
Death From Heart Attack: सब कुछ कितना सही चल रहा था, घर में हर कोई उनकी वापसी की राह देख रहा था लेकिन एक पल में ही परिवार की सारी खुशियां तबाह कर दीं। कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए विद्याधर नगर निवासी रिटायर्ड सेंट्रल गवर्नमेंट कर्मचारी गौरीशंकर खंडेलवाल (63) ने बीते दिन ही अपने परिवारजनों से फोन पर बड़े उत्साह से बात की थी। उन्होंने हंसते हुए कहा था कि सबके लिए माला और प्रसाद साथ लेकर आया हूं बस जल्द ही सोमवार को घर पहुंच जाऊंगा। यात्रा के अपने खूबसूरत अनुभव साझा करूंगा। यहां तेज सर्दी है, अपना ध्यान रखना। यह सुनकर परिवार की आंखों में खुशी थी, लेकिन अगले ही पल दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। किसे पता था कि यह उनकी आखिरी बात साबित होगी। ये कहना है गौरीशंकर के परिवारजनों का।
पत्नी ने कहा कि 27 जुलाई को लौटने का इंतजार कर रहे घर में अब सिर्फ सन्नाटा और चीख-पुकार है। उत्तराखंड के नाभीढांग में अचानक तबीयत बिगड़ने और हार्ट अटैक से उनकी सांसें थम गईं। प्रसाद का इंतजार कर रहे अपनों के पास अब सिर्फ उनकी यादें बाकी हैं। पिथौरागढ़ पहुंचने पर स्वागत किया गया था।
भतीजे अंकित खंडेलवाल ने बताया कि उनके चाचा खुशमिजाज और मिलनसार स्वभाव के थे। सबको हंसाते थे। सबका ध्यान रखते थे। रोजाना मंदिर जाकर भक्तिभाव में लीन रहना उनको अच्छा लगता था। चार जुलाई को रवानगी के समय भी वे बिल्कुल ठीक थे। पूरी तरह से मेडिकल फिटनेस में वे फिट थे। यात्रा में भी कहीं परेशानी उन्हें नहीं हुई। लेकिन पूरी घटना से सब स्तब्ध हैं। परिवारजनों से आखिरी बात सोमवार को हुई थी। सब परिवारजनों ने उनके स्वागत के लिए विशेष तैयारी की थी सब खुशियां चंद मिनट में तबाह हो गई। बच्चे भी चाचा की फोटो को देखकर रो रहे हैं। चाचा के साथ जयपुर का एक परिवार और गया था लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।
कैलाश मानसरोवर यात्रा समुद्र तल से काफी ऊंचाई पर होती है। मानसरोवर झील की ऊंचाई 15 हजार फीट से अधिक है। अधिक ऊंचाई के कारण वहां ऑक्सीजन का स्तर कम रहता है। ऐसे में यात्रियों और स्टाफ को स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।