
क्या राहुल कस्वां को राजेंद्र राठौड़ से अदावत भारी पड़ी, जानिए टिकट कटने पर क्या बोले राजेंद्र राठौड़
[typography_font:14pt]सबसे युवा सांसद बने
[typography_font:14pt]पायलट का नाम लोकसभा इतिहास में सबसे कम उम्र के सांसद के तौर पर दर्ज है। पायलट जब पहली बार संसद पहुंचे तब उनकी उम्र महज़ 26 साल ही थी।
[typography_font:14pt]जारी रहा जीत का सिलसिला
[typography_font:14pt]कांग्रेस पार्टी ने वर्ष 2004 में दौसा लोकसभा सीट से जीते सचिन पायलट को वर्ष 2009 में भी टिकट दिया, लेकिन परिसीमन होने के कारण दौसा सीट एसटी रिज़र्व हो गई। इस पर दौसा सीट के स्थान पर पार्टी ने उन्हें अजमेर लोकसभा सीट से मौक़ा दिया। परंपरागत सीट से बदली सीट पर जीतना बड़ी चुनौती थी, लेकिन पायलट यहां भी पार्टी की उम्मीदों पर खरे उतरे।
[typography_font:14pt]2009 लोकसभा चुनाव में वे निकटतम प्रतिद्वंदी भाजपा की किरण माहेश्वरी को शिकस्त देकर लगातार दूसरी बार संसद पहुंचने में कामयाब रहे।
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नहीं बना सके जीत की हैट्रिक
[typography_font:14pt]'जीत की गारंटी' की पहचान बन रहे सचिन पायलट को कांग्रेस पार्टी ने वर्ष 2014 लोकसभा चुनाव में लगातार तीसरी बार भी टिकट थमा दिया। इस बार उन्हें अजमेर सीट से ही मौक़ा दिया गया। लेकिन वे भारतीय जनता पार्टी के अपने निकटतम प्रतिद्वंदी सांवर लाल जाट से हार गए। इस तरह वे लोकसभा चुनाव में जीत की हैट्रिक बनाने से वंचित रह गए।
[typography_font:14pt]फिर कर लिया विधानसभा रुख
[typography_font:14pt]2014 में लोकसभा हारे पायलट पर कांग्रेस ने फिर विधानसभा चुनाव में मौक़ा देना शुरू किया। इसके बाद वे लगातार दो बार वर्ष 2018 और वर्ष 2023 में टोंक विधानसभा सीट से जीतकर विधायक बने।
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क्या इस बार लड़ेंगे लोकसभा चुनाव?
[typography_font:14pt;" >पायलट का नाम एक बार फिर से लोकसभा चुनाव में संभावित उम्मीदवारों में लिया जा रहा है। उन्हें टोंक लोकसभा सीट से बतौर कांग्रेस प्रत्याशी उतारे जाने की चर्चाएं हैं। हालांकि पायलट ने इन अटकलों और चर्चाओं पर कहा है कि आलाकमान जो निर्देश देगी उसे वे मानेंगे। इधर बताया जा रहा है कि लोकसभा चुनाव लड़ना या ना लड़ना, आलाकमान ने सचिन पायलट के फैसले पर ही छोड़ा हुआ है।