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राजस्थान में भी वोटर लिस्ट में गड़बड़ी की आशंका, पंचायत चुनाव से पहले ग्रामीणों में भारी आक्रोश, चुनाव बहिष्कार तक पहुंची बात

Rajasthan Panchayat Election : राजस्थान पंचायत चुनाव 2026 से पहले वोटर लिस्ट में गड़बड़ी और परिसीमन विवाद बढ़ा। टोंक में चुनाव बहिष्कार की चेतावनी और श्रीगंगानगर-जयपुर में वोट ट्रांसफर पर बवाल।
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Rajasthan Panchayat Chunav Update

Rajasthan Panchayat Chunav - AI PIC

राजस्थान में आगामी पंचायती राज चुनावों का बिगुल बजने के साथ ही ग्रामीण अंचलों में राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है, लेकिन इसके साथ ही प्रशासनिक व्यवस्था और निर्वाचन आयोग की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। राज्य के विभिन्न जिलों से मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर धांधली, वोट ट्रांसफर और परिसीमन के फैसलों को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है। श्रीगंगानगर के लालगढ़ जाटान से लेकर टोंक के मालपुरा और जयपुर के चौमूं तक, ग्रामीण इलाकों में लोग अपनी आपत्तियां दर्ज करवा रहे हैं। टोंक जिले के बीड़गनवर गांव के लोगों ने तो हाल ही में जिला कलेक्टर टीना डाबी को ज्ञापन सौंपकर साफ कह दिया है कि अगर उनकी पंचायत परिसीमन की मांग नहीं मानी गई तो वे आगामी पंचायत चुनाव में सामूहिक रूप से मतदान का पूर्ण बहिष्कार करेंगे।

एक तरफ जहां टोंक में दूरी और सुरक्षा को लेकर परिसीमन का कड़ा विरोध हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ श्रीगंगानगर और जयपुर ग्रामीण अंचलों में मतदाता सूची की गंभीर तकनीकी खामियों ने ग्रामीणों और चुनाव लड़ रहे संभावित उम्मीदवारों की नींद उड़ा दी है।

शिकायतों के मुताबिक़ पिछले 24 वर्षों से एक ही वार्ड में रह रहे परिवारों के वोट कई किलोमीटर दूर दूसरे वार्डों में जोड़ दिए गए हैं, तो वहीं एक ही घर में रहने वाले पति-पत्नी और परिजनों के नाम अलग-अलग वार्डों में दर्ज होने के चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं। इन प्रशासनिक त्रुटियों के कारण गांवों में असमंजस और चुनावी तनाव का माहौल गहराता जा रहा है।

24 साल से वार्ड-1 में निवास, लेकिन वोट ट्रांसफर कर दिया वार्ड-16 में!

वोटर लिस्ट में लापरवाही का सबसे हैरान करने वाला मामला श्रीगंगानगर जिले के सादुलशहर ब्लॉक स्थित लालगढ़ जाटान ग्राम पंचायत से सामने आया है। यहां के निवासी भानु प्रताप और राम सिंह गोदारा ने बताया कि उनका परिवार पिछले 24 वर्षों से लगातार वार्ड नंबर 1 में निवास कर रहा है। इसके बावजूद जब नई मतदाता सूची आई तो उनका वोट वार्ड नंबर 16 में जोड़ दिया गया। बीएलओ द्वारा नक्शे और सर्वे किए जाने के दावों के बावजूद इस प्रकार की लापरवाही से ग्रामीणों में गहरा रोष व्याप्त है।

सादुलशहर ब्लॉक में अकेले लालगढ़ जाटान और आसपास के क्षेत्रों से कई मतदाताओं ने वोटर लिस्ट में गड़बड़ियों को लेकर आधिकारिक आपत्तियां दर्ज करवाई हैं। ग्राम विकास अधिकारी विवेक कुमार कथूरिया के अनुसार करीब 50 से 60 लिखित आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें दस्तावेजों की जांच कर समाधान किया जा रहा है।

सादुलशहर उपखंड अधिकारी (SDM) संजय कुमार ने बताया कि आपत्तियों के निस्तारण के लिए अलग-अलग प्रशासनिक टीमें गठित की गई हैं और सभी आपत्तियों का भौतिक सत्यापन करके 19 नवंबर को अंतिम संशोधित मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाएगा।

एक ही घर के सदस्यों का अलग-अलग वार्ड में नाम!

वोटर लिस्ट के पुनरीक्षण अभियान के दौरान केवल श्रीगंगानगर ही नहीं, बल्कि जयपुर ग्रामीण के चौमूं नगर परिषद और ग्रामीण सीमाओं से सटे वार्ड संख्या 6 में भी भारी खामियां पाई गई हैं। यहां कई परिवारों में यह स्थिति उत्पन्न हो गई है कि एक ही मकान में रहने वाले पति-पत्नी, माता-पुत्र या सगे भाइयों का नाम अलग-अलग वार्डों की मतदाता सूची में डाल दिया गया है। इसके चलते एक ही परिवार के लोगों को दो अलग-अलग पोलिंग बूथों और वार्डों में वोट डालने जाना पड़ेगा।

इसके अलावा अलवर, बाड़मेर और बीकानेर के कुछ ग्रामीण इलाकों से भी यह शिकायतें आई हैं कि कई रसूखदार लोगों या तकनीकी त्रुटियों के कारण एक ही व्यक्ति का नाम दो-दो वार्डों की सूचियों में दर्ज हो गया है। इससे चुनाव लड़ रहे भावी उम्मीदवारों में फर्जी मतदान की आशंका बढ़ गई है। उम्मीदवारों का कहना है कि बीएलओ स्तर पर लापरवाही के कारण असली स्थानीय मतदाताओं के नाम कट गए हैं या दूसरे वार्डों में मैप हो गए हैं, जिससे पूरी चुनावी गणित बिगड़ने का खतरा पैदा हो गया है।

टोंक में परिसीमन पर महासंग्राम, मतदान बहिष्कार की चेतावनी

टोंक जिले के मालपुरा उपखंड क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बीड़गनवर गांव में पंचायत परिसीमन को लेकर ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पंचायत पुनर्गठन के तहत बीड़गनवर को उसकी पुरानी ग्राम पंचायत गनवर से हटाकर कछौलिया पंचायत में शामिल कर दिया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि बीडगनवर से गनवर की दूरी महज 2 किलोमीटर है, जबकि नई कछौलिया पंचायत करीब 7 किलोमीटर दूर है। इस फैसले के विरोध में ग्रामीणों ने एक बड़ी महापंचायत आयोजित कर जिला कलेक्टर टीना डाबी को ज्ञापन सौंपा और सर्वसम्मति से चुनाव बहिष्कार का फैसला सुना दिया।

ग्रामीणों का मुख्य तर्क यह है कि कछौलिया जाने वाले रास्ते के बीच में लगभग 7 किलोमीटर का इलाका पूरी तरह से घना जंगल है। ऐसे में महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं के लिए रात के समय या सामान्य दिनों में भी पंचायत संबंधी सरकारी कामकाज के लिए जाना सुरक्षा की दृष्टि से बेहद खतरनाक है। इसके अलावा गांव का पूरा राजस्व, कृषि भूमि और बच्चों का स्कूल गनवर से ही जुड़ा हुआ है। बाबूलाल बैरवा, बनवारी लाल, मोहन लाल और रामप्रसाद सहित प्रमुख ग्रामीणों ने दो टूक कहा है कि जब तक उन्हें वापस गनवर पंचायत में शामिल नहीं किया जाता, तब तक गांव का एक भी व्यक्ति वोट नहीं डालेगा।

प्रशासन की मुस्तैदी और भौतिक सत्यापन का काम जारी

ग्रामीण क्षेत्रों से उठ रहे भारी विरोध और चुनाव बहिष्कार की चेतावनियों के बाद राज्य निर्वाचन आयोग सख्त रुख अपना रहा है। आयोग के निर्देशों के बाद संबंधित उपखंड अधिकारियों (SDM), तहसीलदारों और ग्राम विकास अधिकारियों (VDO) को तुरंत मौके पर जाकर शिकायतों के निपटारे के आदेश दिए गए हैं।

प्रशासनिक अधिकारियों का दावा है कि जिन भी क्षेत्रों में वार्ड मैपिंग या वोट ट्रांसफर की गड़बड़ियां हुई हैं, वहां बीएलओ और गिरदावर की टीमें मौके पर जाकर निवास स्थान का भौतिक सत्यापन कर रही हैं। आयोग का कहना है कि अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन से पहले हर योग्य नागरिक के वोट को उसके सही वार्ड में स्थानांतरित कर दिया जाएगा ताकि निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव संपन्न कराए जा सकें। हालांकि, टोंक जैसे परिसीमन विवादों पर प्रशासनिक समाधान क्या निकलता है, इस पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं।

मतदाता सूची में गड़बड़ी या नाम न होने पर क्या करें?

यदि आपका नाम मतदाता सूची से गायब है, गलत वार्ड में ट्रांसफर हो गया है या उसमें कोई लिपिकीय त्रुटि (नाम/पता/आयु की गलती) है, तो आपको:

संबंधित अधिकारी से संपर्क: आप अपने क्षेत्र के बीएलओ (Block Level Officer - BLO), ग्राम पंचायत के ग्राम विकास अधिकारी (VDO), नायब तहसीलदार या सीधे अपने ब्लॉक के उपखंड अधिकारी (SDM / जिला निर्वाचन अधिकारी) कार्यालय में अपनी शिकायत लिखित रूप में दे सकते हैं।

दस्तावेज जमा करना: शिकायत या नाम सुधार के आवेदन के साथ आपको अपनी पहचान, सही आयु और उस वार्ड विशेष का स्थानीय निवास प्रमाण पत्र (जैसे आधार कार्ड, बिजली/पानी का बिल, राशन कार्ड आदि) आवश्यक दस्तावेजों के रूप में प्रस्तुत करना होगा।

भौतिक सत्यापन: वार्ड के नक्शे में आपके निवास स्थान को चिन्हित करवाकर और मौका मुआयना करवाकर अधिकारी इस समस्या का तुरंत समाधान कर रहे हैं।

दोबारा अवश्य सत्यापित कर लें: स्थानीय पंचायत भवन, तहसील कार्यालय या राज्य निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना नाम व वार्ड संख्या दोबारा अवश्य सत्यापित कर लें ताकि मतदान के दिन कोई समस्या न हो।

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