
जयपुर। बीमारी के इलाज में जीवनभर की बचत लगा दी… यह सोचकर कि राजस्थान सरकार की स्वास्थ्य योजना से खर्च का पुनर्भरण मिल जाएगा। लेकिन इलाज के बाद शुरू हुआ इंतजार अब कई बुजुर्ग पेंशनर्स के लिए परेशानी और बेबसी में बदल गया है। राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (आरजीएचएस) के तहत मेडिकल खर्च के पुनर्भरण के लिए आवेदन करने वाले अनेक लाभार्थियों को भुगतान के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ रहा है। किसी की फाइल आपत्ति में अटकी है तो किसी का दावा स्वीकृति के बाद भुगतान की प्रक्रिया में उलझा है। नतीजा यह कि इलाज के लिए जुटाई गई गाढ़ी कमाई वापस मिलने की उम्मीद में बुजुर्ग दफ्तरों और पोर्टल के चक्कर काट रहे है।
आरजीएचएस स्वास्थ्य सुविधा देने वाली योजना है। आधिकारिक दिशा-निर्देशों के मुताबिक जहां कैशलेस उपचार उपलब्ध है, वहां सामान्यतः पुनर्भरण की अनुमति नहीं है। हालांकि गंभीर आपात स्थिति, गैर-अनुमोदित अस्पताल में उपचार, बाहर से खरीदी गई दवाओं और अन्य अपवाद परिस्थितियों में दावा प्रस्तुत कर पुनर्भरण का प्रावधान है। यहीं से पेंशनर्स की मुश्किल शुरू होती है। इलाज के दौरान अपनी जेब से खर्च करने के बाद दावा जमा होता है। इसके बाद दस्तावेजों की जांच, आपत्तियों का जवाब, पात्रता और दरों का परीक्षण जैसे कई चरणों से गुजरना पड़ता है। किसी स्तर पर फाइल अटकने पर लाभार्थी के लिए यह समझना मुश्किल हो जाता है कि भुगतान आखिर रुका कहां है।
राज्य के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार दिसंबर 2025 तक करीब 13.65 लाख परिवार आरजीएचएस से जुड़े थे। 2025-26 में दिसंबर तक ही ओपीडी-आइपीडी सेवाओं और फार्मेसी के 92.76 लाख दावों पर 2,440.69 करोड़ रुपए का खर्च दर्ज किया गया। यानी योजना का दायरा और वित्तीय भार दोनों बड़े हैं।
आरजीएचएस में कुल बकाया भुगतान का आंकड़ा 1,000 करोड़ से ऊपर पहुंचने की शिकायतें सामने आ चुकी हैं। इनमें अस्पतालों और फार्मेसी के भुगतान के साथ लाभार्थियों के पुनर्भरण के दावे भी शामिल हैं। पेंशनर्स के पुनर्भरण का अलग से अद्यतन सरकारी आंकड़ा सार्वजनिक नहीं है, लेकिन विभागीय स्तर पर लंबित दावों को देखते हुए इसका हिस्सा सैकड़ों करोड़ रुपए में होने का अनुमान है।
आरजीएचएस से जुड़े सूत्रों के अनुसार चिकित्सा विभाग की ओर से पुनर्भरण के प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजे जाते हैं। अंतिम स्वीकृति वहीं से होती है। इस बारे में आरजीएचएस की मुख्य कार्यकारी अधिकारी निधि पटेल से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे कोई जवाब नहीं मिला।
पेंशनर विशम्भर मोदी का कहना है कि वे अपने इलाज में खर्च पैसे के पुनर्भरण का दो साल से इंतजार कर रहे हैं। बीमारी के समय परिवार से पैसा जुटाकर इलाज कराने के बाद उन्हें अपने ही पैसे के पुनर्भरण के लिए व्यवस्था के सामने बार-बार गुहार लगानी पड़ रही है। लेकिन उम्रदराज लाभार्थियों के लिए बार-बार कार्यालय जाना या पोर्टल पर स्थिति जानना भी आसान नहीं है।
आपको भी आरजीएचएस में पुनर्भरण नहीं मिल रहा है तो पूरी डिटेल के साथ इस नंबर पर वॉट्सऐप करें। 9057531314