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राजस्थान के 309 शहरी निकायों में से सिर्फ 33 में ही जोनल प्लान लागू, जानें बाकी शहरों में क्यों अटकी विकास की प्लानिंग

नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन विभाग के स्तर पर नवगठित शहरों के मास्टर प्लान तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है। इनमें भी फिलहाल जोनल प्लान की व्यवस्था को शामिल नहीं किया गया है।
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Rajasthan Zonal Plan

राजस्थान के 33 शहरों में जोनल प्लान लागू। फोटो: एआई

जयपुर। राजस्थान के शहरों के मास्टर प्लान बनाए जा रहे हैं। इनमें यह भी तय किया जा रहा है कि अगले 20-25 साल में शहर किस दिशा में विकसित होंगे, लेकिन आपके इलाके में सड़क कहां होगी, पार्क के लिए जमीन कहां रहेगी, स्कूल-अस्पताल कहां बनेंगे और बाजार की सीमा कहां होगी? इन सवालों का जवाब जोनल डेवलपमेंट प्लान में होता है और सुनियोजित विकास की यही महत्वपूर्ण कड़ी कई शहरों में अधूरी है।

नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन विभाग के स्तर पर नवगठित शहरों के मास्टर प्लान तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है। इनमें भी फिलहाल जोनल प्लान की व्यवस्था को शामिल नहीं किया गया है। अफसरों का तर्क है कि जरूरत पड़ने पर स्थानीय निकाय या यूआइटी स्तर पर जोनल प्लान तैयार किए जा सकते हैं। परेशानी यहीं तक सीमित नहीं है। कई बड़े शहरों के मास्टर प्लान तैयार हो चुके हैं, लेकिन वहां भी अब तक जोनल प्लान लागू नहीं हो सके हैं।

राजस्थान में नवगठित निकायों सहित कुल 309 शहरी निकाय हैं, लेकिन करीब 33 शहरों में ही जोनल प्लान लागू हो पाए हैं। इसकी वजह यह है कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने नगर पालिका संशोधन विधेयक, 2020 के जरिए प्रावधान किया था कि केवल उन्हीं निकायों के लिए जोनल प्लान तैयार करना अनिवार्य होगा, जिनकी आबादी एक लाख से अधिक है।

ये हैं साइड इफेक्ट

प्रदेश के जिन 276 शहरों में जोनल प्लान लागू नहीं हैं, वहां पहले कॉलोनियां बसने और बाद में सुविधाओं की जरूरत सामने आने के हालात बनते हैं। इसके बाद सड़क चौड़ी करने, पार्क के लिए जमीन तलाशने या स्कूल-अस्पताल के लिए जगह उपलब्ध कराने में मुश्किल हो सकती है।

इसलिए जरूरी

किसी भी शहर के मास्टर प्लान और ले-आउट प्लान के बीच की कड़ी है जोनल डवलपमेंट प्लान। भूमि के उपयोग के लिए जोनवार (इलाकेवार) विकास का खाका तैयार होता है। शहर को अलग-अलग जोन में बांटते हैं और हर जोन की अलग से डवलपमेंट योजना बनाई जाती है। इसमें आवास, सार्वजनिक भवन, जनसुविधा केन्द्र, सड़क, मनोरंजन केन्द्र, पार्क, उद्योग, व्यवसाय, बाजार व स्कूल आदि के लिए जगह चिह्नित करते हैं। इसके अलावा बिजली, पानी, अंदरूनी सड़कों जैसी मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी प्लानिंग भी इसी का हिस्सा है। डवलपमेंट फंड कैसे और कहां से आएगा, इसका भी होमवर्क होता है।

इनका कहना है

मास्टर प्लान बनने के बाद यह भी तय होना जरूरी है कि जमीन का इस्तेमाल किस तरह और किस इलाके में होगा। जोनल प्लान नहीं होंगे तो सवाल उठता है कि नई कॉलोनियों में सड़क, पार्क, स्कूल और अस्पताल के लिए जमीन कहां से आएगी?
-सी.एस. पाराशर, पूर्व अतिरिक्त मुख्य नगर नियोजक, राजस्थान