rented cars ruining lives: जयपुर में टशन दिखाने और रफ्तार का शौक पूरा करने के लिए लग्जरी कारों को किराए पर लेने का चलन जानलेवा हो चला है। जितनी लग्जरी कार, उतना महंगा दाम। हाल के दिनों में शहर में कई हादसों में किराए की गाड़ियां शामिल पाई गईं, जिसने पुलिस और परिवहन विभाग की भूमिका पर भी प्रश्नचिन्ह लगा दिए हैं।
Rented cars ruining lives: जयपुर में टशन दिखाने और रफ्तार का शौक पूरा करने के लिए लग्जरी कारों को किराए पर लेने का चलन जानलेवा हो चला है। जितनी लग्जरी कार, उतना महंगा दाम। चमक-दमक से लैस करोड़ों रुपए की लग्जरी गाड़ियां अब शादियों, पार्टियों और सोशल मीडिया रील्स की शान बन चुकी हैं।
हाल के दिनों में शहर में कई हादसों में किराए की गाड़ियां शामिल पाई गईं, जिसने पुलिस और परिवहन विभाग की भूमिका पर भी प्रश्नचिन्ह लगा दिए हैं। नागरिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
किराए पर कारों का रेट ब्रांड और मॉडल पर निर्भर करता है। किराए पर कार देने वालों के मुताबिक लग्जरी जैसी प्रीमियम कारों का किराया करीब 13 हजार रुपए प्रतिदिन तक है, जबकि एसयूवी का किराया 2500 से 5 हजार रुपए, सेडान 1800, हैच बैक 1200 रुपए प्रतिदिन लिया जा रहा है। सिक्योरिटी डिपॉजिट भी अनिवार्य है, जो आमतौर पर 20 से 50 हजार रुपए तक होती है। कुछ रेंटल एजेंसियां डैमेज कवर के नाम पर अतिरिक्त राशि भी लेती हैं।
नियमों के मुताबिक कार किराए पर देने से पहले ग्राहक का ड्राइविंग लाइसेंस जांचना जरूरी है। कई एजेंसियां लाइसेंस की कॉपी और आइडी प्रूफ लेती भी हैं। हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि कई जगहों पर यह जांच औपचारिकता रह गई है। अनुभवहीन या कम उम्र के ड्राइवरों को भी लग्जरी कार सौंप दी जाती है, जो हादसों का बड़ा कारण बन रही है।
पुलिस रिकॉर्ड बताते हैं कि हालिया हादसों में शामिल कुछ वाहन किराए के थे। ऐसे मामलों में सवाल उठता है कि जिम्मेदारी किसकी ड्राइवर की, रेंटल एजेंसी की या सिस्टम की? पुलिस का कहना है कि हादसे की स्थिति में ड्राइवर के खिलाफ कार्रवाई होती है, लेकिन अगर वाहन नियमों के खिलाफ किराए पर दिया गया हो तो एजेंसी पर भी कानूनी शिकंजा कस सकता है।
लग्जरी कारें किराए पर लेना स्टेटस का प्रतीक बन चुका है, लेकिन रफ्तार और रोमांच के साथ जिम्मेदारी भी जरूरी है। नियमों की सख्ती, लाइसेंस की वास्तविक जांच और विभागीय निगरानी ही जयपुर की सड़कों को सुरक्षित बना सकती है, वरना टशन की यह सवारी बार-बार किसी की ज़िंदगी पर भारी पड़ेगी।
पुलिस रिकॉर्ड बताते हैं कि हालिया हादसों में शामिल कुछ वाहन किराए के थे। ऐसे मामलों में सवाल उठता है कि जिम्मेदारी किसकी ड्राइवर की, रेंटल एजेंसी की या सिस्टम की? पुलिस का कहना है कि हादसे की स्थिति में ड्राइवर के खिलाफ कार्रवाई होती है, लेकिन अगर वाहन नियमों के खिलाफ किराए पर दिया गया हो तो एजेंसी पर भी कानूनी शिकंजा कस सकता है।
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