जयपुर

Rajasthan: हाईवे किनारे जमीन खरीदना ‘रिस्क का सौदा’! नई गाइडलाइन की सख्ती से पालना की तैयारी

Rajasthan Highway Land Rule: सरकार द्वारा हाईवे और स्टेट हाईवे के दोनों ओर 75-75 मीटर दूरी अनिवार्य किए जाने के बाद जयपुर ग्रामीण क्षेत्र के प्रॉपर्टी बाजार में अचानक सुस्ती छा गई है। जयपुर-आगरा, जयपुर-टॉक राष्ट्रीय राजमार्ग और जयपुर गंगापुर स्टेट हाईवे के आसपास जमीनों की खरीद-फरोख्त लगभग थम गई है।
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May 22, 2026
Rajasthan Highway Land Rule
फोटो पत्रिका नेटवर्क

Rajasthan Highway Land Rule : बस्सी (जयपुर)। सरकार द्वारा हाईवे और स्टेट हाईवे के दोनों ओर 75-75 मीटर दूरी अनिवार्य किए जाने के बाद जयपुर ग्रामीण क्षेत्र के प्रॉपर्टी बाजार में अचानक सुस्ती छा गई है। जयपुर-आगरा, जयपुर-टॉक राष्ट्रीय राजमार्ग और जयपुर गंगापुर स्टेट हाईवे के आसपास जमीनों की खरीद-फरोख्त लगभग थम गई है। बस्सी क्षेत्र सहित कई इलाकों में जमीनों के के भाव गिरने लगे हैं और निवेशक असमंजस की स्थिति में है। नई गाइडलाइन के तहत हाईवे के निर्धारित दायरे में किसी भी प्रकार का निर्माण अवैध माना जाएगा।

ऐसे में हाईवे किनारे प्लॉट खरीदना अब जोखिम भरा माना जा रहा है। प्रॉपर्टी कारोबारियों का कहना है कि नियम लागू होने के बाद कई सौदे रुक गए हैं और बाजार में मंदी साफ दिखाई देने लगी है। कई भू-कारोबारियों ने नाम छापने की शर्त पर बताया कि उन्होंने पहले ही भारी निवेश कर रखा है, लेकिन अब जमीन बिक नहीं रही और आर्थिक संकट गहराने लगा है।

नियमों की अनदेखी पड़ सकती है भारी

विशेषज्ञों के अनुसार यह व्यवस्था सड़क सुरक्षा और भविष्य की यातायात जरूरतों को ध्यान में रखकर लागू की गई है। पहले हाइवे किनारे अनियोजित निर्माण के कारण दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ रहा था और सड़क चौड़ीकरण कार्य में भी बाधाएं आती थीं। अब प्रशासन सख्ती से नियमों की पालना करवाने की तैयारी में है।

निवेशकों ने बढ़ाई सतर्कता

नई नीति से सबसे ज्यादा प्रभावित वे लोग हैं जिन्होंने हाल हाल ही में प्लॉट खरीदे हैं या खरीदने की योजना बना रहे थे। अब निवेशक मास्टर प्लान, भूमि उपयोग, ग्रीन कवर और राजस्व रिकॉर्ड की पूरी जांच के बाद ही निर्णय ले रहे हैं। बिना जांच के निवेश करना नुकसान का कारण बन सकता है।

होटल-ढाबा संचालकों की बढ़ी बेचैनी

हाईवे किनारे संचालित होटल, ढाबा और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के संचालकों में भी चिंता बढ़ गई है। उन्हें डर है कि भविष्य में सख्ती बढ़ने पर उनके निर्माणों पर कार्रवाई हो सकती है। कई लोग नए निर्माण से बच रहे हैं, वहीं कई भूखंड मालिकों को खरीदार नहीं मिल रहे। कुछ मामलों में तो तय सौदे भी निरस्त हो चुके हैं। कुल मिलाकर नई गाइडलाइन ने हाईवे किनारे जमीन बाजार की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। जहां निवेशकों की सतर्कता बढ़ी है, वहीं कारोबारियों और जमीन मालिकों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।

Updated on:
22 May 2026 03:47 pm
Published on:
22 May 2026 03:47 pm