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Rajasthan Master Plan: राजस्थान के 16 शहर पुराने मास्टर प्लान के भरोसे, नए शहरी विकास पर उठे सवाल

Rajasthan Smart City Development: राजस्थान में शहरों का विस्तार हो रहा है, आबादी बढ़ रही है, नई कॉलोनियां बस रही हैं, ट्रैफिक का दबाव कई गुना हो चुका। यहां तक कि उद्योग-व्यापार का स्वरूप भी बदल गया है। इन सबके बीच राजस्थान के कई शहर आज भी बरसों पुराने मास्टर प्लान के सहारे आगे बढ़ रहे हैं।
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Rajasthan Master Plan 2026

राजस्थान मास्टर प्लान। पत्रिका फाइल फोटो

जयपुर। राजस्थान में शहरों का विस्तार हो रहा है, आबादी बढ़ रही है, नई कॉलोनियां बस रही हैं, ट्रैफिक का दबाव कई गुना हो चुका। यहां तक कि उद्योग-व्यापार का स्वरूप भी बदल गया है। इन सबके बीच राजस्थान के कई शहर आज भी बरसों पुराने मास्टर प्लान के सहारे आगे बढ़ रहे हैं। सरकार समय पर नए मास्टर प्लान तैयार नहीं कर पा रही, इसलिए बार-बार उनकी वैधता अवधि बढ़ाकर काम चलाया जा रहा है। इससे पुराने विजन से नए शहरों के विकास पर सवाल उठने लगे हैं।
प्रदेश के 16 शहरों में यही स्थिति है। इनमें 12 शहरों के मास्टर प्लान की अवधि बढ़ाकर 2026 तक की गई थी, जो अब करीब पांच महीने बाद फिर समाप्त हो जाएगी।

संभावना है कि राजस्थान सरकार एक बार फिर इन्हीं पुराने मास्टर प्लान की समय सीमा बढ़ाकर काम चलाएगी। वहीं, जयपुर (जेडीए क्षेत्र), चौमूं, बगरू और शाहपुरा के मास्टर प्लान की अवधि 2027 तक बढ़ाई गई। एक वर्ष बीतने के बाद भी नया मास्टर प्लान तैयार करने का काम गति नहीं पकड़ सका है। यहां भी दोबारा पुराने मास्टर प्लान की समय सीमा बढाने के आसार है। शहरी नियोजन विशेषज्ञों का कहना है कि पुराने मास्टर प्लान उस समय की आबादी, यातायात, जलापूर्ति, सीवरेज, हरित क्षेत्र, सार्वजनिक परिवहन, औद्योगिक विकास और जलवायु संबंधी चुनौतियों को ध्यान में रखकर बनाए गए थे। आज परिस्थितियां बदल चुकी है। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के तमाम आदेश के बावजूद शहरों के नियोजन (प्लानिंग) के साथ खिलवाड़ हो रहा है।

पांच माह बाद फिर वही सवाल

अकलेरा, अनूपगढ़, पीलीबंगा, फलौदी, आबूरोड, छबड़ा, अंता, कुशलगढ़, प्रतापगढ़, शाहपुरा, चित्तौड़गढ़ और सलूम्बर के मास्ट प्लान 2026 तक बढ़ाए गए थे। इन शहरों में इस दौरान आबादी बढ़ी, नई आवासीय कॉलोनियां विकसित हुईं, व्यापारिक गतिविधियां बढ़ीं और आधारभूत सुविधाओं की मांग भी बदली।

जेडीए में ही शामिल होंगे छोटे शहर

जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) का क्षेत्रफल काफी बढ़ चुका है। चौमूं, बगरू और शाहपुरा जैसे क्षेत्र जेडीए सीमा में शामिल हो चुके हैं। ऐसे में इन सभी क्षेत्रों को शामिल करते हुए एक समेकित मास्टर प्लान बनाया जाना है। इस प्रक्रिया में अभी दो से प्रक्रिया तीन वर्ष लग सकते हैं।

नए शहर, नई जरूरतें

जलवायु परिवर्तनः हीट वेव, शहरी बाढ़ और सूखे जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए अलग योजना और संवेदनशील क्षेत्रों की मैपिंग।
ब्लू-ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चरः नालों, तालाबों, जलाशयों और हरित पट्टियों को आपस में जोड़कर प्राकृतिक जल निकासी और तापमान नियंत्रण की व्यवस्था।
ई-व्हीकल इकोसिस्टमः हर सेक्टर में चार्जिंग स्टेशन, बैटरी स्वैपिंग और ई-बस डिपो के लिए भूमि आरक्षित करना।
लॉजिस्टिक्स और डिलीवरी हबः ई-कॉमर्स के बढ़ते दौर को देखते हुए वेयरहाउस, ट्रक टर्मिनल और लास्ट माइल डिलीवरी जोन का प्रावधान।
डेटा सेंटर और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चरः 5जी, फाइबर नेटवर्क, डेटा सेंटर और कम्युनिकेशन टावरों के लिए नियोजित स्थान।
आपदा प्रबंधन नेटवर्क: आपातकालीन निकासी मार्ग, राहत केंद्र और फायर व डिजास्टर रिस्पांस इंफ्रास्ट्रक्चर का पूर्व नियोजन।

इनकहा कहना है

मास्टर प्लान शहर के अगले 20-25 वर्षों के विकास का विजन होता है। लगातार अवधि बढ़ाने से बढ़ती नई जरूरतें शामिल नहीं हो पातीं।
-मुकेश मित्तल, पूर्व मुख्य नगर नियोजक