
जयपुर। विधानसभा का मानसून सत्र शुरू होने के दूसरे ही दिन शुक्रवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो सकता है। सत्र की आगे की कार्यवाही को लेकर गुरुवार को विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी की अध्यक्षता में कार्य सलाहकार समिति (बीएसी) की बैठक हुई। सूत्रों के अनुसार शुक्रवार को प्रश्नकाल और शून्यकाल के बाद अनुपूरक अनुदान की मांगें पारित कराई जा सकती हैं। इसके बाद सदन अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने की संभावना है।
निकाय और पंचायत चुनाव के बाद नवंबर में विधानसभा का अगला चरण शुरू हो सकता है। राजस्थान सरकार शुक्रवार को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक सदन में पेश कर सकती है। हालांकि, सत्र की संक्षिप्त अवधि को देखते हुए इसके इसी चरण में पारित होने की संभावना कम है। विधेयक को अगले चरण में चर्चा के बाद पारित कराया जा सकता है।
इससे पहले सोलहवीं विधानसभा के छठवें सत्र के पहले दिन गुरुवार को ही सरकार और विपक्ष आमने-सामने आ गए। कांग्रेस विधायकों ने स्कूलों में बाहरी लोगों और मीडिया के प्रवेश पर रोक के विरोध में विधानसभा के बाहर धरना दिया और सदन की कार्यवाही का बहिष्कार किया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि पैदल मार्च के बाद विधानसभा पहुंचने पर मुख्य गेट नहीं खोला गया और विधायकों को प्रवेश से रोका गया। इसके पलटवार में सत्तापक्ष ने आरोप लगाया कि कांग्रेस विधायक वंदे मातरम् के पूर्ण गायन से बचने के लिए सदन में नहीं आए।
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इसे साजिश बताते हुए आरोप खारिज किया और कहा कि कांग्रेस वंदे मातरम् का हमेशा सम्मान करती रही है। पहले दिन राजस्थान वृक्ष संरक्षण विधेयक और एक निजी विश्वविद्यालय विधेयक पेश किए गए। दिवंगत नेताओं को श्रद्धांजलि के बाद करीब आधे घंटे में सदन शुक्रवार सुबह 11 बजे तक स्थगित हो गया।
सदन शुरू हुआ तो कांग्रेस सदस्यों की कुर्सियां खाली रहीं। वहीं भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) के सदस्य आदिवासी पोशाक में आए और अलग भील प्रदेश की मांग उठाई।
सदन में विधानसभाध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि कांग्रेस सदस्यों की गैर मौजूदगी देखकर पीड़ा हो रही है। उनको एक-एक कर गेट से अंदर आने को कहा था, लेकिन वह नहीं माने। बिना वजह गैर हाजिर हैं। विपक्ष को सदन के भीतर अपने मुद्दे रखने का पूरा अधिकार है, इसलिए उसे सदन की कार्यवाही में शामिल होना चाहिए।
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने मीडिया से कहा कि कांग्रेस विधायकों को एक साजिश के तहत विधानसभा के गेट पर रोका गया, ताकि वे सदन में आयोजित वंदे मातरम् कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सकें। जब हमें सदन में पहुंचने ही नहीं दिया तो वंदे मातरम् में शामिल न होने का सवाल ही नहीं उठता।
संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि खेद का विषय है कि विपक्षी सदस्य बिना किसी सूचना के सदन से गैर हाजिर हैं। सर्वदलीय बैठक से अलग जाकर विपक्ष का व्यवहार लोकतंत्र के हिसाब से नहीं है। वहीं, सरकारी मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने कहा कि संभवतः विपक्ष इसलिए नहीं आया, क्योंकि उसे राष्ट्रगीत गायन में शामिल होना पड़ता।
सदन की कार्यवाही के पहले ही दिन विपक्ष के बहिष्कार और बाहर धरना-प्रदर्शन के बीच मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी से मुलाकात की। बताया जा रहा है कि दोनों के बीच सत्र को चलाने और विपक्ष के विरोध प्रदर्शन को लेकर आगे की रणनीति पर मंथन हुआ।