जयपुर

RPMT-2009: राजस्थान में 16 साल पुरानी ‘पेपर आउट’ की जांच फाइलों में! 66 आरोपी छात्र आज भी डॉक्टर पद पर

RPMT 2009 Scam: नीट यूजी और प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपरलीक का शोर है, लेकिन राजस्थान में 16 साल पहले आरपीएमटी-2009 में उठे सवाल आज भी सिस्टम का पीछा कर रहे हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि तब जिन अभ्यर्थियों पर फर्जीवाड़े और पेपर आउट की आशंका जताई गई थी, वे आज डॉक्टर बनकर बड़े पदों पर सेवाएं दे रहे हैं।
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May 16, 2026
RPMT-2009 scam
आरपीएमटी-2009 में टॉपर सहित 66 अभ्यर्थियों पर फर्जीवाड़े के आरोप, फोटो-एआइ

RPMT 2009 Scam: नीट यूजी और प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपरलीक का शोर है, लेकिन राजस्थान में 16 साल पहले आरपीएमटी-2009 में उठे सवाल आज भी सिस्टम का पीछा कर रहे हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि तब जिन अभ्यर्थियों पर फर्जीवाड़े और पेपर आउट की आशंका जताई गई थी, वे आज डॉक्टर बनकर बड़े पदों पर सेवाएं दे रहे हैं, जबकि जांच की फाइलें अब भी धूल खा रही हैं।

ये है पूरा मामला

आरपीएमटी-2009 मामले में कोर्ट के निर्देश पर हुई उच्चस्तरीय जांच में 66 अभ्यर्थियों पर विभिन्न प्रकार से फर्जीवाड़े की आशंका जताई गई थी। जांच टीम ने पेपर आउट होने की संभावना दर्ज करते हुए आगे विस्तृत जांच की सिफारिश भी की थी। इसके बावजूद 16 साल बाद भी मामले में ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी।

राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (आरयूएचएस) के पास 50 छात्रों से जुड़े मामलों का रिकॉर्ड तक उपलब्ध नहीं है। केवल 16 मामले हाईकोर्ट की खंडपीठ में लंबित बताए गए हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब जांच एजेंसियों ने खुद पेपर आउट की आशंका जताई थी, तो आगे कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

बिना रफ वर्क कॉपी बनी थी सबसे बड़ा सवाल

उस समय जांच रिपोर्ट में एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया था। रिपोर्ट के अनुसार 2009 का फिजिक्स पेपर बेहद कठिन था और न्यूमेरिकल सवालों में रफ वर्क लगभग अनिवार्य माना गया था। जांच में कई टॉपर छात्रों की कॉपियों में रफ वर्क मिला, लेकिन एक छात्र की कॉपी में लगभग कोई रफ वर्क नहीं था। जांच टीम ने इसे असामान्य मानते हुए आगे पेपरलीक की आशंका के आधार पर आगे अनुसंधान को जरूरी बताया था।

‘नीट’ से पहले ही मिला था अलर्ट

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आरपीएमटी-2009 जांच रिपोर्ट पर समय रहते कार्रवाई होती, तो बाद के वर्षों में पेपरलीक नेटवर्क इतनी मजबूती नहीं पकड़ते। आज नीट सहित कई परीक्षाओं में सामने आ रहे संगठित फर्जीवाड़े की शुरुआती चेतावनी राजस्थान को 16 साल पहले मिल चुकी थी।

मार्च में भी हुई थी शिकायत

इस मामले में 13 मार्च को मुख्यमंत्री संपर्क पोर्टल पर उच्चस्तरीय अथवा एसओजी जांच की मांग करते हुए शिकायत दर्ज कराई गई। जवाब नहीं मिलने पर 9 अप्रेल को मुख्यमंत्री कार्यालय को स्पीड पोस्ट से पत्र भेजा गया, जिसे भी पोर्टल पर परिवाद के रूप में दर्ज किया गया। इसके बाद अनुस्मारक (रिमाइंडर) भेजे गए, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं आया।

Updated on:
26 May 2026 12:52 pm
Published on:
16 May 2026 06:59 am