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AI से बना वसुंधरा राजे के नाम फर्जी लेटर, 1 महिला समेत 4 आरोपी गिरफ्तार, जयपुर में पूछताछ जारी

Vasundhara Raje: राजस्थान की सियासत में हलचल मचाने वाले फर्जी AI लेटर-वीडियो मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पूर्व सीएम वसुंधरा राजे के नाम से बनाए गए कंटेंट केस में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
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जयपुर

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Arvind Rao

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Updated: 23 Apr 2026, 5:11 PM IST

Vasundhara Raje - File PIC

Vasundhara Raje - File PIC

Vasundhara Raje Fake Letter Case: आज के डिजिटल युग में तकनीक जहां वरदान साबित हो रही है। वहीं, इसका दुरुपयोग समाज और राजनीति के लिए एक गंभीर चुनौती बन गया है। राजस्थान की राजनीति में हाल ही में उस समय हड़कंप मच गया, जब पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के नाम से एक फर्जी पत्र और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा निर्मित एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया।

मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चार मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। जयपुर की ज्योति नगर थाना पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर दो राज्यों में छापेमारी की। डीसीपी साउथ राजश्री राज के अनुसार, मध्यप्रदेश (भोपाल) से निखिल, बिलाल खान और इनाम अहमद को हिरासत में लिया गया। वहीं, पंजाब (मोहाली) से चौथी आरोपी अमृता धुमाल को गिरफ्तार किया गया।

इन चारों आरोपियों को बुधवार को जयपुर लाया गया। जहां पुलिस उनसे इस पूरे षड्यंत्र के बारे में कड़ाई से पूछताछ कर रही है। पुलिस जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। आरोपियों ने केवल फर्जी लेटर ही नहीं बनाया, बल्कि AI तकनीक का सहारा लेकर एक ऐसा वीडियो तैयार किया जो देखने में पूरी तरह असली लगे।

आरोपियों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के नाम एक पत्र लिखा, जिसमें वसुंधरा राजे के नाम का दुरुपयोग किया गया था। इस पत्र की बातों को पुख्ता दिखाने के लिए AI की मदद से एक डिजिटल वीडियो बनाया गया और उसे तेजी से सोशल मीडिया पर फैलाया गया। जयपुर पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल के निर्देश पर गठित टीम अब यह पता लगा रही है कि इस सामग्री को तैयार करने के लिए किन सॉफ्टवेयर और टूल्स का इस्तेमाल किया गया था।

क्या यह किसी बड़े नेटवर्क की साजिश है?

पुलिस को अंदेशा है कि यह महज चार लोगों की निजी शरारत नहीं है, जिस तरह से कंटेंट को सुनियोजित ढंग से तैयार किया गया और एक साथ कई प्लेटफॉर्म्स पर वायरल किया गया, वह एक संगठित नेटवर्क की ओर इशारा करता है।

पुलिस अब आरोपियों की रिमांड लेकर यह जानने की कोशिश करेगी कि इस खेल के पीछे असली मास्टरमाइंड कौन है और इसका उद्देश्य क्या केवल छवि खराब करना था या चुनाव को प्रभावित करना।

सियासी घमासान और गिरफ्तारी पर सवाल

मामले ने अब राजनीतिक मोड़ ले लिया है। मध्यप्रदेश में हुई गिरफ्तारियों के बाद कांग्रेस ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। कांग्रेस नेता हरीश चौधरी और सांसद विवेक तन्खा ने सोशल मीडिया पर इस कार्रवाई को 'लोकतंत्र के खिलाफ' बताया है। उनका कहना है कि आईटी सेल के कार्यकर्ताओं को बिना किसी ठोस सबूत के परेशान किया जा रहा है और यह आवाज दबाने की कोशिश है।

यह घटना इस बात का बड़ा उदाहरण है कि Deepfake और AI तकनीक का इस्तेमाल कर किसी भी दिग्गज नेता की पहचान को खतरे में डाला जा सकता है। पुलिस के लिए चुनौती केवल आरोपियों को पकड़ना नहीं है, बल्कि उस 'डिजिटल ट्रेल' को खत्म करना भी है जिसके जरिए समाज में भ्रम फैलाया जा रहा है।

जयपुर पुलिस की यह कार्रवाई उन लोगों के लिए एक सख्त संदेश है, जो तकनीक का इस्तेमाल अफवाहें फैलाने और सार्वजनिक हस्तियों की छवि बिगाड़ने के लिए करते हैं। फिलहाल, साइबर एक्सपर्ट्स की टीम आरोपियों के मोबाइल और लैपटॉप की जांच कर रही है, ताकि आने वाले दिनों में इस मामले की पूरी परतें खुल सकें।