जयपुर

राजस्थान में दो IAS पर गिरी गाज, सैलरी से होगी वसूली, एक पर FIR के आदेश

राजस्थान में दो IAS के खिलाफ लेबर कोर्ट ने बड़ा और कड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने दोनों IAS की सैलरी से कंडक्टर को भुगतान करने का आदेश दिया है। वहीं एक आइएएस के खिलाफ FIR दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कोर्ट ने कहा कि बिना भुगतान ओवरटाइम कराना 'बेगार' और 'बंधुआ श्रम' के समान है।
2 min read
Aug 20, 2026
rajasthan ias case
Rajasthan: IAS संदीप वर्मा (गुलाबी शर्ट) और पुरुषोत्तम शर्मा (व्हाइट शर्ट) फोटो-पत्रिका

जयपुर। श्रम न्यायालय (लेबर कोर्ट) ने राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम (RSRTC) कंडक्टर को लंबे समय से ओवरटाइम का भुगतान नहीं मिलने को बेगार माना है। न्यायालय ने कहा कि बकाया राशि का भुगतान होने तक अतिरिक्त मुख्य सचिव संदीप वर्मा के वेतन से बकाया राशि की वसूली की जाए। वहीं आरएसआरटीसी के तत्कालीन प्रबंध निदेशक पुरूषोत्तम शर्मा के वेतन से बकाया राशि पर दिए जाने वाले ब्याज की कटौती की जाए।

कोर्ट ने इस राशि की वसूली होने तक दोनों अधिकारियों का वेतन रोकने को कहा। वहीं वर्मा के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराने, अनुशासनात्मक कार्रवाई करने और हाईकोर्ट को अवमानना कार्यवाही के लिए रेफरेंस भेजने के भी निर्देश दिए हैं। इस मामले को लेकर एक सितम्बर को पालना रिपोर्ट मांगी गई है।

कोर्ट ने माना 'बंधुआ श्रम'

पीठासीन अधिकारी दिनेश कुमार गुप्ता ने आरएसआरटीसी परिचालक सीताराम के ओवरटाइम का लंबे समय से भुगतान नहीं होने पर सख्ती दिखाते हुए यह आदेश दिया। न्यायालय ने वर्मा के खिलाफ कार्रवाई के लिए आदेश की प्रति केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग को भिजवाई है। न्यायालय ने इस मामले में कड़ी टिप्पणी की है कि किसी श्रमिक से निर्धारित मजदूरी का भुगतान किए बिना ओवरटाइम लेना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 23 के तहत 'बेगार' और 'बंधुआ श्रम' के समान है।

क्या है पूरा मामला?

परिचालक सीताराम ने वर्ष 1996 से 2013 के बीच साप्ताहिक अवकाश के दिनों में किए गए 124 दिनों के कार्य के एवज में दोगुना ओवरटाइम भुगतान की मांग की। न्यायालय ने पूर्व में बकाया, ब्याज व वाद व्यय सहित 1,09,740 रुपए की राशि तय की, जिसमें से आरएसआरटीसी ने परिचालक को 13,076 रुपए का ही भुगतान किया। इस पर न्यायालय ने जयपुर कलक्टर को शेष राशि, ब्याज व हर्जाना राशि आरएसआरटीसी से भू-राजस्व बकाया की तर्ज पर वसूल करने का निर्देश दिया।

आइएएस अधिकारियों का रोका वेतन

कोर्ट ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि बकाया राशि की कौशल, नियोजन एवं उद्यमिता विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव संदीप वर्मा के वेतन से सीधे कटौती की जाए, जिस पर 12 फीसदी वार्षिक ब्याज वसूल किया जाए। राशि वसूल होने तक वर्मा का वेतन रोकने के भी आदेश दिए हैं। साथ ही, आरएसआरटीसी के तत्कालीन प्रबंध निदेशक पुरुषोत्तम शर्मा के वेतन से अतिरिक्त 6 फीसदी वार्षिक ब्याज की कटौती करने और वसूली होने तक वेतन रोकने के भी निर्देश दिए हैं।

एफआइआर की प्रक्रिया शुरू

न्यायालय ने वर्मा के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराने के लिए संबंधित थानाधिकारी, पुलिस उपायुक्त और पुलिस आयुक्त को ई-मेल व स्पीड पोस्ट के जरिए आदेश की कॉपी भेजने के भी निर्देश दिए। इसके अलावा श्रम आयुक्त और संबंधित श्रम निरीक्षकों को न्यूनतम मजदूरी अधिनियम 1948, वेतन भुगतान अधिनियम 1936 और औद्योगिक विवाद अधिनियम के प्रावधानों के तहत संदीप वर्मा के खिलाफ विधिक कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।

Updated on:
20 Aug 2026 10:30 pm
Published on:
20 Aug 2026 10:30 pm