
जयपुर। राजस्थान में टाउनशिप पॉलिसी के नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी है। सरकार ने एकल पट्टा जारी करने के लिए जमीन की न्यूनतम सीमा 750 वर्गमीटर से घटाकर 500 वर्गमीटर करने के प्रस्ताव को आखिर अंतिम रूप दे दिया है। इससे 500 से 749 वर्गमीटर तक की कृषि भूमि वाले भू-स्वामियों के लिए भी एकल पट्टा लेने का रास्ता खुल जाएगा। इसके साथ ही जमीन के सब-डिवीजन (उपविभाजन) के नियमों में भी बदलाव का प्रस्ताव है।
अभी एक भूखंड के सब-डिवीजन के बाद अधिकतम चार भूखंड ही सृजित किए जा सकते हैं। अब इस सीमा को बढ़ाने का प्रस्ताव है। हालांकि, सब-डिवीजन के बाद बनने वाला प्रत्येक भूखंड कम से कम 500 वर्गमीटर का होना अनिवार्य होगा। यानी बड़ी जमीन को पहले की तुलना में अधिक हिस्सों में बांटकर ज्यादा भूखंड सृजित किए जा सकेंगे। वहीं, एचटी लाइन के नीचे निर्धारित 12 मीटर की दूरी को घटाकर 9 मीटर करना प्रस्तावित है। इसके अलावा कई अन्य प्रावधानों को स्पष्ट भी किया जा रहा है। नगरीय विकास विभाग की मंजूरी के बाद यह बदलाव लागू होंगे।
प्रस्तावः कृषि भूमि पर एकल पट्टा जारी करने के लिए न्यूनतम क्षेत्रफल 750 वर्गमीटर से घटाकर 500 वर्गमीटर करने का प्रस्ताव।
असरः पारिवारिक बंटवारे के बाद कम जमीन वाले भू-स्वामियों को भी पट्टा मिल सकेगा। इससे जमीन से जुड़े बैंकिंग व अन्य वित्तीय लेन-देन में सुविधा मिल सकती है।
चुनौतीः छोटे भू-खंडों पर निर्माण और आवासीय इकाइयों की संख्या बढ़ने से पानी, बिजली, सीवरेज और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं पर दबाव बढ़ सकता है।
प्रस्तावः भू-खंड के सब-डिवीजन में अधिकतम चार भू-खंड की मौजूदा सीमा को बढ़ाने का प्रस्ताव है।
असरः बड़े भू-खंडों को अधिक हिस्सों में बांटकर उनका उपयोग बढ़ सकेगा। इससे छोटे क्षेत्रफल के प्लॉट उपलब्ध होंगे, जिसकी नरूरत बिल्डर-डवलपर्स भी जताते रहे हैं।
चुनौतीः एक ही क्षेत्र में अधिक भू-खंड और निर्माण होने से उस एरिया में आबादी बढ़ेगी। इससे सीमित सुविधाओं का बंटवारा होगा। यातायात, पार्किंग, सीवरेज और अन्य स्थानीय सुविधाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका।
प्रस्तावः एचटी लाइन के नीचे निर्धारित 12 मीटर के क्षेत्र को घटाकर 9 मीटर करना।
असरः प्रभावित क्षेत्रों में जमीन के उपयोग और आवागमन के लिए अतिरिक्त जगह उपलब्ध हो सकती है। मौजूदा प्रावधानों के कारण प्रभावित हो रहे निर्माण टूटने का खतरा कुछ कम होना संभावित।
चुनौतीः बिजली लाइन से दूरी घटाने पर हाई-वोल्टेज लाइनों के आसपास सुरक्षा संबंधी जोखिम बना रहेगा। इसलिए विद्युत सुरक्षा मानकों की पूरी पालना सुनिश्चित करना जरूरी होगा।
जानकारों का कहना है कि टाउनशिप पॉलिसी में प्रस्तावित बदलाव से छोटे भू-स्वामियों और रियल एस्टेट क्षेत्र को राहत मिल सकती है। 500 वर्गमीटर में एकल पट्टा और सब-डिवीजन की सीमा बढ़ने से जमीन का अधिक व्यवस्थित उपयोग संभव होगा तथा छोटे प्लॉट की उपलब्धता बढ़ेगी। हालांकि, इसका सीधा असर शहरी बुनियादी ढांचे पर पड़ेगा।