
पूर्व सांसद रतन सिंह और बेटे दिवंगत राजेंद्र प्रताप
राजस्थान की राजधानी जयपुर से एक सनसनीखेज और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में अधिशासी अभियंता (एक्सईएन) के पद पर कार्यरत राजेंद्र प्रताप सिंह की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। इस दुखद घटना के बाद उनके पिता एवं भरतपुर के पूर्व सांसद, मालवीय नगर निवासी रतन सिंह ने अपनी ही पुत्रवधू नीतू सिंह, पोते सौरव और ससुराल पक्ष के अन्य सदस्यों के खिलाफ जयपुर के जवाहर सर्किल थाने में हत्या का गंभीर मुकदमा दर्ज करवाया है।
पूर्व सांसद ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में सीधा आरोप लगाया है कि अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने और करोड़ों की संपत्ति हड़पने की नीयत से उनके बेटे को साजिश के तहत जहरीला पदार्थ देकर मार दिया गया।
जवाहर सर्किल थाना पुलिस ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में तुरंत कार्रवाई करते हुए मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने के लिए एफएसएल की टीम को मौके पर बुलाकर गहन मुआयना करवाया। इसके साथ ही घर में लगे सीसीटीवी कैमरों की डीवीआर को जब्त कर लिया गया है ताकि घटना वाले दिन की हर गतिविधि का सच सामने आ सके।
पूर्व सांसद के बेटे की अचानक हुई इस संदिग्ध मौत ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है, वहीं पुलिस अब एफएसएल और पैथोलॉजी रिपोर्ट का इंतजार कर रही है ताकि मौत के सटीक कारणों का आधिकारिक खुलासा हो सके।
शिकायत के अनुसार, पीडब्ल्यूडी एक्सईएन राजेंद्र प्रताप सिंह और नीतू सिंह की शादी 11 मई 2005 को हुई थी। हालांकि, शादी के कुछ ही समय बाद दोनों के बीच वैवाहिक मतभेद शुरू हो गए थे। यह विवाद इस हद तक बढ़ गया कि राजेंद्र प्रताप सिंह ने पारिवारिक न्यायालय (फैमिली कोर्ट) में पत्नी से तलाक लेने के लिए केस भी दायर कर दिया था। दोनों के बीच तनाव इतना अधिक था कि नीतू सिंह और उनका बेटा पिछले करीब पांच-छह सालों से राजेंद्र से अलग रह रहे थे।
लेकिन इसी साल मई 2026 में दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति बनी और नीतू सिंह अपने बेटे सौरव के साथ वापस जयपुर के मालवीय नगर स्थित घर में आकर राजेंद्र के साथ रहने लगी थीं। पूर्व सांसद रतन सिंह का आरोप है कि वापस साथ रहने के बाद घर में शांति बनने के बजाय मकान, प्रॉपर्टी और पैसों को लेकर रोजाना विवाद और कलह अत्यधिक बढ़ गई थी।
पूर्व सांसद रतन सिंह ने पुलिस को दी अपनी विस्तृत शिकायत में बताया कि 4 सितंबर को मकान और पैसों के लेन-देन को लेकर घर में भारी विवाद हुआ था। इस दौरान राजेंद्र प्रताप सिंह को जान से मारने की धमकी भी दी गई थी। इसके तुरंत बाद 4 और 5 सितंबर को संदिग्ध परिस्थितियों में घर के सीसीटीवी कैमरों को तोड़ दिया गया या बंद कर दिया गया।
पूर्व सांसद का दावा है कि उनके बेटे के होंठ नीले पड़े हुए थे और शव की स्थिति पूरी तरह से संदिग्ध थी, जो साफ तौर पर किसी विषैले पदार्थ के सेवन का इशारा करती है। उन्होंने पुलिस से कहा कि सीसीटीवी कैमरे की डीवीआर में इस पूरी साजिश और घटनाक्रम से जुड़े कई अहम साक्ष्य मौजूद हैं, जिनकी फोरेंसिक जांच होना जरूरी है।
जवाहर सर्किल थानाधिकारी महेश चंद्र के अनुसार, पुलिस मामले की हर पहलू से गहनता से तफ्तीश कर रही है। पुलिस टीम ने घटनास्थल से तमाम महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए हैं और सीसीटीवी कैमरों की डीवीआर को अपनी कस्टडी में ले लिया है। मृतक के शव का पोस्टमार्टम करवाकर विसरा नमूने एफएसएल जांच के लिए भेज दिए गए हैं।
थानाधिकारी ने स्पष्ट किया कि पोस्टमार्टम के बाद एफएसएल और पैथोलॉजी विभाग से अंतिम जांच रिपोर्ट आना अभी बाकी है। दोनों विभागों से मेडिकल रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि मौत किसी जहरीले पदार्थ के कारण हुई है या फिर इसके पीछे कोई अन्य मेडिकल कारण रहा है। फिलहाल पुलिस पूर्व सांसद रतन सिंह द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी के आधार पर परिजनों, पड़ोसियों और ससुराल पक्ष के लोगों से पूछताछ कर अनुसंधान आगे बढ़ा रही है।
पूर्व सांसद रतन सिंह राजस्थान की राजनीति के एक प्रतिष्ठित और कद्दावर नेता हैं। उनका पूरा राजनीतिक और व्यक्तिगत प्रोफाइल है:
पूरा नाम: रतन सिंह जाटव
जन्म तिथि: 1 फरवरी 1947
जन्म स्थान: नगर, जिला- भरतपुर (राजस्थान)
पिता का नाम: श्री हेतराम
पत्नी का नाम: श्रीमती प्रेमलता
शैक्षणिक योग्यता
रतन सिंह एक उच्च शिक्षित राजनीतिज्ञ हैं। उन्होंने साल 1970 में जोधपुर विश्वविद्यालय से बी.ई. मैकेनिकल की डिग्री हासिल की थी।
राजनीतिक दल: वे लंबे समय से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) से जुड़े हुए हैं।
लोकसभा सांसद (Member of Parliament): रतन सिंह ने साल 2009 के लोकसभा चुनाव में भरतपुर संसदीय क्षेत्र (अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट) से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा और शानदार जीत दर्ज की। वे 2009 से 2014 तक 15वीं लोकसभा के सदस्य रहे।
संसदीय सक्रियता: सांसद के तौर पर लोकसभा में उनका रिकॉर्ड बेहतरीन रहा। पीआरएस इंडिया (PRS India) के अनुसार, संसद के सत्रों में उनकी उपस्थिति 97% रही, जो राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक थी। उन्होंने संसद में भरतपुर के इंफ्रास्ट्रक्चर, पेट्रोलियम, वित्त और स्वास्थ्य से जुड़े 280 से अधिक सवाल पूछे और करीब 65 बहसों में सक्रिय हिस्सा लिया था।
संगठनात्मक पद: वे राजस्थान कांग्रेस में भी काफी सक्रिय रहे हैं और राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी (RPCC) के उपाध्यक्ष जैसी बड़ी जिम्मेदारी संभाल चुके हैं
Updated on:
13 Oct 2026 09:59 am
Published on:
13 Oct 2026 09:36 am
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