
पत्रिका फाइल फोटो
Jaipur Security Lapse: बम विस्फोटों का दंश झेल चुके जयपुर शहर में एक बार फिर आंतरिक सुरक्षा पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। स्थानीय इंटेलिजेंस और बीट पुलिस प्रणाली, जो सुरक्षा चक्र की पहली कड़ी मानी जाती है, संवेदनशील इलाकों में संदिग्धों की पहचान करने में नाकाम साबित हो रही है।
ताजा मामला लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी उमर हारिस उर्फ 'खरगोश' का है, जिसने न केवल जयपुर में ठिकाना बनाया, बल्कि फर्जी दस्तावेज के आधार पर यहां से फरार होने में भी कामयाब रहा।
चौंकाने वाला तथ्य यह है कि जयपुर में केवल पाकिस्तानी आतंकी मॉड्यूल ही सक्रिय नहीं हैं, बल्कि बांग्लादेशी नागरिकों ने भी यहां गहरी पैठ बना ली है। संदिग्धों ने स्थानीय स्तर पर फर्जी आधार कार्ड बनवाकर न केवल पहचान स्थापित की, बल्कि जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) से मकान तक आवंटित करवा लिए। इसके बावजूद पुलिस के पास शहर में रह रहे संदिग्धों का कोई स्पष्ट डेटाबेस मौजूद नहीं है।
जयपुर में आतंकी साजिशों का इतिहास रहा है, लेकिन विडंबना यह है कि अधिकांश खुलासे स्थानीय पुलिस के बजाय केंद्रीय एजेंसियों या दूसरे राज्यों की पुलिस ने किए हैं। बीट कांस्टेबल प्रणाली और मुखबिर नेटवर्क की कमजोरी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बनती जा रही है।
Updated on:
22 Apr 2026, 6:57 AM IST
Published on:
22 Apr 2026, 6:57 AM IST
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