था, जबकि कुछ को खुद को इलेक्ट्रिशियन बताता था।

16 घंटे लैपटॉप पर, बाकी समय खामोशी

स्थानीय लोगों के अनुसार उमर हमेशा कमरा बंद रखता था। उसकी दिनचर्या सीमित थी, केवल नमाज पढ़ने पास की मस्जिद तक जाता और तुरंत लौट आता था। वह करीब 16 घंटे से अधिक लैपटॉप पर बिताता था। उसकी चुप्पी और दूरी ने उसे एक साल तक गुमनाम बनाए रखा।

फर्जी किरायानमा नोटेरी से प्रमाणित

करीब एक साल इलाके में रहने के बाद उसने 8 साल का फर्जी किरायानामा तैयार कराया और उसे नोटरी से प्रमाणित भी करा लिया। इसी दस्तावेज के आधार पर उसने ‘सज्जाद’ नाम से पासपोर्ट के लिए आवेदन किया। चौंकाने वाली बात यह रही कि स्थानीय थाने से पुलिस वेरिफिकेशन भी हो गया। लंबे समय तक एक ही जगह रहने के कारण पुलिस ने दूसरी जगहों के बारे में ज्यादा पड़ताल नहीं की, जिसका फायदा आतंकी ने उठाया। ई-मित्र सेवाओं के जरिए दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी करना उसके लिए और आसान हो गया। जांच एजेंसियों का मानना है कि दस्तावेजी प्रक्रिया में खामियों का फायदा उठाकर उसने फर्जी पहचान को वैध रूप दे दिया।

सुनसान इलाके को चुना ठिकाना

सड़वा मोड़ और राशिद विहार कॉलोनी अपेक्षाकृत सुनसान और कम आवाजाही वाला इलाका है। यही वजह रही कि वह लंबे समय तक बिना शक के यहां रह सका। वह जिस मकान में रहता था वह पांच भाइयों (सद्दाम, आमिर हसन, जामिर, राहुल और अफरीदी) का है। पड़ोसियों के मुताबिक उसने दाढ़ी बढ़ा रखी थी और हमेशा शांत रहता था। वह कभी किसी सामाजिक गतिविधि में शामिल नहीं होता था।

जम्मू पुलिस के इनपुट से खुलासा

पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब जम्मू-कश्मीर पुलिस को आतंकी के बारे में अहम इनपुट मिला। इसके बाद राजस्थान एटीएस की मदद से कार्रवाई की गई। एटीएस के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक दिनेश एम.एन. के अनुसार, चार संदिग्धों को पकड़कर जम्मू-कश्मीर पुलिस को सौंपा गया है। इनमें मकान मालिक आमिर हसन भी शामिल है, जिससे पूछताछ जारी है।