
राजस्थान में हरित क्षेत्र को बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा देने के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई कैबिनेट और मंत्रिपरिषद की बैठक में एक दूरगामी निर्णय लिया गया है। राज्य सरकार ने प्रदेश में अधिसूचित वन क्षेत्रों से बाहर भी हरियाली का दायरा बढ़ाने के उद्देश्य से 'ट्री आउटसाइड फॉरेस्ट पॉलिसी' (Tree Outside Forest Policy) को लागू करने की आधिकारिक स्वीकृति दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देशव्यापी 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान से प्रेरित होकर शुरू किए गए 'मिशन हरियालो राजस्थान' को गति देने के लिए यह नीति तैयार की गई है। सरकार का मानना है कि इस नीति से न केवल राजस्थान की रेगिस्तानी और बंजर भूमि पर हरियाली फैलेगी, बल्कि किसानों और ग्रामीण युवाओं को रोजगार तथा स्वरोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे।
कैबिनेट फैसलों की जानकारी देते हुए संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने बताया कि 'मिशन हरियालो राजस्थान' के तहत आगामी पांच वर्षों में राज्य में कुल 50 करोड़ पौधे लगाने का विशाल लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि सरकार ने पिछले लगभग दो वर्षों के कार्यकाल में ही करीब 20 करोड़ पौधे लगाकर एक नया रिकॉर्ड बनाया है। वर्तमान मानसून सत्र के दौरान ही पूरे प्रदेश में 10 करोड़ पौधे रोपने का लक्ष्य निर्धारित कर तेजी से काम किया जा रहा है।
नई 'ट्री आउटसाइड फॉरेस्ट पॉलिसी' का मुख्य ध्यान उन जमीनों पर रहेगा जो सरकारी रिकॉर्ड में अधिसूचित वन क्षेत्र (Notified Forest Areas) के अंतर्गत नहीं आती हैं। इस नीति के तहत:
खेतों और बंजर भूमि पर वृक्षारोपण: किसानों की सिंचित कृषि भूमि की मेढ़ों, बंजर और खाली पड़ी निजी व सार्वजनिक जमीनों पर पेड़ लगाने को बढ़ावा दिया जाएगा।
सड़क और रेलवे कॉरिडोर: राज्य के प्रमुख राजमार्गों, संपर्क सड़कों और रेलवे लाइनों के दोनों ओर हरित पट्टी विकसित की जाएगी।
पर्यावरण को फायदा: इस पहल से जैव विविधता संरक्षण, भूजल संरक्षण और मिट्टी के कटाव को रोकने में मदद मिलेगी, जो 'राजस्थान वन नीति 2023' के लक्ष्यों को हासिल करने में सहायक होगी।
यह नीति केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। कृषि वानिकी और गैर-इमारती लकड़ी उत्पाद को बढ़ावा मिलने से स्थानीय बाजारों में नई संभावनाएं बनेंगी।
साथ ही, बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण से कार्बन सेक्वस्ट्रेशन (कार्बन सोखने की क्षमता) बढ़ेगा, जिससे क्लाइमेट चेंज के प्रभावों को कम करने में राजस्थान अग्रणी भूमिका निभाएगा। इस नीति से ग्रामीण इलाकों में स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार और नए स्टार्टअप्स के लिए बड़ा बाजार तैयार होगा।