सांसद हनुमान बेनीवाल ने मोदी सरकार को जमकर घेरा। उन्होंने राजस्थान के संदर्भ में आंकड़ों के साथ दावा किया कि नए फार्मूले से प्रदेश को 10 लोकसभा सीटों का नुकसान होगा और सरकार से 7 तीखे सवाल पूछकर उनकी मंशा स्पष्ट करने की मांग की।
संसद के मानसून सत्र में गुरुवार को नागौर सांसद और आरएलपी (RLP) सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल अपने पुराने तेवर में नजर आए। संविधान 131वें संशोधन विधेयक और परिसीमन विधेयक 2026 पर चर्चा के दौरान बेनीवाल ने केंद्र की एनडीए सरकार पर 'छल-कपट' का आरोप लगाते हुए सामाजिक न्याय की नींव हिलाने की बात कही। उन्होंने साफ किया कि लोकतंत्र केवल 'नंबर गेम' नहीं बल्कि 'विश्वास' का नाम है, जिसे यह सरकार लगातार तोड़ रही है।
बेनीवाल ने सदन में अपनी बात रखते हुए कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण के पक्ष में है और महिलाओं को उचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिलना ही चाहिए। लेकिन, सरकार महिला आरक्षण की आड़ में ओबीसी, दलित, आदिवासी और कमजोर प्रतिनिधित्व वाले मुस्लिम समाज को नुकसान पहुँचाने वाला परिसीमन ला रही है।
उन्होंने मान्यवर कांशीराम के नारे 'जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी' को दोहराते हुए जातिगत जनगणना के बिना किए जा रहे बदलावों पर सवाल उठाए।
सांसद बेनीवाल ने राजस्थान के हक की लड़ाई लड़ते हुए सदन में चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए। उन्होंने कहा:
सदन में बेनीवाल ने मोदी सरकार के सामने सात ऐसी चुनौतियां रखीं, जिनका जवाब फिलहाल सरकार के पास भी नहीं दिखा:
बेनीवाल ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में चुनाव और आचार संहिता के बीच यह बिल लाना स्पष्ट करता है कि सरकार केवल दिखावा करना चाहती है। उन्होंने मांग की कि सरकार पहले जातिगत जनगणना करवाए और उसके बाद ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग की सीटों को आरक्षित करते हुए उनकी संख्या बढ़ाए, तभी देश में सकारात्मक संदेश जाएगा।