
राजस्थान में दक्षिण-पश्चिम मानसून की आधिकारिक रूप से विदाई हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद प्रदेश के कई जिलों में अक्टूबर के महीने में भी बादलों की आवाजाही और हल्की बारिश का दौर देखने को मिल रहा है। मौसम केंद्र जयपुर के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, मानसून की विदाई रेखा प्रदेश के अधिकांश हिस्सों को पार कर चुकी है, लेकिन बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में बन रहे स्थानीय मौसमी तंत्र के कारण पूर्वी राजस्थान के कुछ हिस्सों में हल्की वर्षा दर्ज की जा रही है। ऐसे में आम जनता और किसानों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर मानसून जाने के बाद भी अचानक मौसम में यह बदलाव क्यों आया है और प्रदेश में कड़ाके की सर्दी और गुलाबी ठंड की शुरुआत किस तारीख से होने की उम्मीद है।
मानसून के जाने के बाद दिन के तापमान में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, जबकि रात के समय हवाओं की दिशा बदलने से हल्की नमी और ठंडक का अहसास होने लगा है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि अक्टूबर का यह महीना राजस्थान के लिए एक मौसमी बदलाव का समय होता है, जहां दिन में तेज धूप और रात में हल्की ठंडक महसूस की जाती है।
मानसून विदाई रेखा यानी Monsoon Withdrawal Line उस काल्पनिक रेखा को कहा जाता है, जो यह दर्शाती है कि मानसून का प्रभाव क्षेत्र किस सीमा तक पीछे हट चुका है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, जब किसी क्षेत्र में लगातार 5 दिनों तक बारिश रुक जाती है, हवा में नमी का स्तर काफी कम हो जाता है और हवा की दिशा बदलकर उत्तर-पश्चिमी हो जाती है, तो वहां से मानसून की वापसी की घोषणा की जाती है।
राजस्थान में इस वर्ष सितंबर के अंतिम सप्ताह से ही पश्चिमी जिलों जैसे जैसलमेर, बाड़मेर, और बीकानेर से मानसून की वापसी शुरू हो गई थी। वर्तमान स्थिति के अनुसार, मानसून विदाई रेखा पूरे पश्चिमी राजस्थान, मध्य राजस्थान और अधिकांश उत्तरी जिलों को पार करते हुए आगे निकल चुकी है। केवल पूर्वी राजस्थान के कुछ सीमावर्ती इलाकों में नमी वाले बादलों की मौजूदगी के कारण औपचारिक विदाई की अंतिम प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
मौसम केंद्र जयपुर द्वारा जारी ताजा मौसम बुलेटिन के अनुसार, उत्तर-पश्चिमी भारत में बने एक नए कमजोर पश्चिमी विक्षोभ और हवा के चक्रवाती तंत्र के कारण पूर्वी राजस्थान के कुछ जिलों में मौसम में बदलाव देखा जा रहा है। कुछ स्थानों पर आंशिक रूप से बादल छाए रहने तथा मेघगर्जन के साथ हल्की बारिश या बूंदाबांदी होने की संभावना जताई गई है।
मौसम विभाग का कहना है कि यह बारिश मानसूनी नहीं है, बल्कि पोस्ट-मानसून मौसमी हलचल का हिस्सा है। अगले कुछ दिनों में यह तंत्र पूरी तरह से कमजोर पड़ जाएगा और पूरे प्रदेश में मौसम शुष्क हो जाएगा। इसके बाद दिन का तापमान स्थिर रहेगा और आसमान पूरी तरह साफ रहने का अनुमान है।
वर्ष 2026 के मानसून सीजन के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो राजस्थान में कुल मिलाकर औसत से करीब 13 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। हालांकि सीजन की शुरुआत में जुलाई और अगस्त के दौरान अच्छी बारिश हुई थी, लेकिन सितंबर महीने में मानसून के सुस्त पड़ने के कारण कुल बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे रह गया।
फसलों पर प्रभाव: 13 प्रतिशत कम बारिश के बावजूद समय पर हुई शुरुआती बारिश से खरीफ की फसलों (जैसे बाजरा, मूंग, ग्वार, और तिल) को लाभ मिला है। हालांकि, सीजन के अंतिम दौर में बारिश कम होने से रबी फसलों (जैसे सरसों और गेहूं) की अगेती बुवाई के लिए किसानों को सिंचाई के पानी पर अधिक निर्भर रहना पड़ेगा।
बांधों का जलस्तर: पश्चिमी राजस्थान के जवाई बांध और पाली-सिरोही क्षेत्र के जलाशयों में इस बार औसतन कम पानी की आवक हुई है, जबकि बीसलपुर, राणा प्रताप सागर और माही बजाज सागर जैसे प्रमुख बांधों में पेयजल और सिंचाई के लिए पर्याप्त जल भंडारण उपलब्ध है।
मानसून की विदाई के साथ ही राजस्थान में मौसमी चक्र बदलने लगा है। मौसम विभाग के अनुसार, अक्टूबर के तीसरे सप्ताह से प्रदेश के तापमान में स्पष्ट गिरावट देखने को मिलेगी। वर्तमान में रात का न्यूनतम तापमान 18 से 22 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है, जबकि दिन का अधिकतम तापमान 33 से 36 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया जा रहा है।
अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से उत्तर भारत और हिमालयी क्षेत्रों से आने वाली ठंडी हवाओं के प्रभाव से राजस्थान के सीकर, चुरु, झुंझुनूं, फतेहपुर और माउंट आबू में 'गुलाबी ठंड' की विधिवत शुरुआत हो जाएगी। इसके बाद नवंबर के प्रथम सप्ताह से पूरे प्रदेश में रातों के समय अच्छी खासी ठंडक महसूस की जाएगी और दिसंबर-जनवरी में कड़ाके की सर्दी का असर देखने को मिलेगा।