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Patrika Exclusive: राजस्थान में सख्ती के बावजूद साइबर ठगी बेलगाम, 1.46 लाख नंबर ब्लॉक; फिर भी 2,307 करोड़ रुपए उड़ाए

Rajasthan Cyber Fraud: राजस्थान में साइबर ठगी पर सख्ती के बावजूद अपराध नहीं थम रहे। पिछले साढ़े तीन साल में 3.01 लाख से अधिक सिम और 1.46 लाख IMEI ब्लॉक किए गए, फिर भी ठगी 2,307.26 करोड़ रुपए तक पहुंच गई। शिकायतें 58 हजार से बढ़कर 96 हजार पार हो गईं। अब 1 लाख या अधिक की साइबर ठगी पर ई-जीरो एफआईआर दर्ज होगी।
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जयपुर

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Arvind Rao

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मुकेश शर्मा

Jul 24, 2026

Rajasthan Cyber Fraud

राजस्थान में सख्ती के बावजूद साइबर ठगी बेलगाम (पत्रिका क्रिएटिव फोटो)

Rajasthan Cyber Crime: जयपुर: राजस्थान पुलिस साइबर अपराध पर अंकुश लगाने के लिए लगातार अभियान चला रही है। बड़ी संख्या में फर्जी सिम और मोबाइल आईएमईआई नंबर ब्लॉक किए जा रहे हैं, लेकिन इन कार्रवाई का अपेक्षित असर जमीनी स्तर पर दिखाई नहीं दे रहा। पुलिस के ही आंकड़े बताते हैं कि पिछले साढ़े तीन वर्ष में 3.01 लाख से अधिक सिम और 1.46 लाख से अधिक आईएमईआई ब्लॉक किए गए। इसके बावजूद साइबर अपराध की शिकायतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

गौर करने वाली बात है कि इस अवधि में ठगी की राशि 2307.26 करोड़ पहुंच गई। स्थिति यह है कि गत वर्ष जिस अवधि में करीब 58 हजार साइबर शिकायतें दर्ज हुई थीं, उसी अवधि में इस वर्ष यह आंकड़ा 96 हजार से अधिक पहुंच गया। यानी कार्रवाई का दायरा बढ़ा, लेकिन अपराधियों के नेटवर्क और ठगी की घटनाओं पर प्रभावी रोक नहीं लग सकी।

गौरतलब है कि डीजीपी और एडीजीपी साइबर स्तर से नियमित मॉनिटरिंग, निर्देश और कार्रवाई की जा रही है, लेकिन इसका असर थाना और जिला स्तर पर अपेक्षित रूप से नजर नहीं आ रहा। यही कारण है कि साइबर अपराधियों के नए-नए तरीके लगातार सामने आ रहे हैं और शिकायतों का ग्राफ हर वर्ष बढ़ता जा रहा है। कई बार साइबर अपराधियों से पुलिस की मिलीभगत सामने आ चुकी।

टीम पर भी हो टीम की निगरानी

साइबर ठगी के आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस की टीमें कई बार पुख्ता सूचना के बावजूद खाली हाथ लौट आती हैं। इससे कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल उठते हैं। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने सुझाव दिया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए भेजी जाने वाली टीम के साथ-साथ उसकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए दूसरी गोपनीय और विश्वसनीय टीम भी तैनात की जानी चाहिए। यदि जांच के दौरान मिलीभगत या जानबूझकर बरती गई लापरवाही सामने आए तो संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ तत्काल और सख्त कार्रवाई हो। इससे जवाबदेही बढ़ेगी और यह संदेश जाएगा कि कार्रवाई करने वाली टीम पर भी निगरानी रखी जा रही है।

ऐसे हैं हालात

वर्षशिकायतेंकेसठगी रकम (करोड़ रुपए)
202377,680237354.71
20241,00,042466796.56
20251,27,782492768.46
2026*96,886335387.53

नोट:वर्ष 2026 के आंकड़े 12 जुलाई तक के हैं।

एक लाख से अधिक की ठगी, होगी ई-जीरो एफआईआर दर्ज

साइबर अपराध पर लगाम कसने की दिशा में राजस्थान पुलिस अब एक लाख रुपए या इससे अधिक की ठगी की राशि पर ई-जीरो एफआईआर दर्ज करेगी। इससे पहले ई-जीरो एफआईआर दर्ज होने के लिए ठगी की रकम 5 लाख या इससे अधिक थी। इस संबंध में पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा ने आदेश जारी किए हैं। गौरतलब है कि राजस्थान पत्रिका ने पत्रिका रक्षा कवच अभियान चला रखा है। नई व्यवस्था के तहत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराते ही एफआईआर की प्रक्रिया स्वतः शुरू हो जाएगी।

एडीजी साइबर क्राइम वीके सिंह ने बताया कि यह व्यवस्था भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र के राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल और सीसीटीएनएस के एकीकरण से लागू की गई है। इससे शिकायत सीधे पुलिस तंत्र तक पहुंचेगी और तत्काल कानूनी कार्रवाई शुरू हो सकेगी।

अब तक साइबर ठगी के मामलों में शिकायत दर्ज कराने के बाद एफआईआर होने में समय लगता था, जिससे ठगी की राशि रोकने और अपराधियों तक पहुंचने में देरी होती थी। नई व्यवस्था लागू होने से शिकायत मिलते ही मामला संबंधित पुलिस थाने तक पहुंच जाएगा और ई-जीरो एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की जा सकेगी और शुरुआती गोल्डन ऑवर का बेहतर उपयोग होगा।

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