जयपुर

Bhagat Singh Jayanti : भगत सिंह के नोटबुक की कॉपी मास्को से लाए थे प्रकाश

Bhagat Singh Jayanti: दुनियाभर में युवाओं के प्रेरणा पुंज बने शहीद भगत सिंह की गुरुवार को 116वीं जयंती है। उनसे जुड़ी कई ऐतिहासिक चीजें उनके विचारों और कुर्बानी की याद दिलाती हैं।
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Updated: 28 Sep 2023, 11:24 AM IST
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मोहम्मद इमरान
पत्रिका न्यूज नेटवर्क/जयपुर। Bhagat Singh Jayanti: दुनियाभर में युवाओं के प्रेरणा पुंज बने शहीद भगत सिंह की गुरुवार को 116वीं जयंती है। उनसे जुड़ी कई ऐतिहासिक चीजें उनके विचारों और कुर्बानी की याद दिलाती हैं। हालांकि, इतिहास के पन्नों में उन्हें एक क्रांतिकारी के तौर पर ज्यादा जाना जाता है। उनके जेल में रहने के दौरान लिखे नोट्स से उनकी वैचारिक पृष्ठभूमि और भविष्य के भारत की तस्वीर को समझा जा सकता है। जयपुर के 80 वर्षीय प्रकाश चतुर्वेदी के पास भगत सिंह के जेल में लिखे नोट्स की प्रतिकृति मौजूद है। यह प्रतिकृति उन्होंने 1979 में पीएचडी करने के दौरान मॉस्को से हासिल की थी। इसमें भगत सिंह ने जेल में पढ़ने-लिखने के दौरान जो नोट्स बनाए वह दर्ज हैं।

भाई कुलतार सिंह ने इंदिरा गांधी को दी:
प्रकाश ने बताया कि भगत सिंह की फांसी के बाद यह नोटबुक अंग्रेज अफसरों ने उनके परिजन को दी। वर्ष 1973-74 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पंजाब दौरे पर गईं, तब भगत सिंह के भाई कुलतार सिंह ने उन्हें यह नोटबुक दी थी। इंदिरा के हाथ से नोटबुक भीड़ मं गिर गई थी, जिसे पुलिस ने बरामद कर पोथीखाने में रखवा दिया था। बाद में मित्रोखिन इस नोटबुक को अपने साथ रूस ले गए थे।

नोटबुक में महत्वपूर्ण विचारकों का जिक्र
प्रकाश ने बताया कि सोवियत एम्बेसी में कल्चरल सेक्रेटरी रहे वेसिली मित्रोखिन ने इस हस्तलिखित नोटबुक को टाइप करवाके कई कॉपियां बनाई थीं। प्रकाश वर्ष 1979 में ‘इंडियन रेवोल्यूशनरीज एब्रॉड’ विषय पर पीएचडी के दौरान मास्को गए। जहां उनके सुपरवाइजर डॉ. देवेन्द्र कौशिक ने इस नोटबुक के बारे में बताया। वे मित्रोखिन के घर पहुंचे और एक कॉपी प्राप्त की। बाद में 150 से ज्यादा पन्नों की इस नोटबुक को आईपीएस बी. हूजा ने भगत सिंह से संबंधित अपनी किताब में प्रकाशित किया।

सुपरवाइजर ने बताया नोटबुक के बारे में
प्रकाश ने नोटबुक के बारे में बताया कि भगतसिंह ने जेल में पढ़ने के दौरान कार्ल मार्क्स, जॉर्ज वॉशिंगटन, लेनिन, ज्यूरिस्ट प्रीसिडेंट्स, सोशल चेंज, फ्रीडम, समानता, नो रिलिजन पर भी लिखा था। नोटबुक से भगतसिंह एक क्रांतिकारी की बजाय सोशल एक्टिविस्ट ज्यादा नजर आते हैं। उन्होंने अकेले ‘नौजवान भारत सभाद्य का गठन किया, जिसे बाद में उन्होंने हिंदोस्तान सोशल रिपब्लिक एसोसिएशनद्य में बदल दिया। इत्तेफाक से 28 सितंबर को प्रकाश का भी जन्मदिन होता है।

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