जयपुर

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना… चंबल को खोद कर नाव से मध्यप्रदेश हो रही बजरी तस्करी

घडिय़ाल संरक्षित क्षेत्र, प्रशासन और वन विभाग की नाक के नीचे चल रहा खेल...
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Jan 02, 2018
 Gravel mining

जयपुर/धौलपुर। डांग इलाके में बहने वाली चंबल नदी इन दिनों बजरी तस्करों के लिए वरदान बनी हुई है। क्योंकि इस इलाके में नदी के एक तरफ राजस्थान और दूसरी तरफ मध्यप्रदेश है, जिसके चलते तस्कर नदी के रास्ते बजरी यहां से वहां ले जा रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि ये काम प्रशासन और वन विभाग की नाक के नीचे हो रहा है।

तस्करों की हिम्मत और तरीका भी कमाल का है। जिस क्षेत्र से बजरी की अवैध तस्करी होती है वह घडिय़ाल संरक्षित क्षेत्र है। तस्कर यहां से बजरी को बोरियों में भरते हैं और फिर नाव से नदी पार कर मध्यप्रदेश जाते हैं। वहां पर इन बोरियों को ट्रैक्टरों में भरकर मध्यप्रदेश के अन्य इलाकों में भेजा जाता है।

अन्य क्षेत्रों से भी बजरी का उत्खनन

वर्तमान में प्रतिदिन सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में रेता जा रहा है। ऐसा नही है कि राजस्थान क्षेत्र में बजरी नहीं आ रही है, लेकिन यहां भी चोरी छिपे अन्य क्षेत्रों से भी बजरी का उत्खनन किया जा रहा है। जिसमे मदनपुर, डांगरीपुरा आदि क्षेत्र शामिल हैं।

चंबल को खोद कर नाव से मध्यप्रदेश हो रही बजरी तस्करी
पहले बोरियों में भरी बजरी
फिर नाव से पार की सीमा
उधर, ट्रैक्टरों से किया परिवहन

शीर्ष कोर्ट ने लगा रखी है रोक
घडिय़ाल संरक्षित क्षेत्र होने के कारण पूरे चंबल बहाव क्षेत्र में सुप्रीम कोर्ट ने बजरी उत्खनन पर रोक लगा रखी है, लेकिन इसके बावजूद यहां पर खनन के साथ साथ तस्करी भी हो रही है।

यहांं चल रहा खेल
मदनपुर
डांगरीपुरा

चौकी भी है स्थापित
घडिय़ाल क्षेत्र होने के कारण वन विभाग की ओर से इस क्षेत्र में एक चौकी स्थापित की हुई है और यहां विभाग के कर्मचारी भी तैनात है, लेकिन यह सब कुछ जानते हुए भी न तो क्षेत्र मे गश्त करते हैं न ही बजरी उत्खनन पर रोक लगाने की कार्यवाही करते हैं।

Published on:
02 Jan 2018 04:39 pm