
राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले करोड़ों मजदूरों और परिवारों के लिए 1 July 2026 यानी आज का दिन एक ऐतिहासिक और बड़ा बदलाव लेकर आया है। पूरे देश के साथ-साथ राजस्थान में भी आज से करीब 20 साल पुराने मनरेगा (MGNREGA) कानून को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है और उसकी जगह नया 'विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण)' यानी वीबी-जी रामजी (VB-G RAM G) अधिनियम, 2025 लागू हो गया है। जुलाई महीने की पहली तारीख और बुधवार के इस शुभ संयोग के साथ शुरू हुए इस नए कानून से राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में रोजगार की पूरी व्यवस्था बदलने जा रही है, जो सीधे तौर पर यहां के गरीब परिवारों की आजीविका और लाइफस्टाइल को प्रभावित करेगी।
विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत वीबी-जी रामजी अधिनियम, 2025 के प्रावधानों के अनुसार 1 जुलाई से कार्य का समय प्रातः 9 बजे से सायं 5 बजे तक रहेगा, दोपहर 1 बजे से 2 बजे तक विश्राम काल रहेगा।
जयपुर जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रतिभा वर्मा ने बताया कि यदि कोई श्रमिक समूह निर्धारित समय से पूर्व निर्धारित टास्क का काम पूरा कर लेता है तो वह कार्य की माप मेट के पास उपलब्ध मस्टररोल में अंकित टास्क प्रपत्र में दर्ज कराने तथा समूह के मुखिया के हस्ताक्षर करवाने के उपरांत कार्यस्थल छोड़ सकेगा।
उन्होंने बताया कि संबंधित मेट निर्धारित समय तक कार्यस्थल पर उपस्थित रहेगा। इस नई व्यवस्था में श्रमिकों को निर्धारित टास्क में किसी प्रकार की कमी नहीं की गई है।
राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार संकट को दूर करने के लिए इस नए कानून में एक बहुत ही मानवीय और संवेदनशील फैसला लिया गया है। नए वीबी-जी रामजी कानून के तहत अब ग्रामीण परिवारों को साल में मिलने वाले गारंटीशुदा रोजगार के दिनों को 100 दिन से बढ़ाकर सीधे 125 दिन कर दिया गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि राजस्थान के गांवों में रहने वाले गरीब मजदूरों को अब साल में 25% अधिक दिनों तक काम करने का कानूनी अधिकार मिलेगा। इससे न केवल गांवों से शहरों की तरफ होने वाला पलायन रुकेगा, बल्कि संकट के दिनों में ग्रामीण परिवारों को अपने ही गांव में एक मजबूत आर्थिक सुरक्षा कवच मिल सकेगा।
केंद्र सरकार ने आज 1 July 2026 से ही इस नए कानून के तहत देश और राज्य भर में नई मजदूरी दरें भी पूरी तरह से नोटिफाई कर दी हैं। अब तक मनरेगा के तहत मिलने वाली राष्ट्रीय औसत मजदूरी जो ₹298.8 प्रतिदिन हुआ करती थी, उसे वीबी-जी रामजी कानून के तहत बढ़ाकर ₹327.4 प्रतिदिन कर दिया गया है। इसी के साथ सरकार ने इस योजना के तहत एक नया अंतरिम बेस प्राइस भी तय किया है, जिसके अनुसार अब किसी भी मजदूर को ₹300 प्रतिदिन से कम मजदूरी नहीं दी जाएगी। राजस्थान के मजदूरों के लिए यह एक बड़ी राहत है, क्योंकि अब उनके काम की सही कीमत उन्हें मिल सकेगी जिससे उनकी क्रय शक्ति बढ़ेगी।
इस नए कानून में राजस्थान के श्रमिकों की कार्यक्षमता को सम्मान देने के लिए एक बेहद व्यावहारिक नियम जोड़ा गया है। जयपुर जिला परिषद की सीईओ प्रतिभा वर्मा के अनुसार, यदि कोई श्रमिक समूह अपने निर्धारित समय से पहले ही अपने अलॉटेड टास्क (सौपे गए काम) को पूरा कर लेता है, तो उसे बेवजह शाम 5 बजे तक कार्यस्थल पर बैठने की जरूरत नहीं होगी। वह अपने कार्य की माप मेट के पास उपलब्ध मस्टररोल के टास्क प्रपत्र में दर्ज कराकर और अपने ग्रुप के मुखिया के साइन करवाकर समय से पहले भी घर लौट सकेगा और इसके लिए उसकी मजदूरी में कोई कटौती नहीं की जाएगी। हालांकि, संबंधित मेट को तय समय यानी शाम 5 बजे तक कार्यस्थल पर अनिवार्य रूप से उपस्थित रहना होगा।
राजस्थान में अक्सर मनरेगा श्रमिकों को समय पर मजदूरी न मिलने या पेमेंट अटकने की शिकायतें रहती थीं, लेकिन अब नए कानून में पारदर्शिता और जवाबदेही को बहुत कड़ा कर दिया गया है। नए नियमों के मुताबिक, जैसे ही किसी मजदूर का काम पूरा होगा, उसके ठीक 15 दिनों के भीतर उसकी मजदूरी का पूरा भुगतान सीधे उसके बैंक खाते में ट्रांसफर करना कानूनी रूप से अनिवार्य कर दिया गया है।
अगर इसमें कोई देरी होती है, तो संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है। इसके अलावा, योजना के तहत होने वाले सभी कामों और संपत्तियों को 'विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना स्टैक' के साथ जियो-टैग (Geo-tag) किया जाएगा और फर्जीवाड़े को रोकने के लिए मजदूरों का बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन भी अनिवार्य किया गया है।
राजस्थान जैसे राज्य में जहां पानी की हमेशा किल्लत रहती है, वहां इस नए कानून के तहत होने वाले कार्य काफी मददगार साबित होंगे। वीबी-जी रामजी योजना के तहत गांवों के बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने के लिए कुल 318 अलग-अलग तरह के कार्यों को शामिल किया गया है। सबसे खास बात यह है कि इन 318 कार्यों में से अकेले 107 काम केवल और केवल जल संरक्षण, तालाबों की खुदाई, और एनिकट निर्माण से जुड़े हुए हैं। इससे राजस्थान के गांवों में जल स्तर को सुधारने में बहुत बड़ी मदद मिलेगी और खेती-किसानी को भी नया जीवन मिलेगा।
मनरेगा से वीबी-जी रामजी कानून में इस बड़े ट्रांजिशन (बदलाव) को सुचारू बनाने और जमीनी स्तर पर तकनीकी दिक्कतों को दूर करने के लिए केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय और राज्य स्तर के प्रभारी अधिकारी सीधे फील्ड में तैनात हो चुके हैं। इस नए कानून के प्रति राजस्थान के हर गांव और ढाणी के मजदूर को जागरूक करने के लिए कल, यानी 2 जुलाई को राज्य की सभी ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर विशेष 'जन सम्मेलन' आयोजित किए जाएंगे। इन सम्मेलनों में ग्रामीणों को नए अधिकारों, बढ़ी हुई मजदूरी और समय के नियमों के बारे में विस्तार से समझाया जाएगा।