
राजस्थान के नए शहरों का मास्टर प्लान। Photo: AI
Rajasthan New Cities Master Plan: जयपुर। राजस्थान में नवगठित 49 शहरों में से ज्यादातर के मास्टर प्लान 'ठेके' पर देने की तैयारी है। नगर नियोजन विभाग और टाउन प्लानिंग शाखा में नगर नियोजकों की फौज होने के बावजूद इस काम को आउटसोर्स किया जा रहा है। इससे मास्टर प्लान (लागू होने से पहले) की गोपनीयता खत्म होने की भी आशंका बनी रहेगी। सवाल इसलिए भी उठ रहा है क्योंकि इसकी गोपनीयता बनाए रखने के लिए कंपनी के लिए क्या-क्या राइडर लगाए जाएंगे, यह स्पष्ट नहीं है।
इस बीच राजस्थान नगरीय विकास विभाग ने टाउन प्लानिंग शाखा को अत्याधुनिक तकनीक मास्टर प्लान तैयार करने के निर्देश दिए है। हालांकि, अभी यह तय होना है कि किन शहरों के मास्टर प्लान कौन तैयार करेगा। जयपुर के नए मास्टर प्लान-2047 को तैयार करने का ज्यादातर काम निजी कंपनी ही करेगी।
जानकारी के मुताबिक राजस्थान के नए शहरों में से ज्यादातर के मास्टर प्लान 'ठेके' पर देने की तैयारी है। पहले फेज में गोविंदगढ़, सिकरी, जायल, टिब्बी, बहादुरपुर, लक्ष्मणगढ़, बानसूर, उचैना, सुल्तानपुर, बसनी, सिवाना, सपोटरा, मंडावरी, बामनवास, हमीरगढ़, बरोदामेव, खाजूवाला, रामगढ़, सरमथुरा, बसेड़ी, पावटा-प्रागपुरा, भोपालगढ़, अटरू, मनोहरपुरा, नरैना (नारायणा), मंडावर, मारवाड़ जंक्शन, बोनली, बिजोलियां, मसूदा, लाम्बाहरिसिंह, नापासर, जमवारामगढ़, दांता, अजीतगढ़, धरियावद, पीपलू, डिग्गी, मेड़ता रोड, गढ़साना, लूणकरनसर, नारायणपुर, टांटोटी, पहाड़ी, जाखल, गुड़ामालानी, मंधान, सोजत रोड और सिंधरी का चयन किया गया है।
1. रहने योग्य शहर हो, यानि यहां जीवनयापन के लिए जरूरी सुविधाएं सुलभता से उपलब्ध हो। इसमें साफ पानी, कचरा मुक्त शहर, चौबीस घंटे पानी व बिजली सप्लाई, सुदृढ़ ड्रेनेज व सीवरेज सिस्टम, सार्वजनिक शौचालय।
2. सड़क के साथ फुटपाथ एरिया भी बढ़े, राहगीरों की किसी को चिंता नहीं है।
3. हर एरिया में सेन्ट्रल पार्क की तर्ज पर ऑक्सीजोन विकसित हो।
मास्टर प्लान किसी भी शहर के विकास का सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है, इसलिए इसकी गुणवत्ता और गोपनीयता दोनों जरूरी हैं। जरूरी हो तो ही आउटसोर्स किया जाए। इसे निजी एजेंसियों से तैयार कराया जाता है तो सख्त निगरानी रखनी होगी और स्पष्ट गोपनीयता शर्तें लागू करनी चाहिए। अंतिम जिम्मेदारी सरकार और टाउन प्लानिंग विभाग की ही होनी चाहिए। मास्टर प्लान केवल नक्शों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि लोगों की जरूरतों पर आधारित हो।
-सी.एस. पाराशर, पूर्व अतिरिक्त मुख्य नगर नियोजक, राजस्थान
Updated on:
24 Jul 2026 09:06 am
Published on:
24 Jul 2026 09:04 am
