
राजस्थान में सभी जातियों, धर्मों और समुदायों के नागरिकों के लिए एक समान नागरिक कानून जल्द लागू होने जा रहा है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार ने 'राजस्थान समान नागरिक संहिता, 2026' (The Rajasthan Uniform Civil Code, 2026) का कानूनी ड्राफ्ट तैयार करने के लिए एक हाई लेवल कमेटी का गठन कर दिया है। शासन सचिवालय में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल और गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने इस ऐतिहासिक निर्णय की विस्तृत जानकारी साझा की। मंत्रियों ने बताया कि 14 अप्रैल 2026 को आयोजित राज्य मंत्रिमण्डल की बैठक में इस विषय पर सार्थक कार्रवाई करने का नीतिगत निर्णय लिया गया था। इस कानून का मुख्य ध्येय अलग-अलग पर्सनल लॉ के कारण महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव को पूरी तरह समाप्त करना और उन्हें पुरुषों के बराबर कानूनी अधिकार दिलाना है।
राजस्थान में लागू होने जा रहे इस नए कानून के 10 सबसे बड़े और महत्वपूर्ण प्रावधान इस प्रकार हैं:
विधेयक के प्रारूप को पूरी तरह से विधिक, त्रुटिहीन और प्रगतिशील बनाने के लिए राज्य सरकार ने देश की बेहद अनुभवी और उच्चतम न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति श्रीमती रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक ड्राफ्टिंग कमेटी का गठन किया है।
इस समिति के मुख्य सदस्य इस प्रकार हैं:
गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार इस कानून को थोपने के बजाय पूरी तरह से पारदर्शी और समावेशी बनाना चाहती है। इसके लिए गठित की गई उच्च स्तरीय समिति राजस्थान के सभी संभाग स्तरों पर जाकर आम जनता, सामाजिक संगठनों, कानूनविदों और विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों से सीधा जन-संवाद स्थापित करेगी।
इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार द्वारा एक विशेष आधिकारिक वेबसाइट भी लॉन्च की जा रही है। इस डिजिटल माध्यम के जरिए राजस्थान का कोई भी आम नागरिक घर बैठे इस प्रस्तावित कानून को लेकर अपने बहुमूल्य सुझाव, आपत्तियां और विचार सीधे ड्राफ्टिंग कमेटी तक ऑनलाइन भेज सकेगा। जनता से प्राप्त सकारात्मक सुझावों को विधेयक के अंतिम प्रारूप में शामिल किया जाएगा।